रहीमुल्ला यूसुफज़ई नहीं रहे

तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान की जब भी बात होती थी, 1990 के दशक के आख़िरी सालों में, एक ही नाम हमारे ज़हन में आता था. अफ़ग़ानिस्तान पर हर डॉक्यूमेंटरी या रिपोर्ट में उनकी मदद शामिल होती थी, कभी स्क्रीन पर, कभी पोशीदा. बीबीसी हिंदी, उर्दू, पश्तो और फ़ारसी रेडियो पर रोज़ उनकी नाज़ुक-सी, शांत और ठहरी हुई आवाज़ में ख़बरों के पीछे की खबर सुनाई देती थी.

लंबे समय तक पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ों से बीबीसी पर अफ़ग़ानिस्तान का ताज़ा हाल बताने वाले, ख़बरों और अफ़वाहों में चुटकी में फ़र्क़ करने वाले रहीमुल्ला यूसुफज़ई साहब इस दुनिया से विदा हो गए. कैंसर ने उन्हें ऐसे समय हमसे छीन लिया जब उनकी ज़रूरत हम एक बार फिर महसूस कर रहे थे, तालिबान की वापसी के बाद. मैंने न जाने कितनी बार उन्हें देर रात या बहुत सुबह लंदन से फ़ोन किया है, कभी नाराज़ नहीं हुए. अभी दो दिन पहले पता किया तो मालूम हुआ कि बीमार हैं, बात नहीं कर पाएँगे.

आपकी याद हमारे साथ रहेगी हमेशा, जब भी अफ़ग़ानिस्तान का ज़िक्र आएगा, आपके बिना पूरा न होगा.🙏

राजेश प्रियदर्शी की फ़ेसबुक वाल से साभार

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