विनोबा को पवनार आश्रम में दी गई श्रद्धांजलि


मृत्यु विषाद नहीं उत्सव है l इस विचार मे आस्था रखते हुए विनोबा भावे ने अपने अंतिम दिनो मे अन्न- जल का त्याग कर दीपोत्सव दीपावली के दिन 15 नवम्बर 1982 को अंतिम सॉंस ली थी थी . इसीलिए पवनार आश्रम पर मित्र मिलन 42 वर्ष से मनाया जा रहा है , जिसमें दुनिया के अनेक देशों और भारत के सभी प्रदेशों के लोग आते रहे हैं।इस वर्ष हो रहा भव्य आयोजन .

सम्पूर्ण विश्व एक तरीके से आमंत्रित रहता है क्योंकि ब्रह्मविद्या मंदिर मित्र मिलन के लिए किसी को आमंत्रण नहीं भेजता है सभी लोग श्रद्धा और विचार की प्राप्ति के लिए लगातार आता है इस वर्ष भी लोग पहुंचेंगे और 15_17 नवंबर ढाई दिन के मित्र मिलन में सम्मिलित होंगे ) बाबा विनोबा ने ऐच्छिक मृत्यु का वरण किया था l उन्होने अपने मृत्यु के कुछ वर्ष पहले अपने निकट के एक साथी को लिखा था तुम्हें मरने का कोई अधिकार नही है, यह शरीर ईश्वर का दिया हुआ एक उपहार है और आत्मज्ञान प्राप्त करने का एक माध्यम है उसे प्राप्त करने के उपरांत तुम कभी भी मृत्यु का वरण कर सकते हो l

जीवन का मर्म सत्य की साधना मे है l महात्मा गांधी के सच्चे अनुयायी होने के नाते ईश्वर के साक्षात्कार की लगन के साथ उन्होने आध्यात्मिक प्रेरणा ज्ञानेश्वर महाराज और एकनाथ महाराज से पायी थी । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी आचार्य विनोबा भावे को संपूर्ण देश जानता ही है। उनका अधिकतर जीवन पवनार आश्रम में ही बीता।

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