Yogi Adityanath Nomination: गोरखनाथ मंदिर से दर्शन पूजन कर नामांकन को निकले योगी आदित्यनाथ

मीडिया स्वराज डेस्क

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) आज सवेरे गोरखपुर मंदिर में दर्शन पूजन के बाद गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से नामांकन पत्र दाखिल करने के लिये ​पूरे गाजे बाजे के साथ निकले. बता दें कि गोरखपुर शहर विधानसभा सीट बीजेपी के साथ साथ सीएम योगी का भी गढ़ रही है. योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन चुके हैं. ये पहली बार होगा जब वे विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमायेंगे.

इस मौके को खास बनाने के लिये उनके कार्यकर्ता जश्‍न मनाने में जुट गए हैं. कुछ ढोल की धुन पर नाच रहे हैं तो कुछ गा रहे हैं. उनका कहना कि उनके भगवान आज नामांकन करने आ रहे हैं. पूरे शहर में हर तरफ उत्‍साह का माहौल है. इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद हैं.

यूपी की राजनीति में गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी का कहते हैं, योगी जी जब पाँच साल पहले मुख्यमंत्री बने थे, तब वे सांसद थे और उन्हें पार्टी हाईकमान ने ऊपर से मनोनीत किया था. इस दौरान योगी जी हिंदुत्व के ब्रांड अंबेसडर बन गए हैं और अगर उनके नेतृत्व में भाजपा उत्तर प्रदेश में दोबारा वापस आती है, निश्चय ही उनका क़द बढ़ेगा और शायद दिल्ली के लिए उनकी दावेदारी भी मज़बूत होगी.

उनके कार्यकर्ता जश्‍न मनाने में जुट गए हैं. कुछ ढोल की धुन पर नाच रहे हैं तो कुछ गा रहे हैं. उनका कहना कि उनके भगवान आज नामांकन करने आ रहे हैं. पूरे शहर में हर तरफ उत्‍साह का माहौल है. इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद हैं.

बता दें कि उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर फिलहाल कुछ भी कह पाना असंभव लग रहा है. इस बार प्रदेश में किसकी सरकार आयेगी, ये कह पाना सभी के लिये मुश्किल हो चुका है, हालांकि कुछ ज्योतिषियों ने योगी आदित्यनाथ की कुंडली देखकर कहा है कि 2022 में एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ के सिर पर ताज सज सकता है.

यहां एक लाइन बहुत फेमस है कि गोरखपुर में रहना है तो योगी, योगी कहना है. ऐसा इसलिए है कि यहां का रेकॉर्ड रहा है क‍ि जिस पर भी योगी का हाथ रहता है, वो विजयी होता आ रहा है. ऐसे में इस बार खुद योगी के चुनाव मैदान में उतरने पर माहौल ही अलग है.

गोरखपुर शहर सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर हैं. सबसे अधिक कायस्थ वोटरों की संख्या गोरखपुर सदर सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर हैं। यहां कायस्थ 95 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, मुस्लिम 50 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, वैश्य 45 हजार, निषाद 25 हजार, यादव 25 हजार, दलित 20 हजार हैं. इसके अलावा पंजाबी, सिंधी, बंगाली और सैनी कुल मिलाकर करीब 30 हजार वोटर हैं, लेकिन सभी जातियों के वोटर चुनाव में जाति को देखकर नहीं, बल्कि गोरखनाथ मंदिर यानी योगी आदित्यनाथ के नाम पर वोट देते हैं.

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गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र पर छठे चरण में तीन मार्च को मतदान होना है. चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि योगी अयोध्‍या या मथुरा से चुनाव लड़ सकते हैं. योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ प्रभावशाली गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं. गोरखपुर और योगी आदित्यनाथ का रिश्ता ऐसा है कि दोनों को एक-दूसरे का पर्यायवाची तक कहा जाता है.

योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से चुनाव में उतरने को लेकर भी सफाई दी गई. कहा गया कि अयोध्या या मथुरा से लड़ने में कोई नुकसान नहीं था, जिस हिसाब से उनका कद है, वह जीत भी जाते…मगर गोरखपुर से उनका रिश्ता कहीं न कहीं कमजोर पड़ जाता. उन्हें अपने गोरखपुर के साथ अपनी विधानसभा पर भी ध्यान देना पड़ता और दोनों में संतुलन बना पाना मुश्किल होता. ऐसे में गोरखपुर शहर सीट सबसे मुफीद विकल्प थी.

गोरखपुर शहरी, गोरखपुर जिले की सीट है. जिले की कुल 9 विधानसभा सीटों में से एक गोरखपुर शहरी विधानसभा सीट पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. अतीत पर गौर करें तो इस सीट पर हुए पिछले तीन चुनाव से बीजेपी का ही कब्जा रहा है. फिलहाल इस सीट से बीजेपी के डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल विधायक हैं. साल 2012 में उन्होंने सपा प्रत्याशी राजकुमारी देवी को हराया था. इसके पहले 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के भानु प्रकाश मिश्रा को मात दी थी.

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज मुझे गोरखपुर से नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सानिध्य मिल रहा है. पीएम मोदी और अमित शाह ने देश से 370 हटाने का कार्य किया. यूपी में पांच वर्षों के दौरान डबल इंजन की सरकार ने सभी की अपेक्षाओं पर उतरने का प्रयास किया है. अमित शाह का पूर्वांचल के कार्यकर्ताओं को सानिध्य मिल रहा है. आज प्रदेश में कोई राजनीतिक दल बीजेपी के कार्य की बुराई नहीं कर सकता है.

इस मौके पर अमित शाह ने जनता को गोरखपुर नाम का असली मतलब बताया. उन्होंने कहा, जी से गंगा एक्सप्रेसवे, ओ से ओरगेनिक कृषि, आर से रोड, ए से एम्स, के से खाद का कारखाना, पीयू से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आर से रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर.

शाह ने कहा कि पूर्वांचल और पश्चिम यूपी माफियाओं के नाम से जाना जाता था. लेकिन योगी ने उनसे मुक्त कराने का काम किया. अब माफिया तीन जगह ही मिलते हैं. जेल, प्रदेश से बाहर या सपा की सूची में. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पुलिस माफियाओं से डरती थी, आज माफिया पुलिस स्टेशन में जाकर सरेंडर करता है. सीएम योगी ने प्रदेश में कानून का राज स्थापित किया है. मोदी जी भी वाराणसी से सांसद बनकर गए हैं. जब तक यूपी का विकास नहीं होता है, देश का विकास असंभव है. नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के बाद विभिन्न योजनाओं का लाभ हर तबके तक पहुंचाया.

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