क्या भाई-बहन मिलकर अमेठी की पुश्तैनी विरासत पर कर पाएंगे वापस कब्जा?

शनिवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और अमेठी के पूर्व सांसद राहुल गांधी अपनी बहन व पार्टी की महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ एक दिवसीय दौरे पर अमेठी आ रहे हैं। यहां वह भाजपा सरकार को हटाने के लिए ‘महंगाई हटाओ कांग्रेस प्रतिज्ञा’ पदयात्रा में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि राहुल और प्रियंका का यह अमेठी दौरा जिले के कांग्रेसियों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में चुनाव अब महज कुछ ही महीने दूर हैं लेकिन एक तरफ जहां बीजेपी की केंद्र सरकार और योगी सरकार पूरी तरह से यूपी में चुनावी माहौल बनाने में जुटे हुए हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी पूरे दमखम के साथ मैदान में डटी हुई हैं। हालांकि 2019 में हुए लोकसभा के चुनाव में अमेठी सीट कांग्रेस के हाथ से फिसल गई थी, लेकिन उसके बाद कांग्रेस यहां दोबारा खड़े होने की जद्दोजहद में जुटी हुई है।

मीडिया स्वराज डेस्क

राहुल और प्रियंका गांधी की अमेठी में प्रतिज्ञा पदयात्रा

अब कांग्रेस यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में अपना स्थान बनाने के लिए संघर्ष कर रही है, ऐसे में राहुल गांधी ने अपनी और अपने परिवार की कर्मभूमि अमेठी में शनिवार को प्रतिज्ञा पदयात्रा में शामिल होने की स्वीकृति देकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने की कोशिश की है।

शनिवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और अमेठी के पूर्व सांसद राहुल गांधी अपनी बहन व पार्टी की महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ एक दिवसीय दौरे पर अमेठी आ रहे हैं। यहां वह भाजपा सरकार को हटाने के लिए ‘महंगाई हटाओ कांग्रेस प्रतिज्ञा’ पदयात्रा में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि राहुल और प्रियंका का यह अमेठी दौरा जिले के कांग्रेसियों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। राहुल के कार्यक्रम को सफल व भव्य बनाने के लिए जिला कांग्रेस कमेटी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

माना जा रहा है कि राहुल और प्रियंका का यह अमेठी दौरा जिले के कांग्रेसियों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। राहुल के कार्यक्रम को सफल व भव्य बनाने के लिए जिला कांग्रेस कमेटी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

अमेठी और कांग्रेस का रिश्ता

यूपी में व‍िधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने लगी है। पर अमेठी के कांग्रेस‍ियों की गर्मजोशी अभी नहीं बढ़ी है। हालांक‍ि, इस बार प्र‍ियंका के सक्र‍िय होने से उनकी उम्‍मीदें बढ़ी हैं। लेक‍िन, स्‍थानीय स्‍तर पर नेतृत्‍व की कमी के चलते न केवल कार्यकर्ता, बल्‍क‍ि नेता भी घर बैठे हैं।

रायबरेली सांसद सोनिया गांधी के प्रतिनिधि केएल शर्मा बयानों से उत्‍साह बढ़ाने की कोश‍िश जरूर करते हैं। उनका कहना है क‍ि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी और रायबरेली की सभी दस सीटों पर कब्जा करेगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर थी। लेकिन रायबरेली में कांग्रेस के दो विधायक चुने गए थे। अब तो कांग्रेस के अच्छे दिन आने वाले हैं। लेक‍िन, अमेठी ब्‍लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बृजेंद्र शुक्ल का दर्द कुछ अलग ही कहानी बयां करता है। उनका कहना है कि राहुल गांधी की हार के बाद से अमेठी में अब कोई बड़ा कांग्रेसी चेहरा या ज‍िम्‍मेदार नेता नहीं है। अमेठी में गांधी परिवार के समर्थकों की आज भी कमी नहीं है। लेकिन कार्यकर्ताओं को संभालने वाले नहीं हैं। न‍िराश कांग्रेसी घर बैठे हैं।

उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव, 2017 में अमेठी में कांग्रेस को बेहद कम वोट मि‍ले थे। पार्टी उम्‍मीदवार अमीता स‍िंह चौथे नंबर पर पहुंच गई थीं। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की हार ने तो कांग्रेस‍ियों की सारी उम्‍मीदें खत्‍म कर दीं।

अमेठी को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। यहां गांधी परिवार को सिर्फ दो बार ही पराजय का सामना करना पड़ा था। पहली बार अमेठी को कर्मभूमि बनाने के लिए आए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे पुत्र संजय गांधी को पहले चुनाव में सफलता नहीं मिली थी।

