9 अगस्त को किसान विरोधी 4 अध्यादेशों सहित 9 मुद्दों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस

किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की गूगल मीट 

(मीडिया स्वराज़ डेस्क  )

भोपाल, 13 जुलाई. 

 किसान संघर्ष समिति  मध्यप्रदेश की प्रदेश स्तरीय  बैठक आज  गूगल मीट पर संपन्न हुई जिसमें 20 जिलों के 20 पदाधिकारी शामिल हुए . बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक और समाजवादी नेता डॉ सुनीलम ने 4 किसान विरोधी अध्यादेशों  के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 250 किसान संगठनो ने 9 अगस्त को इन अध्यादेशों के खिलाफ और अन्य मांगों सहित 9 मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस मनाने का निर्णय किया है।

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार  सुनीलम ने कहा कि देश मे पहली बार किसानों और श्रमिकों के संगठनों  की व्यापक एकजुटता जमीन पर बन रही है।उन्होंने भूमि अधिकार आंदोलन द्वारा 23 जुलाई को होने वाले आंदोलन के समर्थन की घोषणा की ।उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की मध्यप्रदेश इकाई की ऑनलाइन बैठक प्रदेश संयोजक बादल सरोज द्वारा जल्दी ही बुलाई जाएगी ,जिसमें प्रदेश व्यापी कार्यक्रम के प्रारूप सम्बन्धी निर्णय लिए जाएंगे ।

 इंदौर से किसंस के मालवा-निवाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री और सचिव दिनेश कुशवाह  ने कहा कि कृषि मंत्री कमल पटेल ने मूंग के समर्थन मूल्य पर खरीद की घोषणा की थी तथा किसानों को मूंग का पंजीयन कराने का कहा था लेकिन किसी भी किसान का पंजीयन नहीं कराया गया और अब स्थिति यह है कि किसानों को समर्थन मूल्य पर साढ़े  सात हजार के ऊपर बिकने वाली मूंग तीन से साढ़े तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल पर बेचनी पड़ रही  है । मंडी संशोधन बिल किसानों के खिलाफ  तथा व्यापारियों के हित में है।उन्होंने कहा कि हम इसके खिलाफ  विरोध करेंगे तथा उसकी लड़ाई आगे भी लड़ेंगे।

किसंस प्रदेश उपाध्यक्ष एड.आराधना भार्गव ने कहा कि प्रदेश का किसान यूरिया के लिए परेशान हैं, किन्तु प्रदेश के मुख्यमंत्री किसान पुत्र अपनी सरकार बचाने के लिए चुनाव की तैयारी में व्यस्त  है ।यूरिया के लिए सोसाईटी के सामने महिला किसान अपने बच्चों को छोड कर लाइन में खडी है ।शारीरिक दूरी ना ही कोई मास्क पहनकर कर लाइन मे  खडा है ,ऐसे में  गांव में  महामारी फैलने की अधिक सम्भावना हो गई है।

 रीवा के किसंस के महामंत्री इंद्रजीत सिंह  ने जंगली जानवरों से नष्ट हुई फसलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें जंगली जानवरों के द्वारा नष्ट कर दी जाती है  जिससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से नष्ट हुई फसलों का सर्वे कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए तथा वन विभाग द्वारा जंगली जानवरों को पकड़कर जंगलों में छोड़ना चाहिए। 

 झाबुआ के किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव राजेश बैरागी और जिला अध्य्क्ष गोपाल डामोर ,महामंत्री नरेंद्र मुनिया  ने कहा कि झाबुआ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है यहां वर्षों से काबिज आदिवासियों को सरकार की घोषणा  के बावजूद वन अधिनियम के अंतर्गत पट्टे नहीं दिए गए हैं। जिले से दिल्ली मुंबई 8 लाइन भारतमाला हाईवे निर्माण में किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है जिसका 2003 की गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा नहीं दिया गया है। कांग्रेस सरकार की कर्ज माफी योजना से कई आदिवासी आज भी वंचित है। उन्होंने कहा कि झाबुआ के किसान लॉकडाउन खत्म होने के बाद डॉ सुनीलम जी की उपस्थिति में झाबुआ के किसान किसान पंचायत का आयोजन कराना चाहते हैं।

