सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण करने बलरामपुर पहुंचे PM मोदी ने अखिलेश पर कसा तंज, कहा- इसका फीता भी बचपन में उन्होंने ही काटा होगा

पीएम मोदी ने कहा कि देश की नदियों के जल का सदुपयोग हो, किसानों के खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचे, ये सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का पूरा होना इस बात का सबूत है कि जब सोच ईमानदार होती है, तो काम भी दमदार होता है. उन्होंने कहा कि सरयू नहर परियोजना में जितना काम 5 दशक में हो पाया था, उससे ज्यादा काम हमने 5 साल से पहले करके दिखाया है. यही डबल इंजन की सरकार है. यही डबल इंजन की सरकार के काम की रफ्तार है.

बलरामपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने तंज कसते हुये कहा, ‘सुबह से इंतजार कर रहा था कि कोई आएगा और कहेगा कि ये हमारी परियोजना है, हमने इसका फीता काटा था. कुछ लोगों की आदत हो गई है, ऐसा कहने की. हो सकता है बचपन में इस परियोजना का फीता भी उन्होंने ही काटा हो. इन लोगों की प्राथमिकता सिर्फ फीता काटना है, जबकि हम लोगों की प्राथमिकता काम को वक्त पर पूरा करना है. उन्होंने कहा, ‘सरयू नहर का काम जो 40 साल से अटका था, हमने 5 साल से पहले पूरा करके दिखाया.’

मीडिया स्वराज डेस्क

बलरामपुर: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में जीत हासिल करने की मंशा से लोकार्पण और शिलान्यास का सिलसिला लगातार जारी है. इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यूपी के बलरामपुर में सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण किया. हालांकि, इस दौरान वे समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तंज कसना नहीं भूले. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में अखिलेश यादव का नाम लिए बिना कहा कि इन लोगों की फितरत सिर्फ फीता काटना है. हो सकता है कि इस (सरयू नहर) परियोजना का फीता भी उन्होंने ही काटा होगा.

पीएम मोदी ने इस मौके पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जब मैं दिल्ली से आ रहा था तो सोच रहा था कि अभी कोई कहेगा कि इसका फीता तो उसने ही काट दिया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हो सकता है कि उन्होंने बचपन में ही इस परियोजना का फीता काट दिया हो… तो मैं उनसे कहना चाहूंगा कि उनका काम फीता काटना है और हमारा परियोजनाओं को पूरा करना है. यह डबल इंजन की सरकार का कमाल है. पांच दशक से ज्यादा काम पांच साल में हो गया है. सरयू नहर परियोजना का सपना आखिरकार 43 साल बाद साकार हो रहा है. करीब 808 किमी लंबी इस नहर योजना से गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती समेत नौ जिलों के किसानों को लाभ होगा. इससे लाखों किसानों को फायदा होगा.

बलरामपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने तंज कसते हुये कहा, ‘सुबह से इंतजार कर रहा था कि कोई आएगा और कहेगा कि ये हमारी परियोजना है, हमने इसका फीता काटा था. कुछ लोगों की आदत हो गई है, ऐसा कहने की. हो सकता है बचपन में इस परियोजना का फीता भी उन्होंने ही काटा हो. इन लोगों की प्राथमिकता सिर्फ फीता काटना है, जबकि हम लोगों की प्राथमिकता काम को वक्त पर पूरा करना है. उन्होंने कहा, ‘सरयू नहर का काम जो 40 साल से अटका था, हमने 5 साल से पहले पूरा करके दिखाया.’

पीएम मोदी ने कहा कि देश की नदियों के जल का सदुपयोग हो, किसानों के खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचे, ये सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का पूरा होना इस बात का सबूत है कि जब सोच ईमानदार होती है, तो काम भी दमदार होता है. उन्होंने कहा कि सरयू नहर परियोजना में जितना काम 5 दशक में हो पाया था, उससे ज्यादा काम हमने 5 साल से पहले करके दिखाया है. यही डबल इंजन की सरकार है. यही डबल इंजन की सरकार के काम की रफ्तार है.

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, ‘जिस चीज से मुझे सबसे ज्यादा पीड़ा होती है, वह देश के धन, समय और संसाधन का दुरुपयोग… सरकारी पैसे हैं तो मेरा क्या… ये तो सरकारी है. ये सोच देश के विकास में सबसे बड़ी रुकावट है. इसी सोच ने इस परियोजना को लटकाया भी भटकाया भी. जिन्होंने जनता के पैसों का दुरुपयोग किया वो जनता के गुनहगार और सज़ा के पात्र हैं…’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘यह पानी देश के किसान तक 20-30 साल पहले पहुंचा होता तो देश का खजाना भरता. खुद किसानों का विकास होता. बच्चों की शिक्षा अच्छी होती. सरयू नहर परियोजना के अटके रहने से किसानों का अरबों खरबों का नुकसान हुआ है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘यह पानी देश के किसान तक 20-30 साल पहले पहुंचा होता तो देश का खजाना भरता. खुद किसानों का विकास होता. बच्चों की शिक्षा अच्छी होती. सरयू नहर परियोजना के अटके रहने से किसानों का अरबों खरबों का नुकसान हुआ है.

बता दें कि 1978 में परियोजना की नींव पड़ी थी. तब इसे लेफ्ट बैंक घाघरा कैनाल नाम दिया गया था. गोण्डा और बहराइच जिलों के लिए इसे तैयार किया जाना था, लेकिन 1982 में इसमें सात और जिले जोड़ दिए गए. तब से लेकर 2017 तक इसके काम में सुस्ती ही रही. जमीन अधिग्रहण, पैसे की कमी, दूसरे विभागों की एनओसी जैसे उलझनों में मामला लटका रहा लेकिन, योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद परियोजना ने रफ्तार पकड़ी. सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि सीएम हर महीने इसकी समीक्षा करते रहे हैं. इसकी वजह से रास्ते में आने वाली रुकावटें दूर हुईं. पैसे समय पर मिलता गया और परियोजना कम्प्लीट हो गई. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस परियोजना पर 1978 से 2017 तक 5189 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 2017 से लेकर अब तक 4613 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं.

सरयू नहर परियोजना के लोकार्पण के मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उप्र के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद थे.

सरयू नहर परियोजना के लोकार्पण के मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उप्र के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद थे.

बता दें कि सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के निर्माण की कुल लागत 9800 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें से 4600 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान पिछले चार वर्षों में किया गया. इस परियोजना में पांच नदियों– घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी को आपस में जोड़ने का भी प्रावधान किया गया है. इस परियोजना से 14 लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 6200 से अधिक गांवों के लगभग 29 लाख किसानों को लाभ पहुंचेगा. पूर्वी उत्तरप्रदेश के नौ जिलों– बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोण्डा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर और महाराजगंज को इसका लाभ मिलेगा.

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