2017 अमेठी व‍िधानसभा चुनाव में व‍िभ‍िन्‍न उम्‍मीदवारों को मि‍ले वोटों की संख्‍या

उत्‍तर प्रदेश में हुए सभी व‍िधानसभा चुनावों की बात करें तो 1951 से 2017 के दौरान कुल 17 चुनाव हुए। इनमें से आठ बार अमेठी में कांग्रेस (1980 में इंद‍िरा कांग्रेस के संजय स‍िंह सह‍ित) के व‍िधायक बने। लेक‍िन, इस दौरान व‍िधायकों के नाम देखने से यह संकेत भी म‍िलता है क‍ि लोगों ने पार्टी के बजाय चेहरे को प्रमुखता दी है।

अमेठी सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी और उस दौरान हुये लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी संसद पहुंचे थे। इस सीट का संसदीय ​इतिहास बताता है कि अब तक यहां से ज्यादातर समय कांग्रेस ही जीतती रही है। बहुत कम मौके आये, जबक कांग्रेस के हाथ से यह सीट फिसली हो।

आपातकाल के बाद 1977 में जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह इस सीट से जीते थे जबकि 1980 में जब दोबारा चुनाव हुये तो संजय गांधी जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे। 1998 में यह सीट फिर बीजेपी की झोली में चली गई और संजय सिंह चुनाव जीते। इस तरह इक्का दुक्का मौका छोड़ दिया जाय तो इस सीट पर अमूमन कांग्रेस और गांधी परिवार का ही कब्जा रहा है।

संजय गांधी, फिर राजीव गांधी के बाद दो बार कांग्रेस के ही सतीश शर्मा इस सीट से जीते। 1999 में हुये चुनाव में सोनिया गांधी मैदान में उतरीं और संसद पहुंचीं। इसके बाद 2004 से राहुल गांधी अमेठी से लगातार संसद पहुंचते रहे लेकिन पिछली ​बार फिर कांग्रेस चूक गई और 1998 के बाद अमेठी सीट बीजेपी के खाते में चली गई और स्मृति ईरानी जीत हासिल करने में कामयाब रहीं।

बहरहाल, राहुल गांधी अपनी इस यात्रा से यही संदेश देना चाहते हैं कि उनका रिश्ता नाता अमेठी से बना रहेगा। न कांग्रेस पार्टी और न ही राहुल ही, अमेठी को कभी छोड़ना चाहेंगे। अमेठी लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है और यहां से मिली हार केवल राहुल गांधी के लिये ही नहीं, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी के लिये ही बड़ा झटका है। इसे राहुल गांधी से बेहतर कौन समझ सकता है?

अमेठी के अब तक के सभी व‍िधायकों की सूची

अब बात करते हैं लोकसभा चुनावों की। 1967 से 2019 के बीच अमेठी में लोकसभा के 16 चुनाव हुए। इनमें केवल तीन बार ही ऐसा हुआ क‍ि गैर कांग्रेसी नेता चुनाव जीता। 2019 में भी राहुल गांधी को चार लाख से ज्‍यादा लोगों ने वोट द‍िया था। स्‍मृत‍ि ईरानी ने उन्‍हें करीब 55 हजार वोटों से हराया था।

राजीव गांधी यहां से सबसे ज्‍यादा समय तक सांसद रहे। 30 साल पहले 21 मई 1991 को उनकी हत्या हो गई थी। तब भी राजीव गांधी अमेठी के सांसद थे। अब स्मृति ईरानी हैं। राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार कर वापस लौट चुके हैं। लेकिन राजीव गांधी को चाहने वालों की तादाद आज भी यहां काफी है। 1981 की विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी को पायलट की नौकरी छोड़वा कर राजनीत‍ि में लाया गया था। तभी वह अमेठी के सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1991 तक अमेठी के सांसद थे।

अमेठी को वापस लेने की तैयारी

वहीं आम चुनाव 2019 में तीन बार से अमेठी के सांसद रहे राहुल गांधी को भी स्मृति ईरानी के हाथों पराजय झेलनी पड़ी, लेकिन अमेठी में पहले की तरह अब भी गांधी परिवार के प्रति अपनत्व व प्रेम की भावना बनी हुई है। वहीं, राहुल गांधी ने भी अमेठी को अपने परिवार की तरह मानते हुए कोरोना काल में राशन, मास्क, सैनेटाइजर के साथ ही दवाएं व ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर उपलब्ध कराकर इन परिवारिक रिश्तों को मजबूती प्रदान करने की कोशिश की थी।

अमेठी से कभी सांसद रहे राहुल गांधी लगभग दो साल बाद अमेठी पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या अमेठी में राहुल दोबारा अपना विश्वास बना पाएंगे और जनता उनपर विश्वास करेगी।

