देवोत्थानी एकादशी के पश्चात् शुभ मुहूर्त में शिलान्यास हो – लक्ष्मी मणि शास्त्री

लक्ष्मी मणि शास्त्री , राम कथा वाचिका 

परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज की भविष्य वाणी सत्य सिद्ध होती हुई दिखाई दे रही है। अयोध्या के समाचार के अनुसार श्री राम जन्मभूमि के पुजारी जी समेत वहां सुरक्षा में सन्नद्ध चौदह जवान कोरोना पाज़िटिव हो गये।

परम पूज्य महाराज श्री जैसे ही सुने कि पांच अगस्त को श्री राम जन्मभूमि पर शिलान्यास होने जा रहा है।अविलम्ब शास्त्रीय पक्ष को लेकर विद्वानों से आपकी चर्चा प्रारंभ हो गई। अंततः सर्व सम्मत से यह निर्णय लिया गया कि यदि पांच अगस्त को शिलान्यास होता है है तो देश को बहुत बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है क्यूंकि उस दिन शुभ मुहूर्त नहीं है।विद्वज्जनों द्वारा निर्णीत निर्णय को ही परम पूज्य गुरुदेव भगवान समाज के समक्ष देश हित को दृष्टिगत रखते हुए रखे।जिसका कुछ अदूर दर्शियों ने विरोध भी किया।उनका अपना जैसा स्तर था उसी स्तर की भाषा का प्रयोग भी किया।

किन्तु जब पुजारी जी समेत १५ लोगों के कोरोना होने का समाचार आया तब देश में यत्र तत्र सर्वत्र यह चर्चा प्रारंभ हो गई कि शंकराचार्य जी महाराज सत्य ही तो कह रहे हैं। अभी शिलान्यास हुआ नहीं और पुजारी जी ही कोरोना ग्रस्त हो गए।यह शुभ संकेत नहीं है।यह तो श्री अवध के प्रधान देवता श्री राघवेन्द्र की प्रतिकूलता का द्योतक है। अपने सदगुरु के प्रति अनन्य निष्ठावान राघवेन्द्र जो अपने गुरु देव के चरण कमलों का दर्शन होते ही अपने आप को स्थिर नहीं रख पाते-
धाइ धरे गुरु चरण सरोरुह
और
जे गुरु चरण रेनु सिर धरहीं
ते जनु सकल विभव बस करहीं
के सिद्धांत को मानने वाले श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण की नींव शास्त्र और गुरु की अवज्ञा पर पड़े इसे श्री राघव सहन नहीं कर सकते।

मर्यादा पुरुषोत्तम के मंदिर का श्री गणेश ही अमर्यादा से हो, श्रुति सेतु पालक के मंदिर में ही यदि श्रुति के परंपरा की रक्षा नहीं होगी तो भला शास्त्र के मर्यादा रक्षा की आशा कहां से की जायेगी?

मुझे आश्चर्य है कि जब भगवान बद्री विशाल का पट खोलना था तब तो कोरोनावायरस का हवाला देकर प्राचीन परम्परा से चले आ रहे शुभ मुहूर्त में पट नहीं खुलने दिया गया, और अब उसी कोरोना में शिलान्यास कैसे हो रहा है? परम पूज्य शंकराचार्य जी महाराज जगद्गुरु हैं वो तो प्रधानमंत्री जी समेत पूरे देश का हित चाहते हैं इसलिए देश के सामने अपना शास्त्रीय पक्ष रखे।

हमें प्रवाह में बहने की आवश्यकता नहीं है।प्रवाह में तो मुर्दा बहता है जो जीवित रहता है वह धारा को चीरकर निकल जाता है। जीवित व्यक्ति के लिए ही वेद,शास्त्र,पुराण, स्मृति आदि नियम संयम का आदेश करते हैं।मुर्दा के लिए कोई नियम लागू नहीं होता। यदि आप जीवित हैं तो शास्त्र और गुरु के आदेश का पालन करते हुए श्री अवध धाम में जहां-
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती
का पालन करने वाले लोग हैं,उसकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए देवोत्थानी एकादशी के पश्चात् आचार्यों के आचार्यत्व में और शुभ मुहूर्त में शिलान्यास हो इस पक्ष को दृढ़ता पूर्वक रखें और कटिबद्ध हों। अन्यथा मुर्दे की तरह प्रवाह में प्रवाहित होंगे तो शास्त्र की दृष्टि से मृत घोषित हो जायेंगे।

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