मधुमक्खी वाला : मीठा-मीठा सा रहस्यमय संसार

आज एक “मधुमक्खी वाला’’ से मुलाकात हुई। निमित सिंह पेशे से मैकेनिकल इन्जीनियर और अब एक स्वप्रेरित Honey bee उद्यमी हैं।
उनसे मुलाकात ने मेरी बड़ी पुरानी यादें ताजा कर दीं। हम लोग गोरखपुर विश्वविद्यालय की हीरापुरी आवासीय कालोनी में रहा करते थे। स्वतन्त्र मकान था।
माता-पिता, मैं और मेरे भाई आनन्द, सभी बागवानी के शौकीन थे। जाड़े के दिनों में डहेलिया, ग्लैडोलस, सनफ्लावर, सरसों के अतिरिक्त पेंज़ी, पॉपी, फ्लेक्स, वर्बिना, नस्टर्शियम, डेजी, पेपर फ्लावर, एन्टेरेनम आदि फूलों से क्यारियां भरी रहती थीं।
मेरे पिता प्रो. शैलनाथ चतुर्वेदी ने किसी के सुझाव पर 1970 के दशक में गोरखपुर के राजकीय उद्यान ‘हुई पार्क’ (गोरखपुर के कलेक्टर हुई के नाम पर) स्थित उद्यान विभाग से मधुमक्खी के दो डब्बे लगवाये।
उद्यान विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिये sale and service की स्कीम के अन्तर्गत डब्बे लगाये जाते थे।
जहां तक मुझे याद है पहला डब्बा 160 रूपये और दूसरा डब्बा 220 रूपये का लगा था, जिसमें एक सेट मधुमक्खी डालकर किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाता था।
शहद निकालने का रोचक दृश्य
मधुमक्खी वाला
मधुमक्खी वाला
 
जब पहली बार हमारे घर के डब्बे से शहद निकालने के लिये टीम आयी तो बड़ा रोचक दृश्य था।
अधेड़ उम्र के सरकारी कर्मी ने एक जालनुमा हैट पहना, जिसका मच्छरदानी जैसा नेट उनके शरीर पर छा गया।
फिर उन्होंने ग्लब्स पहन कर मधुमक्खी के डब्बे में एक सेक्शन को खोला और लकड़ी के फ्रेम पर मोम की शीट्स लगा कर तैयार किए रैक्स निकाले, जो वर्कर मधुमक्खियों की अटूट मेहनत से एकत्र किये गये शहद से लबालब भरे हुये थे।
उनकी परत को बड़ी सावधानी से उन्होंने चाकू से साफ किया और फिर एक फ्रेम युक्त ड्रम में उन्हें वर्टिकल रखा।
ड्रम में लगे हैण्डिल को घुमाने से सेंट्रीफ्यूगल फोर्स के सिद्धान्त के अनुसार शहद ड्रम की तलहटी में गिर गया और खाली हुये फ्रेम निकाले गये और मोम की नयी शीट्स लगाकर पुनः मधुमक्खी डब्बे में लगा दिये गये।
मधुमक्खियों का समाज
 
Different types of honeybees
Different types of honeybees
 
 
फिर यह क्रम चल निकला। हम लोग देखते थे कि हर बार निकला हुआ शहद अलग-अलग रंग और viscosity का होता था। कोई पतला तो कोई गाढ़ा, कोई सुनहरे रंग का और कभी गहरे रंग का।
एक बार प्रभारी आये और परीक्षण के बाद उन्होंने पिता जी से कहा कि डाक्टर साहब आपकी ‘रानी’ मारी गई। हम लोग खूब हंसे थे।
वस्तुतः मधुमक्खियों के डब्बे में 03 प्रकार की मधुमक्खियां होती हैं। रानी मक्खी (Queen Bee) आकार में बड़ी और नेतृत्व करने वाली होती है।
इसके अतिरिक्त कुछ मधुमक्खियां प्रजनन करती हैं और शेष मधु संग्रह का काम करती हैं, जिन्हें वर्कर कहा जाता है।
आज निमित सिंह से मुलाकात के बाद मधुमक्खियों के बारे में, विशेषकर उनके व्यवहार के बारे में बहुत सी नई और रोचक जानकारियाँ प्राप्त हुईं, जो साझा कर रहा हूँ।
बीस हजार में मात्र 4 प्रजातियाँ उत्पन्न करती हैं शहद
दुनिया में मधुमक्खियों की 20,000 से ज्यादा प्रजातियाँ पायी जाती हैं, किन्तु इनमें से केवल 4 प्रजातियाँ शहद पैदा करती हैं और ये चारों भारत में पायी जाती हैं।
एक स्वस्थ मधुमक्खी का जीवन काल केवल 45 दिन का होता है। उनके पेट में दो हिस्से होते हैं। एक का उपयोग स्वयं का खाना पचाने के लिये और दूसरा फूलों का रस इकट्ठा करने के लिये करती हैं।
औसतन मधुमक्खियाँ एक किग्रा शहद बनाने में 40 लाख फूलों का रस चूसतीं हैं। मधुमक्खियों द्वारा बनाया गया शहद सैकड़ों साल तक खराब नहीं होता।
मधुमक्खियों का छत्ता Hexagonal आकार का होता है, यानि वह छः कोनों का घर बनाती हैं।
यह भी एक विचित्र तथ्य है कि मधुमक्खियों में भी कुत्तों की तरह विस्फोटक पदार्थ सूँघने और ढूँढने की शक्ति होती है और उनमें 170 तरह के Receptors होते हैं।
विश्व प्रसिद्ध जर्मन इथोलॉजिस्ट  Karl Ritter von Frisch को मधुमक्खियों की गतिविधियों, उनके व्यवहार और सम्प्रेषण के अध्ययन के लिये 1973 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
बीटेक करके निमित ने शुरू किया स्टार्टअप
29 वर्षीय निमित सिंह ने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इन्जीनियरिंग में वर्ष 2014 में बी-टेक करने के बाद एक स्टार्ट-अप शुरू करने का मन बनाया।
उनके पिता लखनऊ के सुप्रसिद्ध शल्य चिकित्सक, डॉ. केएन सिंह ने उनका हौसला बढ़ाया और निमित ने अपने पारिवारिक मित्र राजीव मिश्रा के साथ मिलकर Royal Honey and Bee Farming Society (RHBFS) पंजीकृत करायी।
उन्होंने जनवरी से दिसम्बर तक सरसों, यूकेलिप्टस, लीची, मक्का, बबूल, जामुन, नीम, धान, मल्टीफ्लावर आदि विभिन्न स्रोतों से एकत्र किये गये शहद का विस्तृत अध्ययन किया।
विकसित किया मधुमक्खीवाला ब्रांड
मधु मक्खी पालन शहद बनाने की प्रक्रिया और मार्केटिंग
 
