2021: गणतंत्र दिवस का अभिनन्दन…

यह भारत -दैट इज इंडिया

गणतंत्र दिवस का अभिनन्दन

गणतंत्र दिवस का पर्व महान

हे संविधान हे संविधान

कोटि कोटि है नमन नमन

जन मन करता अभिनन्दन वंदन

तुझसे ही वरदान मिला

लोकतंत्र का शासन अनुशासन

पराधीनता की कारा के वे दिन

हम भूल नहीं पाते हैं

जब पीड़ित मानवता

अनगिन घावों से विद्ध कराहती

कर्मफलों के भोगों को मान

सहर्ष भोगती जीवन जीती

हे संविधान हे संविधान

युग युग के मानव की पीड़ा

हरने को तुम चट्टानों से निःसृतः हुए

मन्दाकिनी समान

राजा राज्य की समस्त शक्तियां

जन जन के कल्याण भाव में

लोकनीति में निहित कराने को

पर हाय मानव का हतभाग्य कोप

लोकतंत्र का लोक हो गया लोप

हे संविधान हे संविधान

तेरे पावन सतरों की आड़ लिए

जनसेवक के सजे मुखौटे में

अब भी सम्राट महाराजाधिराज

सुल्तान बादशाह ही

छद्मरूप में अपने तंत्र सहित

स्थापित हैं

हे संविधान हे लोकतंत्र

हम आशान्वित हैं

तुम मानव को मानबता का

अधिकार दिलाओगे

उसकी पहिचान बनाओगे

हम सतत मंत्रजाप करते रहते हैं

जनगण मंगलदायक जय हे

मानव भाग्य विधाता

जय हे जय हे संविधान

जय लोकतंत्र विधाता

हे नववर्ष जन्मो तुम !(Opens in a new browser tab)

यह भारत -दैट इज इंडिया

भारत -दैट इज इंडिया
भारत -दैट इज इंडिया

यह भारत -दैट इज इंडिया

जो बसता था कभी गांवों में

अब ये गांव बसेंगे

इण्डिया के पांवों में

गांव के गंवई गंवार

अब तेल फुलेल की बारीकियां

समझने लगे हैं

अब वे गुलाब के गंध के

अच्छे गाहक भी हैं

उनके गंवार बुद्धि का सत्य

संचार क्रांति के अर्द्ध सत्य

के साथ ऑनलाइन होकर

पोस्ट मॉडर्निटी के साथ

ताल मेल भी बैठा रहा है

अकेलापन

ALT="अकेलापन"
अकेलापन

यह अकेलापन

कभी वरदान लगता है

कभी श्राप लगता है

अंतर्जगत में

मचा रहता है कोलाहल

बाह्य के परिप्रेक्ष्य में

सुनसान रहता है

मन के बोझ सारे

डुबो कर चित्त में

मुक्ति के भटकाव में

बंधनो में जकड़े रहना ही

जीवन का अवदान लगता है

चिंतन विलास से ही

भय मुक्ति का निदान लगता है

अब तो अकेलेपन से ही

आदमी का खोया हुआ

पहिचान मिलता है

Chandravijay Chaturvedi
Dr Chandravijay Chaturvedi

डा चंद्र विजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज

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