अमेठी से कभी सांसद रहे राहुल गांधी लगभग दो साल बाद अमेठी पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या अमेठी में राहुल दोबारा अपना विश्वास बना पाएंगे और जनता उनपर विश्वास करेगी।

अमेठी से यूपी चुनाव के प्रचार का आगाज करेंगे राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पूर्व लोकसभा सीट अमेठी से यूपी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। अभी तारीख तय नहीं हुई है लेकिन कहा जा रहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अमेठी और रायबरेली में सक्रिय होंगे।

वैसे भी, कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद अपने ही मैदान में कांग्रेस कमजोर हो गई है। उसके पास दोनों लोकसभा सीटों पर कोई विधानसभा सदस्य नहीं है क्योंकि रायबरेली में कांग्रेस के टिकट पर चुने गए दोनों विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं।

2019 में अमेठी में राहुल गांधी को हराने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी रायबरेली में पार्टी का आधार बढ़ाने का काम कर रही हैं।

अमेठी-रायबरेली की दस विधानसभा में 6 सीटें बीजेपी के पास

पार्टी विधानसभा चुनावों में सीटों को बरकरार रखने और अगले चुनावों में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए अच्छे प्रदर्शन के बारे में सोच रही है। 2019 में अमेठी में राहुल गांधी को हराने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी रायबरेली में पार्टी का आधार बढ़ाने का काम कर रही हैं। दो लोकसभा क्षेत्रों- अमेठी और रायबरेली की कुल दस विधानसभा सीटों में से छह पहले से ही भाजपा के पास हैं।

अदिति और राकेश सिंह के जाने से मुश्किल में कांग्रेस

रायबरेली से कांग्रेस के दो विधायक अदिति सिंह और राकेश सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं और रायबरेली से कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भी। अदिति सिंह ने पिछले साल कांग्रेस के खिलाफ बगावत की थी, जब उन्होंने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया था और यूपी विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र में भाग लिया था। तब से, वह कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना कर रही हैं और भाजपा की प्रशंसा कर रही हैं। पिछले कई महीनों से उनके भाजपा में शामिल होने की उम्मीद थी।

रायबरेली में, ईरानी ने जुलाई में जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति के अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी की जगह ले ली है।

पुराने नेताओं के छोड़ने से कांग्रेस का मनोबल गिरा

इन दोनों जिलों की जिला पंचायतों पर भी बीजेपी का कब्जा है। रायबरेली में, ईरानी ने जुलाई में जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति के अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी की जगह ले ली है। सोनिया गांधी की अपने निर्वाचन क्षेत्र से लंबे समय तक अनुपस्थिति, मुख्य रूप से उनके स्वास्थ्य के मुद्दों के कारण, से वहां के कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। दो मौजूदा विधायकों सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं के चले जाने से उस क्षेत्र में पार्टी को नुकसान पहुंचा है, जो कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था।

मुलायम परिवार की बहू अपर्णा भी बढाएंगी परेशानी

रायबरेली और अमेठी की देखरेख करने वाली प्रियंका गांधी भी राज्य स्तर के मुद्दों में व्यस्त रहने के कारण दोनों निर्वाचन क्षेत्रों को ज्यादा समय नहीं दे पाई हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एक अच्छी मशीनरी तैनात की है। रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। बीजेपी के साथ साथ अब समाजवादी पार्टी ने भी अमेठी में कांग्रेस की घेराबंदी शुरू कर दी है। पिछले दिनों पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने तिलोई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यदि नेताजी और अखिलेश भैया चाहेंगे तो वह अमेठी से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। वहीं, शुक्रवार को खुद अखिलेश यादव ने अपनी विजय रथ यात्रा के 7वें चरण का आगाज रायबरेली से किया है। इसे भी कांग्रेस पार्टी के लिये एक बड़ी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता जुटे

राहुल व प्रियंका गांधी को 18 दिसंबर को जगदीशपुर से हारीमऊ तक की लगभग छह किमी तक ‘भाजपा भगाओ, महंगाई हटाओ प्रतिज्ञा पदयात्रा’ में शामिल होना है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंघल के निर्देश पर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों से दस हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के पदयात्रा में शामिल होने की बात कही जा रही है। गुरुवार को अमेठी में कांग्रेस प्रवक्ता डा. अरविंद चतुर्वेदी व डा. नरेंद्र मिश्र के नेतृत्व में यात्रा का प्रचार प्रसार किया गया। इसके साथ ही बैनर व पोस्टर के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को पदयात्रा में शामिल होने की अपील भी की गई। अब देखना यह है कि इस पदयात्रा का कितना लाभ कांग्रेस अपनी पुश्तैनी सीटों, अमेठी और रायबरेली को फिर से हथियाने के लिये उठा पाती है।

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