नवरात्रि में करें मां नैना देवी के दर्शन, नेत्र विकारों से मिलेगी मुक्ति

नवरात्रि में करें नैना देवी के दर्शन

नैना देवी मंदिर 64 शक्तिपीठों में से एक है. मान्यता है कि माता सती के दो नयनों में एक नैनीताल और दूसरा नेत्र हिमाचल के बिलासपुर में गिरा था इसलिए नेत्र रोगों को दूर करने को लेकर यहां लोगों की बड़ी आस्था है.

— सुषमाश्री

मां नैना देवी के प्रति यह भक्तों की आस्था ही है कि हर साल नवरात्रि के समय यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की लंबी कतार नजर आती है. देश विदेश के पर्यटक जब भी घूमने नैनीताल आते हैं तो, मां नैना देवी मंदिर के दर्शन करना नहीं भूलते.

मान्यता है कि नैना झील के पास स्थित इस मंदिर के दर्शन से ही आंखों के विकार दूर हो जाते हैं. यह भी कहा जाता है कि मां नैना देवी के मंदिर में जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वो पूरी होती है.

पुरातन कथा

नैना झील के उत्तरी किनारे पर स्थित नैनादेवी का मंदिर भक्त जनों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. 1880 के भूस्खलन से यह मंदिर नष्ट हो गया था, जिसे दोबारा बनवाया गया है. यहां दो नेत्रों की छवि अंकित है, जो नैना देवी को दर्शाती है. प्रचलित मान्यता के अनुसार मां के नयनों से गिरे आंसू ने ही ताल का रूप धारण कर लिया और इसी वजह से इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा.

कहा जाता है कि माता सती के दो नयनों में एक नैनीताल और दूसरा नेत्र हिमाचल के बिलासपुर में गिरा था. इसीलिए यहां लोगों की बड़ी आस्था है. नैना देवी मंदिर 64 शक्तिपीठों में से एक है. स्थानीय लोग नैना देवी को मां नंदा देवी भी कहते हैं. हर साल नंदा अष्टमी में यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है.

नैना देवी मंदिर की तरह नैनी झील भी काफी पवित्र है. मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि जब अत्री, पुलस्त्य और पुलह ऋषि को नैनीताल में कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से पानी लाकर उसमें भरा. इस झील के बारे में कहा जाता है कि यहां स्नान करने से ही कैलाश मानसरोवर का पुण्य मिल जाता है.

मंदिर में नंदा अष्टमी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जो 8 दिनों तक चलता है.

मंदिर के अंदर नैना देवी के साथ गणेश जी और मां काली की भी मूर्तियां हैं. मंदिर के प्रवेशद्वार पर पीपल का एक विशाल वृक्ष है. यहां माता पार्वती को नंदा देवी कहा जाता है. मंदिर में नंदा अष्टमी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जो 8 दिनों तक चलता है. मंदिर परिसर में मां को चढ़ाने के लिए पूजा सामग्री मिल जाती है. ऐसा माना जाता है कि माता के दर्शन मात्र से ही लोगों के नेत्र रोग की पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है.

कैसे जाएं

उत्तरखंड में स्थित यह पर्यटन स्थल सड़क मार्ग के जरिये देश के मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है. अगर आप रेल से नैनीताल जाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कोठगोदाम स्टेशन पर उतरना होगा. यह मंदिर नैनीताल बस स्टैंड से 2 किमी की दूरी पर है.

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