— राम दत्त त्रिपाठी | ramdutttripathi.in

तमिलनाडु में थालापति विजय Tamilnadu CM Thalapati Vijay की पार्टी तमिल वेत्री कझगम TVK की शानदार जीत के बाद एक असाधारण पत्र सामने आया है। महात्मा गांधी के प्रपौत्र, पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ बुद्धिजीवी श्री गोपाल कृष्ण गांधी ने मुख्यमंत्री-निर्वाचित सी. जोसेफ विजय को एक खुला पत्र लिखा है। यह पत्र बधाई का है — लेकिन इसमें बधाई से कहीं अधिक है: एक अनुभवी लोकतंत्र-प्रेमी की गहरी चिंताएं और उम्मीदें।
यह पत्र भले ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को लिखा गया है, लेकिन यह देश के प्रधानमंत्री समेत देश के सभी मुख्यमंत्रियों और उच्च पदों पर बैठे लोगों पर लागू होता है.

गोपाल कृष्ण गांधी स्वीकार करते हैं कि वे उन लगभग 35 प्रतिशत मतदाताओं में नहीं थे जिन्होंने विजय को वोट दिया। लेकिन परिणाम आने पर उन्हें एक विचार ने चौंका दिया — यह नेता नया है, अनुभवहीन है, इसीलिए ताज़ा भी है। और इसीलिए उन्हें लगा कि विजय को कुछ ज़रूरी सच बताने का यह सही वक्त है।
सात सूत्र — हर मुख्यमंत्री के लिए
1 संविधान और धर्मनिर्पेक्षता सर्वोपरि
गोपाल गांधी का पहला और सबसे कड़ा संदेश यह है — चुनाव जीतना एक बात है, असली परीक्षा विधानसभा में होती है। भारत की संघीय और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की रक्षा राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संविधान के आधार-ढांचे से कोई समझौता नहीं — यह कुर्सी बचाने की कोशिश से बड़ा दायित्व है।
2 सफलता पर घमंड नहीं, गंभीरता ज़रूरी
विजय को हर अर्थ में ‘विजय’ की तरह सदन में प्रवेश करना चाहिए — लेकिन विजयोत्सव का अहंकार नहीं लाना चाहिए। सत्ता में आने के बाद अध्ययन, गंभीरता और जिम्मेदारी का कोई विकल्प नहीं। अच्छे कपड़े और तेज़-तर्रार छवि से राज नहीं चलता — परिश्रम और विनम्रता से चलता है।
3 स्टालिन प्रतिद्वंद्वी नहीं, पूर्ववर्ती हैं
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पेरियार की आत्म-सम्मान आंदोलन की विरासत के वाहक हैं। गोपाल गांधी कहते हैं — नडाल के सामने फेडरर की जो स्थिति है, वैसी ही विजय के सामने स्टालिन की। दोनों के बीच कड़ा मुकाबला नहीं, बल्कि दो कौशलों का संतुलन होना चाहिए। विजय को उन्हें शत्रु नहीं, अग्रज मानना चाहिए।
4 विचारधारा पूछें तो कहें — अंतरात्मा की आवाज़
अगर कोई पूछे कि आपकी विचारधारा क्या है — तो घबराएं नहीं। गांधी की सलाह है: कहिए कि मेरी विचारधारा मेरी ‘मनसाची’ — मेरी अंतरात्मा और नैतिक चेतना — है। यह कोई कमज़ोरी नहीं है, यह ईमानदारी है।
5 अधिकारी अधीनस्थ नहीं, सहयोगी हैं
सरकारी अधिकारियों को ‘हां-हुज़ूर’ कहने वाला नहीं, ईमानदार सलाह देने वाला सहयोगी बनाइए। जैसे सरदार पटेल ने गृहमंत्री के रूप में किया — अफसरों को बिना डर के सच बोलने का माहौल दिया। चापलूसी की संस्कृति सरकार को अंदर से खोखला करती है।
6 नफरत और भय से मुक्त तमिलनाडु
गांधी चाहते हैं कि तमिलनाडु सिर्फ आर्थिक प्रगति का नहीं, बल्कि न्याय, सद्भाव और भयमुक्त जीवन का भी उदाहरण बने। एक ऐसा राज्य जहां कोई किसी से डरे नहीं, जहां नफरत की राजनीति के लिए जगह न हो।
7 पहले ईसाई मुख्यमंत्री — धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक
गोपाल गांधी एक ऐतिहासिक तथ्य रेखांकित करते हैं — पहली बार तमिलनाडु का नेतृत्व एक ईसाई करने जा रहा है। वे कहते हैं इसे ईश्वर की देन और तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष परंपरा के प्रमाण के रूप में देखें। वल्लुवर की विरासत यही कहती है — किसी को भी इस गौरव को कम मत आंकने दीजिए।
सफलता से बड़ी है सार्थकता
गोपाल कृष्ण गांधी अपना पत्र इन शब्दों से समाप्त करते हैं — ‘मैं आपको सफलता से अधिक संतोष और सार्थकता की शुभकामनाएं देता हूं।’ यह वाक्य बहुत कुछ कहता है। सफलता आंकड़ों में होती है, सार्थकता इतिहास में।
थालापति विजय फिल्मों के परदे से सीधे तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में आए हैं। उनके पास जनसमर्थन है, ऊर्जा है, ताज़गी है। लेकिन राजनीति का परदा अलग होता है — यहां हर संवाद का असर करोड़ों जीवन पर पड़ता है। गोपाल कृष्ण गांधी का यह पत्र उन्हें — और देश के हर नए नेता को — यही याद दिलाता है।
Please also read
embed
—
रामदत्त त्रिपाठी वरिष्ठ पत्रकार हैं।BBC 21 वर्षों तक कार्यरत रहे।
वेबसाइट: ramdutttripathi.in | mediaswaraj.com


