अमेरिकी कांग्रेस के सामने गूगल, एप्पल, फेसबुक और अमेज़न को लेकर गंभीर चर्चा

क्या ये लोगों के बीच फेक न्यूज़ बड़ी मात्रा में पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं

वाशिंगटन. अमेरिकी कांग्रेस के सामने दुनिया की दिग्गज कंपनियों गूगल, एप्पल, फेसबुक और अमेज़न को लेकर गंभीर चर्चा हुई। उनके पक्ष को भी सुना गया। इन कंपनियों पर आरोप है कि ये इतनी विशाल हो गई हैं कि अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं। ये लोगों के बीच फेक न्यूज़ बड़ी मात्रा में पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं।

अमेरिका की इस ऐतिहासिक सुनवाई में अमेज़न के जेफ बेजोस, एप्पल के टिम कुक, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग और गूगल के सुंदर पिचाई सदन की एन्टी ट्रस्ट ज्यूडिशियल उप कमेटी के सामने पेश हुए। यहां उन्हें कई प्रश्नों का सामना करना पड़ा।

उप कमेटी इस बात पर सुनवाई कर रही है कि इन सभी कंपनियों में बीते वर्षों में 1.3 मिलियन दस्तावेज जमा कर लिए हैं और लाखों लोगों के इंटरव्यू इनके डेटा बेस में सुरक्षित हैं। इस उप कमेटी के चेयरमैन डेविड क्लिन का मानना है कि इन सभी कंपनियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने क्लाइंट्स को ओवरचार्ज किया और अपने व्यावसायिक दुश्मनों का दुष्प्रचार कर उन्हें खत्म कर दिया। एक सांसद ने उन पर उंगली उठाते हुए कहा कि हमारे संस्थापक कभी राजाओं के सामने नहीं झुके थे और हम किसी भी ऑनलाइन दुनिया के सरताजों के आगे सर नहीं झुकाएंगे।

इन सभी कंपनियों पर अपने फायदे के लिए अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। उन पर कंज़र्वेटिव पार्टी की आवाज़ को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप है।

गूगल और फेसबुक को लेकर सर्वाधिक शिकायतें थी। ये भी आरोप लगे कि छोटी कंपनियों का कंटेंट गूगल ने चुराकर उसे अपने पेज पर अपलोड कर लिया। उपकमेटी के चैयरमेन ने गूगल पर ‘येल्प’ के रिव्यु को चुराने का आरोप लगाया और यह भी कहा कि जब येल्प ने गूगल की इस बात का विरोध किया तो गूगल ने उसे अपनी सर्च लिस्ट से हटाने की धमकी दे डाली।

गूगल पर स्पष्ट तौर से ये आरोप लगा है कि जैसे ही इस कंपनी को इंटरनेट का गेटवे बनाया गया, इसने अपनी ताकत का बेज़ा इस्तेमाल शुरू कर दिया।

वहीं मार्क जुकरबर्ग द्वारा 2012 में इंस्टाग्राम को खरीदने की डील पर जमकर प्रश्न हुए। केकांग्रेसी सांसद जेरी नाडलर ने कहा कि फेसबुक ने इंस्टाग्राम के सामने ऐसे हालात पैदा किये की वह उसे खरीद सके। जबकि मार्क जुकरबर्ग ने इस बात का खंडन करते हुए कहा कि फेसबुक ने इंस्टाग्राम को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलप करने में मदद की है।

वहीं, फेसबुक और गूगल को रिपब्लिकन पार्टी की भी नाराज़गी झेलनी पड़ी, उन पर उनकी आवाज़ को दबाने का भी आरोप लगा। सांसद जिम सेंसेनब्रेनर ने आरोप लगाते हुए कहा कि फेसबुक कंज़र्वेटिव पार्टी के लोगों को सेंसर कर देती है। उनकी पोस्ट हटा दी जाती है। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर किस कारण से जूनियर डोनाल्ड ट्रम्प को एक वीडियो पोस्ट करने के लिए प्लेटफार्म से ही हटा दिया गया। इस पर ज़ुकरबर्ग ने बताया कि यह ट्विटर ने किया है।

सांसद प्रमिला जयपाल ने अमेज़न पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने थर्ड पार्टी डेटा को अपने निजी हित के लिए उपयोग किया है। बेजोस से यह प्रश्न किया गया कि कोरोना संकट काल में उन्होंने अन्य की अपेक्षा सिर्फ अपने प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दिया।

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति ने अपने स्पष्टीकरण की शुरुआत करते हुए कहा कि उसकी माँ 17 वर्षीय हाईस्कूल स्टूडेंट थीं और उसके पिता क्यूबा से थे। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि अमेज़न ने अब तक यूएस में 270 बिलियन डॉलर का निवेश किया है और लाखों लोगों को रोजगार भी दिया है।

ज़ुकरबर्ग ने भी यही कहा कि हमने जीरो से शुरुआत की थी और अब लोग हमें हमारी सर्विसेज की वजह से पसन्द कर रहे हैं।

जॉर्जिया के सांसद हंक जॉनसन ने एप्पल के चेयरपर्सन टिम कुक से प्रश्न करते हुए कहा कि एप्पल की रणनीति ये रहती है कि कोई भी एप डेवलपर या तो उसके हिसाब से खुद को ढाल ले वरना प्ले स्टोर प्लेटफार्म को ही छोड़ दे।

इस पर टिम कुक ने कहा कि वर्ष 2008 से एप्पल ने किसी भी एप का कमीशन नहीं बढ़ाया है और जहाँ तक प्लेस्टोर की बात है तो वहां 84 प्रतिशत एप से कुछ भी चार्ज नहीं किया जाता है।

इस पर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर कांग्रेस इन तकनीकी दिग्गजों पर नियंत्रण स्थापित करने में विफल गई है तो मै ये खुद करूँगा और ऐसे आदेश जारी भी करूँगा। अभी तक इस बारे में सिर्फ बाते ही हुई हैं और कोई भी कार्रवाई नहीं कि गई। लोग अब इस बातचीत के दौर से थक चुके हैं और उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए।

इन दिनों ट्रम्प फेसबुक और ट्विटर पर काफी हमलावर हैं क्योंकि उनकी कई पोस्ट हटा दी गई हैं। उन्होंने इसे लेकर फेसबुक और ट्विटर पर कंज़र्वेटिव सोच का विरोधी होने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने अमेज़न पर भी खुल कर हमला बोला है। आपको बता दें कि बेजोस वाशिंगटन पोस्ट के भी मालिक हैं और वाशिंगटन पोस्ट में राष्ट्रपति भवन विरोधी खबरों को प्राथमिकता मिलती है।

ट्रम्प की हां में हां मिलाते हुए इन पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटी मलेरिया ड्रग से संबंधित कंटेंट हटाने का आरोप लगा है, जिसे कोरोना के इलाज में सहायक माना जा रहा है।

राष्ट्रपति के कट्टर समर्थक जिम जॉर्डन ने कहा कि ये बड़े तकनीकी दिग्गज, कंज़र्वेटिव पार्टी के लोगों से खास वैमनस्यता रखते हैं।

आपको बता दें कि इस सम्बंध में अमेरिकी कांग्रेस एंटी ट्रस्ट लॉ के पुनर्गठन पर विचार कर रही है लेकिन अभी कोई नया कानून आने में समय लग सकता है।

(साभार: द गार्जियन)

(इसका अनुवाद सुधांशु सक्सेना द्वारा किया गया है)

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