यूपी में आवारा पशुओं का आतंक : कहीं इमरजेंसी में नसबंदी जैसा असर न हो जाए चुनाव पर

एक बुजुर्ग के गीत में सुनिए दर्द

उत्तर प्रदेश में गाय और सांड जैसे आवारा पशुओं का आतंक और बर्बादी किस तरह किसानों को रूलाने लगा है, यह बताने की जरूरत नहीं। आशंका है कि कहीं उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इसका असर वैसा ही न हो जैसा इमरजेंसी के दौरान जबरन नसबंदी का हुआ था । माना जाता है कि 1977 में उत्तर भारत में कांग्रेस के सफ़ाये में नसबंदी एक बड़ा कारण था।

बीते कुछ समय में इस पर मीडिया में काफी कुछ लिखा और दिखाया जा चुका है। यही नहीं, यूपी सरकार और यूपी प्रशासन भी इस जानकारी से अछूता नहीं है। यह और बात है कि वे इसकी सच्चाई से लगातार इंकार कर रहे हैं, लेकिन इन आवारा पशुओं की वजह से प्रदेश में आम लोगों की जो हालत हो गई है, वह उनसे भी छिपी नहीं है। तभी तो 10 जनवरी तक ज्यादा से ज्यादा आवारा पशुओं को पकड़कर सेल्टर हाउस पहुंचाने के लिये प्रदेश के नये मुख्य सचिव ने एक योजना शुरू की है ।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर ध्यान दें तो हम पायेंगे कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की गाय को लेकर बनाई गई नीतियों ने बीते कुछ वर्षों में आम जनता की परेशानियां बहुत ज़्यादा बढ़ा दी हैं। प्रदेश में न तो जनता सुरक्षित है और न ही उनकी फसलें। आवारा पशुओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग पूरी पूरी रात बारी बारी से फसलों को सुरक्षित रखने के लिये झुंड में इलाके की रखवाली करते रहने को मजबूर हैं। लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन सुकून, सब लुट गया है। इन आवारा पशुओं को खाने और बर्बाद करने के लिये फसलें नहीं मिल पातीं तो गुस्से में ये मासूमों और बुजुर्गों की जान ही ले लेते हैं। ऐसे कितने ही लोगों पर अलग अलग मीडिया संस्थानों ने कवरेज भी की हैं, लेकिन सरकार ने तो मानो अपनी आंखें और कान, सब बंद कर रखे हैं। वह चाहकर भी लोगों का यह दर्द और तकलीफ सुनना नहीं चाहती।

ये आवारा जानवर सड़कों पर दुर्घटनाओं और मौत का कारण भी बन रहे हैं।

गाय और सांड के कारण जिस दर्द से लोग गुजर रहे हैं, उसी दर्द को गीत के रूप में बयां कर रहे हैं ये बुजुर्ग, आप भी सुनिये…

https://www.facebook.com/story.php?story_fbid=544257510118393&id=100036024458168&sfnsn=wiwspwa

ये बुजुर्ग गा रहे हैं कि गायें सारी फसल उजाड़ दी . साँड़ परेशान कर रहे हैं. रात रात भर जागकर खेत की रखवाली करते हैं. फिर भी कुछ नहीं बचता. क़र्ज़ लेकर अनाज ख़रीद बच्चों का पेट पालते हैं.साहूकार क़र्ज़ वसूली करने आता है…

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