 सिवनी से किसंस के जिलाध्यक्ष डॉ राजकुमार सनोडिया ने कहा कि किसानों को अपने ही मेहनत पसीने से पैदा की गई अपनी ही फसल को ओने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। समर्थन मूल्य पर मक्का की खरीदी ना हो सकी आधा दाम भी नहीं मिला ।गेहूं भी गलत नीतियों की बली चढ़ गया । हजारों टन अनाज सड़ गया। वर्तमान फसल को तैयार करने के लिए खाद सोसायटीयों में नही मिल पाने से अफरा तफरी का माहौल बना । बिचौलियों के माध्यम से यूरिया खाद के नाम पर किसानों  की खुली लूट की जा रही है । बीज एवं दवाई भी बढ़े हुये दाम में मिल रहे हैं 

  पेंच व्यपवर्तन परियोजना की मुख्य केनालों के निर्माण कार्य में हुई लापरवाही की जांच होनी चाहिये  एवं इस योजना से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि दी जानी चाहिये । टोल नाके को पार करके अपने खेतों में 5 कि मी के दायरे में आने वाले किसानों की गाड़ियों से  टोल वसूली के नाम पर प्रति दिन 110 रू लिए जा रहे है ,इस पर रोक लगना चाहिये ।

बीना परियोजना प्रभावित किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्री कुबेरसिंह कुर्मी ने कहा कि इस परियोजना में सागर एवं रायसेन जिले के 72 गांव के किसानों की जमीन डूब से प्रभावित हो रही है। 3 वर्ष से डूब प्रभावित किसान लगातार संघर्ष कर रहे है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारों ने हमारी मांगों को अनसुना कर दिया गया है। सिंचित भूमि का मुआवजा 4 लाख रुपये एकड़ निर्धारित किया गया है। किसानों की मांग है कि जमीन के बदले जमीन दी जाये।

किसंस के महामंत्री भागवत परिहार ने कहा कि किसंस मुलताई के पदाधिकारियों ने खाद बीज की कमी की आशंका के मद्देनजर  किसानों को खाद बीज आपुर्ति कराने  हेतु मुख्यमंत्री को ईमेल द्वारा ज्ञापन पत्र भेजा  था लेकिन सरकार द्वारा गंभीरता से नही लेने के कारण आज खाद की कमी और कालाबाजारी हो रही है।

हरदा से किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष योगेश तिवारी ने कहा कि लॉकडाउन के नाम पर सरकार किसानों को बाजार में अपनी उपज बेचने नहीं दे रही है जबकि  शराब की दुकान पर शराबियों का मेला लगा रहता है क्या यह महामारी फैलने का कारण नहीं हो सकता ? उन्होंने कहा कि शासन द्वारा कोरोना काल में दिए जाने वाले मुफ्त राशन से कई गरीबों को यह कह कर वंचित रखा गया है कि उनके नाम की पर्ची नहीं आई है। उन्होंने कहा कि वे राशन वितरण में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ गरीबों के हक में लड़ाई जारी रखेंगे।

 रायसेन से किसंस के महामंत्री श्रीराम सेन ने   ऑनलाइन बैठक में बताया कि सिलवानी ग्रामीण अंचल  में जन वितरण प्रणाली के गेहूं के साथ प्रति व्यक्ति 1 किलो चावल मिलना चाहिए जो वितरक द्वारा वितरण नहीं किया जा रहा है । पीएम फंड से चावल वितरण में बड़े पैमाने पर कालाबाजारी हो रही है। जबकि सरकार द्वारा कंप्यूटरीकरण हो गया है , आम आदमी को सुविधा पहुंचाने के लिए और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मशीनें चालू की गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मशीन में उंगली तो लगवाई जाती है लेकिन पर्ची नहीं दी जाती वहीं पर फूड इंस्पेक्टर कहते हैं की पर्ची निकालने वाला रोल नहीं रहा है लेकिन पर्ची का रोल निकलता है पर्ची निकलती है उसी पर्ची के पीछे राशन चढ़ा दिया जाता है और आधी पर्ची आदमी को दी जाती है ।

गूगल मीट का संयोजन सामिति के प्रदेश महामंत्री टी आर आठ्या ने किया।

 

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