रक्षा सौदों में घूसकांड , उन्नीस साल बाद फैसला आया

—पंकज प्रसून , वरिष्ठ पत्रकार

शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट के जज वीरेंद्र भट ने सन् 2001 में  उजागर हुए  रक्षा सौदे में घूसखोरी कांड के तीन आरोपियों को गुनहगार माना है. औपरेशन वेस्ट एंड नामक इस घोटाले को तहलका.कौम नामक वेबसाइट ने स्टिंग ऑपरेशन करके देश के सामने पेश किया था.

यह भी अजीब सी बात है कि मुख्य धारा की मीडिया इस खबर को गोल कर गयी. हिंदुस्तान टाइम्स और सिर्फ वायर् और उसके हवाले से जनचौक नामक वेब पोर्टल ने उसे प्रकाशित किया.

इस घोटाले के दो आरोपियों जार्ज फर्नांडिस  की पिछले वर्ष और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और अटल बिहारी वाजपेई सरकार में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बंगारू लक्ष्मण की सन् 2000 में मृत्यु हो चुकी है.

हालांकि इस मामले की जांच के लिये बने सेवा निवृत्त न्यायमूर्ति फुकन आयोग ने जार्ज फर्नांडिस को घूसखोरी के आरोप से बरी कर दिया, था.फुकन आयोग के निष्कर्षों को यूपीए सरकार ने खारिज़ कर दिया और न्यायमूर्ति के.वेंकटस्वामी की अध्यक्षता में एक नया आयोग बनाया जिन्होंने अपनी रिपोर्ट पेश करने से पहले इस्तीफा दे दिया.

इसलिये बचे हुए तीन आरोपी समता पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष जया जेटली, उनकी पार्टी के सदस्य गोपाल पचेरवाल और सेवानिवृत्त मेजर जनरल एस पी मुर्गई को सजा भुगतनी होगी.जुलाई 29 को न्यायाधीश फैसला सुनायेंगे कि किसे कितनी सज़ा मिलेगी.

सन् 2000में सीबीआई ने न्यायालय में इन आरोपियों के विरुद्ध अभियोग पत्र दाखिल कर दिया था.

इस घूसखोरी कांड ने सारे देश को हिला कर रख दिया था. इसका किस्सा कुछ इस प्रकार शुरू होता है.

तहलका के एक रिपोर्टर ने जार्ज फर्नांडिस के निवास स्थान पर समता पार्टी की अध्यक्ष जया जेटली से मुलाकात की ब्रिटेन की थर्मल इमेजिंग बनाने वाली एक फर्जी कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में मुलाकात की और भारतीय सेना के लिये उस उपकरण की खरीदगी के लिये सौदेबाजी की.

जया जेटली और बंगारु लक्ष्मण को रिपोर्टर से घूस की रकम हाथ में लेते हुए गुप्त कैमरे से फिल्माया गया.जब यह पूरा किस्सा देश के प्रमुख समाचार चैनलों पर प्रसारित हुआ तो जया जेटली कुछ दिनों के लिये गायब हो गयीं.फिर जब प्रकट हुई तो घोषणा की कि उन्हें फंसाया गया है.

इस रहस्योद्घाटन का परिणाम यह हुआ कि जया जेटली को अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा, जार्ज फर्नांडिस को रक्षा मंत्रालय से हटा दिया गया और बंगारु लक्ष्मण को भाजपा अध्यक्ष पद से तो इस्तीफा देना पड़ा, जेल भी जानी पड़ी.

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