गोमुख अर्थात मॉं गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पहला कदम

आइए आज आपका साक्षात करवाते हैं गोमुख अर्थात मॉं गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने के पहले कदम से,,,,
माँ गंगा स्वर्ग को त्यागकर पृथ्वी पर जहाँ रखती हैं अपना पहला कदम उसे कहते हैं गोमुख—जहाँ पृथवी पर अवतरित होती हैं माँ गंगा। और शुरू करती हैं पृथ्वी पर अपनी 2525 किलोमीटर की लंबी यात्रा।।
सनातन धर्म के लोगों के साथ साथ दुनियांभर के लोगों में आज भी माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने के साक्षात बनने की गहरी चाहत है, लोग स्वयं आज गवाह बनना चाहते हैं।

माँ गंगा के इसी दिव्य, भव्य, आलौकिक दर्शनों के लिए गोमुख तक जाने की लोगों में होड़ मची हुई है। वो तो धन्य है उन लोगों का जिन्होंने गोमुख तक बढ़ रही भीड़ से माँ गंगा के उदगम गंगोत्री ग्लेशियर पर बढ़ दही दबाव व माँ गंगा के अस्तित्व पर मँडराते खतरों से सरकार को चेताया और सरकार ने गोमुख तक जाने वाली भीड़ को नियन्त्रित कर दिया।

सालों तक लाखों की संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक गोमुख पहुंचने लगे थे। समुद्रतल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर गोमुख में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखकर लगता था कि आप किसी बड़े शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में हैं। स्थिति को गंभीर होते देख और श्रद्धालुओं की भीड़ माँ गंगा के लिए खतरा बनने लगी तो सरकार ने गोमुख की भीड़ पर नियंत्रण कर प्रतिदिन 150 लोगों को गोमुख की यात्रा की अनुमति देने का फैसला किया।। तब से लेकर अब गोमुख तक जाने वालों की संख्या अब न के बराराबर ही रह गई है।

इसिलिय गंगोत्री ग्लेशियर बचा रहे, माँ गंगा का प्रवाह निर्वाध गति से चलता रहे, माँ गँगा निर्मल ,अविरल , स्वच्छ और भव्य दिव्य रूप में बहती रहे और आपलोगों को भी माँ गँगा के उद्गम गोमुख के दर्शन मिल जाएं इसीलिए हम लाये हैं आपके लिए गोमुख से माँ गँगा के पृथ्वी पर अवतरित होने के दृश्यों को।।
गंगोत्री ग्लेशियर यानी गंगोत्री हिमानी गंगा नदी के प्रमुख स्रोतों में से है और 27 घन किमी के आकार के साथ हिमालय की सबसे बड़ी हिमानियों में से एक है। यह 30 किलोमीटर (19 मील) लम्बी औरलगभग 4 किलोमीटर (1 से 2 मील) चौड़ी है।

इसी गंगोत्री लेशियर के (snout) यानी मुहाने को जिसे दुनियाँ “”गौमुख”” के नाम से जानती हैं ये बहुत ही अदभुत है आलौकिक है अकल्पनीय है , भव्य व दिव्य है। इसी दैवीय स्वरूप में पृथ्वी पर प्रकट होती हैं माँ गँगा।।
इसीलिए गोमुख से बंगाल तक है गंगा का विस्तार।
इसके किनारों पर सजते हैं कुम्भ जैसे मेले हजार।।
“””गोमुख में क्योँ लगी है ट्रॉली”’ इस विषय पर अगले अंक में आपको बताते हैं।।
लोकेंद्र सिंह बिष्ट
प्रान्त संयोजक, नमामि गंगे,
गँगा विचार मंच, NMCG उत्तराखंड
जलशक्ति मंत्रालय, भारत सरकार।।

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