कोरोना महामारी : ये सवाल ज़रूरी हैं, पर अभी कोशिश करें कि ज़िंदा रहें

स्वायत्तशासी समाज और जन नियंत्रित विकेंद्रित प्रशासन से ही सही नीतियॉं बनेंगी

कोरोनावायरस की वर्तमान त्रासदी पर बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी ने इतिहासकारों के लिए कुछ सवाल रख छोड़े हैं.पर बेहतर होगा कि फ़िलहाल आप अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें

रामदत्त त्रिपाठी,दुत्तपूर्व संवाददाता  बीबीसी
राम दत्त त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार

चारों तरफ़ हताशा और निराशा है. लोग सड़कों पर मर रहे हैं , अस्पतालों में जगह नहीं है , मोर्चरी, श्मसान और क़ब्रिस्तान में लंबी लाइनें हैं . 

वक़्त कितना भी बुरा क्यों न हो गुजर ही जाता है . लेकिन इतिहास में अपनी छाप छोड़कर . 

बनारस के नये देवता इतिहास लिखने वालों से कहेंगे कि इसमें अनोखा क्या है ? पुराने वाले देवता भी तो मसान में ही होली खेल लेते थे. अब उन्हें इस खेल से वंचित क्यों किया जाये . 

पिछले सवा साल के कालखंड में जहॉं कई मुल्क नागरिकों को कोरोना वायरस से बचाने और उन्हें स्वस्थ रखने के के लिए ज़रूरी उपाय कर रहे थे . हमारी सरकारें हवाई अड्डे , हाइवे , मंदिर बनाने और विश्व विजय के लिए अश्वमेध यज्ञ रचाने में गर्व महसूस कर रही थीं . 

कोरोना वायरस ने दोबारा हमला करने से पहले हमें सुधरने के लिए सवा साल का समय दिया , मगर क्या हम सुधरे या सुधरने की कोशिश की ? इसकी जॉंच पड़ताल के लिए भारतीय समाज और नीति निर्माताओं से पूछने के लिए मेरे कुछ सवाल हैं .

1 एक साल में हमने सामुदायिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए क्या किया ? 

2 एक साल में हमने पब्लिक हेल्थ सिस्टम को कितना मज़बूत किया ?

3 हमने एक साल में माताओं , बच्चों और बुजुर्गों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए क्या किया ? 

4 हमने पिछले इस अवधि में भारत के नागरिकों के लिए किन कंपनियों को कितने टीके का ख़रीद आर्डर दिया और कितने टीके दुनिया को दान किये ? 

5 एक साल में सामने कोरोना से बचाव के लिए शारीरिक दूरी बढ़ाने और सामाजिक दूरी घटाने के लिए क्या किया ?

6 एक साल में हमने प्रशासन का नेटवर्क – मैन पॉवर मोहल्ला गॉंव तक कितना मज़बूत किया . कितने ख़ाली पद भरे .

7 एक साल में हमने गॉंव मोहल्ले स्तर पर रोज़गार के अवसर बढ़ाने के लिए नीतियों में क्या बदलाव किये ? 

8 एक साल में हमारी हेल्थ , रोज़गार और शिक्षा पॉलिसी बनाने में विशेषज्ञों और स्टेक होल्डर्स की भागीदारी कितनी बढ़ायी ?

9 एक साल में हमने सार्वजनिक जीवन से पाखंड घटाने के लिए क्या किया ?

10 एक साल में हमने बिज़नेस और प्रशासन में मुनाफ़ाख़ोरी और भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्या किया . पर्यावरण ख़राब होने में यही मुख्य कारण है ? 

11 एक साल में हमें जीवन के ज़रूरी तत्वों क्षिति जल पावक गगन समीरा- का प्रदूषण और बर्बादी रोकने के लिए क्या किया ? हमारी इम्युनिटी घटने और महामारी फैलने का यह मूल कारण है .

12 एक साल में हमने आम लोगों की सुरक्षा , अपराधियों को दंड और सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय व्यवस्था मज़बूत करने के लिए हमने क्या किया ? 

ज़ाहिर है प्रशासनिक केंद्रीकरण यह नहीं होने देगा . स्वायत्तशासी समाज और जन नियंत्रित विकेंद्रित प्रशासन से  ही सही नीतियॉं बनेंगी और क्रियान्वयन होगा . 

फ़िलहाल मेरे सवालों और सरकारों  के कामकाज के तरीक़ों की चिंता न करें . उसका वक़्त भी आएगा.

ढपोरशंख चाहे जितना ज़ोर से बोलें अब रातों रात न अस्पताल बढ़ेंगे , न डाक्टर और न टीका .अपेक्षा से निराशा होती है इसलिए बेहतर है हम सरकार से कोरोना वायरस के उपचार में ज़्यादा उम्मीद न पालें . 

जीव रक्षा ज़रूरी

अगर कोरोना के लक्षण दिखें तो तुरंत घर पर ही अपने को आइसोलेट करके दवाइयाँ लेना शुरू कर दें और डाक्टरों द्वारा बतायी गयी गाइडलाइन का पालन करें . जाँच , डाक्टर और अस्पताल का इंतज़ार न करें. वायरस की पंद्रह दिनों की मियाद है . अगर वास्तव में सॉंस में कठिनाई या निमोनिया के लक्षण हों तो डाक्टर या अस्पताल का सहयोग ज़रूर लें . 

वह दूसरा युग था और वे ज़िंदा क़ौमें थीं इसलिए पॉंच साल का इंतज़ार नहीं करना चाहती थीं . सरकार कोई दिहाड़ी मज़दूर नहीं है कि हम रोज़ रोज़ उसका मूल्यांकन करें . हम पॉंच साल के लिए हाथ कटाकर उन्हें अपनी छाती पर मूँग दलने का अधिकार दे चुके हैं .

सरकार के पास अस्पताल में जगह भले न हो पर उसकी जेलों में बहुत जगह है . 

इसलिए जब वक़्त आयेगा ज़िन्दा लोग  अपने नुमाइंदों से हिसाब जरूर लेंगे , वैसे ही जैसे आपातकाल के बाद 1977 में लिया था . 

सेल्फ़ हेल्प का जमाना है . अभी कोशिश करिये कि ज़िंदा रहें. 

हॉं,  यह भी याद रखिये धर्म नहीं आपका कर्म ही आपके स्वास्थ्य की रक्षा करेगा . 

नोट : ये लेखक के निजी विचार हैं.

One Comment

  1. आपने जगाने की कोशिश तो बहुत की है पर जिन्हें नहीं जागना है वो वैसे ही रहेंगे

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