ब्रह्मविद्या मंदिर के आधार स्वावलंबन, परस्परावलंबन, आत्मावलंबन : सुश्री ज्योत्स्ना बहन

विनोबा विचार प्रवाह , हरदोई।आचार्य विनोबा भावे द्वारा स्थापित ब्रह्मविद्या मंदिर ( पवनार) स्वावलंबन, परस्परावलंबन, आत्मावलंबन के आधार पर टिका हुआ है।जब हमारे मन से भय निकल जाता है, तब हम अध्यात्म के क्षेत्र में प्रवेश कर पाते हैं। हमारे जीवन का प्रत्येक काम चित्त शुद्धि के लिए होना चाहिए। सामूहिक साधना के लिए अंहकार से मुक्त होना जरूरी है। समाज की बागडोर महिलाओं को हाथ में हो। इस उद्देश्य से विनोबाजी ने ब्रह्मविद्या मंदिर स्थापित किया। 

ज्योत्सना दीदी
ज्योत्सना दीदी

उक्त विचार ब्रह्मविद्या मंदिर की सुश्री ज्योत्स्ना बहन ने विनोबाजी की 126वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विनोबा विचार संगीति में व्यक्त किए। सुश्री ज्योत्स्ना बहन ने विनोबाजी द्वारा स्थापित ब्रह्मविद्या मंदिर के बारे में विस्तार से बताया। 

उन्होंने कहा कि विनोबाजी ने ब्रह्मचारी बहनों के लिए इस ब्रह्मविद्या मंदिर आश्रम की स्थापना की। यहां पर कोई संचालक नहीं है। यहां रहने वाली बहनें सर्वसम्मति से सामूहिक साधना में संलग्न हैं। उन्होंने बताया कि विनोबाजी ने पूरे परिसर को प्रज्ञापथ, कारुण्य पथ, त्याग पथ, ज्ञान पथ, त्याग पथ जैसे नाम दिए हैं। उन्होंने बताया कि विनोबा समाधि के समीप किसी प्रकार का कोई चित्र अथवा मूर्ति नहीं रखी गई है। 

विनोबा समाधि पर गीताई और रामहरि लिखा हुआ है। पूरे ब्रह्मविद्या मंदिर परिसर में विनोबाजी को खुदाई के समय जो मूर्तियां मिलीं, उनकी स्थापना की गई है। इसमें भरत, राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्ति बहुत खास है। सुश्री ज्योत्स्ना बहन ने बताया कि जब विनोबाजी धुलिया जेल में गीता प्रवचन कर रहे थे, तब उन्होंने जैसा वर्णन किया था, उन्हें पवनार में खुदाई के दौरान वैसी ही मूर्ति मिली। 

उन्होंने बताया कि ब्रह्मविद्या मंदिर परिसर में समाधिस्थ वृक्ष हैं। आश्रम में आज भी ऋषि पद्धति से खेती की जाती है। यहां का रसोईघर पूरा स्वावलंबी है। ब्रह्मविद्या मंदिर में कर्म, ज्ञान और भक्ति का अद्भुत समन्वय है। 

अहिंसाकीतलाश :

विनोबा विचार प्रवाह के दूसरे व्याख्यान में ब्रह्मविद्या मंदिर की सुश्री ज्योति बहन ने कहा कि आज दुनिया शांति चाहती है। अहिंसा को अपनाए बिना शांति स्थापित नहीं हो सकती। विनोबाजी ने जीवनभर अहिंसा के अनेक प्रयोग किए। उन्होंने कहा कि जब गांधीजी ने विनोबाजी को प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही घोषित किया, तब वह सौम्य सत्याग्रह का प्रयोग था। व्यक्ति के हृदय पर विचारों का प्रभाव होता है। आजादी के बाद विनोबाजी ने विचार के आधार से भूदान आंदोलन चलाया और उन्हें लाखों एकड़ जमीन प्राप्त हुई। इसके पहले विनोबाजी कम्युनिस्टों से मिलने के लिए जेल में गए और उन्हें अपना विचार समझाया। इसमें से ग्रामदान, संपत्ति दान आदि विचारों का विकास हुआ। सामाजिक जीवन में अहिंसा की स्थापना के लिए विनोबाजी का जीवन समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि वैचारिक स्वतंत्रता के बिना अहिंसा नहीं आ सकती। प्रारंभ में श्री संजय राय ने सुश्री ज्योत्स्ना बहन और सुश्री ज्योति बहन का परिचय दिया। संचालन श्री रमेश भैया ने किया। आभार डॉ.पुष्पेंद्र दुबे ने माना। 

डॉ.पुष्पेंद्र दुबे , इंदौर 

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