मां दुर्गा और भगवान श्री राम का अनूठा है संबंध

मां दुर्गा और भगवान श्री राम का अनूठा है संबंध

मां दुर्गा और भगवान श्री राम का रिश्ता अनूठा है. शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन दशहरा मनाया जाता है. वहीं, वासंतिक नवरात्रि की नवमी को भगवान राम की जयंती मनाई जाती है.

— राम नारायण सिंह

भगवान श्रीराम जब सीता माता की खोज में समुद्र से मार्ग मांग रहे थे, तब भी समुद्र तट पर प्रभु ने मां शक्ति की आराधना की थी.

महाकवि निराला की राम की शक्ति पूजा में चित्रित और बंगाल के लोक मानस में रची बसी, महिसासुरमर्दिनी दुर्गा रूपी शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि.

शारदीय और वासंतिक नवरात्रि दोनों राम से जुड़े हैं. एक दुष्टों पर विजय दिलाने वाली दुर्गा रूप, दूसरी गौरी आराधना से राम जन्म की कारक. एक नवरात्रि के नवें दिन चैत्र रामनवमी को राम का जन्म होता है, दूसरे नवमी के बाद राम की विजयदशमी.

दुर्गा और गौरी दोनो माँ के दो रूप हैं. वही जन्म देती है और वही जीवन के संकटों पर विजय दिलाती है. वह जीवन का आधार है, वह पूज्य है. बिना उसकी कृपा के जीवन सम्भव ही नहीं है.

वाराणसी में नव दुर्गा और नव गौरी के अलग अलग मुहल्लों में अलग मंदिर हैं. माँ के उपासक अलग अलग नवरात्रों के अलग अलग दिनों में उसके मंदिरों में पूजा के लिए जाते हैं. अलई पुर में शैलपुत्री का मन्दिर है तो दुर्गा कुण्ड का दुर्गा मंदिर कुष्माण्डा का रूप है. शायद ही ऐसा किसी अन्य शहर में हो.

वैसे तो सामान्य जन में दो ही नवरात्रियाँ जानी जाती हैं परंतु इसके अलावा माता के भक्त दो गुप्त नवरात्रों में भी माँ की विशेष आराधना करते हैं. विंध्याचल में गुप्त नवरात्रों में भी काफ़ी मात्रा में भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

पूरे एक पखवारे के पितरों के आराधना के बाद नव दिनों की शक्ति रूपा माँ की आराधना के बाद विजय पर्व की जय हो जय हो. जीवन के सनातनता की जय हो. सनातन धर्म की जय हो.

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