 
आज Royal Honey कम्पनी ‘मधुमक्खीवाला’ Brand से 08 फ्लेवर के शहद का सफलतापूर्वक उत्पादन और मार्केटिंग कर रही है।
शहद वास्तव में मिनिरल्स, विटामिन्स और अन्य न्यूट्रीन्स की खान है और RHBFS द्वारा उनके नैसर्गिक गुणों को सुरक्षित रखने का वैज्ञानिक प्रयास किया जाता है।
निमित उर्फ मधुमक्खीवाला ने बताया कि आजकल लोग मिठाई खाने से बचते हैं।
इसलिये बहुत सी पार्टीज में शहद के डिस्पेन्सर्स लगाये जाना पसन्द किये जा रहे हैं, जिससे लोगों को स्वास्थ्यवर्धक शहद का स्वाद मिल सके।
उनके गिफ्ट पैक भी शादी के कार्डों के साथ या कान्फ्रेन्स में दिए जा रहे हैं।
दुर्भाग्य से सरकारी योजना के तहत मधुमक्खी के डिब्बों की सेल एण्ड सर्विस स्कीम बन्द हो गई है।
हार्टिकल्चर मिशन के अन्तर्गत अब राज्य सरकार एक इकाई (50 बाक्स) लगाने पर आने वाले व्यय 2.20 लाख पर 40 प्रतिशत सब्सिडी देती है।
निवेश पर लगभग तिगुना लाभ
निमित की कम्पनी RHBFS भी यह डब्बे प्रगतिशील किसानों के लिये लगाती है। उनकी संस्था एक सप्ताह की ट्रेनिंग देती है।
निमित ने अनौपचारिक वार्ता में यह भी बताया कि एक बाक्स 3000/ का मिलता है।
यदि कोई उद्यमी 10 बाक्स ले तो 30000/ का निवेश होगा। एक बाक्स से औसतन 40 किग्रा शहद  160 रुपये की दर से 64000 रुपये की आय होगी।
इसके अतिरिक्त 10 बाक्सों से by product के रूप में Bee Pollen (anti-bacterial-ingredient in Betadine) 15kg@2500 की दर से 37500 रुपये और Bee wax 10kg @ 200 रुपये की दर से 2000 रुपये मिलेंगे, कुल 39500 रुपये आय होगी।
इन्हें प्राप्त करने के लिए Pollen trap, Propolis Sheet, Inner cover पर कुल 7000/- का सालाना व्यय आता है।
इस प्रकार कुल 37000 रुपये के निवेश पर कुल लगभग 1 लाख का रिटर्न, शुद्ध लाभ लगभग 60-65 हजार और अगले वर्ष से व्यय कुल 7000/- तथा मुनाफा लगभग 90000/- तक प्रति वर्ष हो सकता है।
वर्तमान में उनकी कम्पनी के उत्पादन का टारगेट 40 टन है, जिसके लिये उनकी संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, बंगाल, राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश में कॉपरेटिव के आधार पर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कई थानों में लगी फैक्ट्री
थाना देवा, जनपद बाराबंकी क्षेत्र के अन्तर्गत उनके द्वारा लगायी गयी  फैक्ट्री उद्यमकर्मियों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है।
श्री निमित सिंह  एक नई सोच और दृढ़ विश्वास के युवा हैं, जो अपनी पहल से लोगों को अपने साथ जोड़ रहे हैं और उन्हें बेहतर करने के लिये प्रेरित कर रहे हैं। 
वामा सारथी, बाराबंकी चैप्टर की पहल पर पुलिस लाइन्स ग्राउण्ड में 10 बाक्स रखवाने का निर्णय लिया गया है।
इसके अतिरिक्त निमित को जनपद के 23 थानों का सर्वे कर उपयुक्तता के आधार पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट देने को कहा गया है।
कम से कम 18 थानों में पर्याप्त स्थान और उपयुक्त वातावरण है।
ऐसी पहल करने पर एक ओर हम वामा सारथी की ओर से शुद्ध शहद की भेंट दे सकेंगे और दूसरी ओर थाना परिसर के रख-रखाव का एक फण्ड भी उपलब्ध हो सकेगा।
उक्त कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु चिन्हित थानों के 3-4 उत्साही एवं युवा चौकीदारों को चिन्हित कर मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिलाया जायेगा, जो इस रख-रखाव का कार्य करेंगे।
 
डॉ अरविन्द चतुर्वेदी
पुलिस अधीक्षक, बाराबंकी

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