उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में ‘हिन्दू तुष्टिकरण’ का मुद्दा

पांच साल के कार्यकाल में BJP ने राज्य में विकास के नाम पर कुछ किया ही नहीं है इसलिए आखिरी सहारा और अंतिम दांव मुस्लिम तुष्टिकरण के झूठ पर लगा दिया है।

इस्लाम हुसैन, काठगोदाम

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस पर कथित मुस्लिम ‘तुष्टिकरण’ का आरोप लगाकर हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रही है। क्योंकि उसके पांच साल के कार्यकाल में राज्य में विकास के नाम पर कुछ किया ही नहीं है इसलिए आखिरी सहारा और अंतिम दांव मुस्लिम तुष्टिकरण के झूठ पर लगा दिया है।

जबकि प्रदेश में पांच साल के अपने कार्यकाल भाजपा ने केवल और केवल हिन्दू तुष्टिकरण करके हिन्दुओं का धुर्वीकरण किया है। साथ ही केन्द्र सरकार ने अपने सात साल आठ महीने के कार्यकाल में जो हिन्दू धुर्वीकरण के कार्य किए हैं, उनको भी आगे बढ़ाने का काम कार्य किया है। चाहे वह राम मंदिर का मामला हो या फिर संस्कृति के नाम पर धर्म के प्रचार का मामला हो।

इस भाजपा सरकार ने सबसे पहले चारधाम बोर्ड बनाकर हिन्दुओं का धुर्वीकरण करना चाहा, लेकिन जब इससे अधिकांश हिन्दू नाराज़ हो गए, और यह दांव उल्टा पड़ गया तो हिन्दू तुष्टिकरण के लिए चारधाम बोर्ड को भंग भी कर दिया।

पहले हिन्दू तुष्टिकरण के लिए कुंभ को महाकुंभ, अद्वितीय कुंभ और ग्रीन कुंभ का नाम दिया गया, फिर उसके लिए भारी सरकारी धन लगाकर सनातन और हिन्दू धर्म का जमकर प्रचार करके हिन्दुओं का धुर्वीकरण किया गया।

हिन्दू तुष्टिकरण का काम गांव गांव में मंदिरों के रख रखाव मरम्मत, सुरक्षा पहुंच मार्ग के काम सरकारी और सांसद विधायक निधि के बजट से हो रहे हैं, इस निर्माण कार्यों के शिलान्यास/उद्घाटन और उसके शिलापट से हिन्दुओं का तुष्टिकरण और धुर्वीकरण दोनों किया जा रहा है।

इसी तरह देवभूमि, चारधाम यात्रा, योग और संस्कृत के नाम पर तुष्टिकरण करके प्रदेश को और अधिक हिन्दू बनाने दिखाने और सिद्ध करने की लगातार कोशिश भाजपा सरकार करती आ रही है।

भाजपा सरकार ने देवभूमि की देवभाषा संस्कृत के नाम पर एक प्रस्ताव पास कराकर उत्तराखंड के रेलवे स्टेशनों के बोर्ड से उर्दू नाम हटवाकर संस्कृत में करवा दिए। इससे संस्कृत भाषा कितना विकास हुआ होगा, यह तो शोध का विषय है। लेकिन उर्दू जैसी ‘म्लेच्छ’ हटवाकर सनातनियों के अहम की संतुष्टि या तुष्टिकरण ज़रूर कर दिया। इसी तरह सरकारी कार्यक्रमों का आरंभ या उद्घाटन हिन्दुओं की पूजा-अर्चना करके हिन्दू तुष्टिकरण नहीं है तो क्या है ?

भाजपा ने आरम्भ से ही पार्टी स्तर पर अपने अनुषांगिक संगठनों के माध्यम से धुर्वीकरण और तुष्टिकरण का खेल खेला है। गाय के नाम पर और किसी अपराधिक घटना को साम्प्रदायिक रूप देना, भाजपा और उसके अनुषांगिक संगठनों का पसंदीदा काम है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई अनेक घटनाएं इसकी गवाह हैं। चाहे वह मामला अगस्त्यमुनि की घटना का हो या फिर रामनगर गर्जिया मंदिर का मामला हो। जातिगत स्तर पर भी हुई घटनाओं में भी अपर कास्ट हिन्दू तुष्टिकरण करना भी पार्टी की नीति रही है।

भाजपा के अनुषांगिक संगठन और इनके सदस्य सोशल मीडिया में ऐसी पोस्ट करते रहे हैं जिससे प्रदेश में मुसलमानों को खतरे के रूप में दिखाया जाता है। इन सांप्रदायिक संदेशों में अक्सर मुस्लिम समुदाय को हिन्दुओं और हिंदुस्तान के दुश्मन की तरह दर्शाया जाता है और भारतीय जनता पार्टी या नरेंद्र मोदी को हिन्दुओं के मसीहा के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है।

यह भी दिलचस्प है कि बीते कुछ समय से जैसे-जैसे मौजूदा केंद्र सरकार मंहगाई, बेरोज़गारी, कालेधन, बैंक घोटालों, भ्रष्टाचार और कोविड कुप्रबंधन जैसे कई मोर्चों पर घिरती गई, वैसे-वैसे यह संदेश ज्यादा तेजी से फैलाए गए।और फील्ड में भी वैसे वैसे अभियान चलाए गए। इन साम्प्रदायिक घटनाओं में शामिल और साम्प्रदायिक संदेशों को फ़ैलाने वाले तत्वों/अनुषांगिक संगठनों का सीधा सम्बन्ध भाजपा से रहा है। इसीलिए सरकार ने ‘हिन्दू तुष्टिकरण’ में इन संगठनों पर लगाम न लगाकर उनको प्रश्रय ही दिया है।

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हरिद्वार की अधर्म संसद का मामला तो खुलेआम ‘हिन्दू तुष्टिकरण’ का है, इस अधर्म संसद में जो कुकर्म हुआ उसके बाद भाजपा की प्रदेश सरकार, कार्यक्रम में सम्मिलित हिन्दू धर्म के रक्षकों को हिन्दू तुष्टिकरण के लिए बचाती हुई नज़र आई। राष्ट्रीय बदनामी और दबाव के बाद जो पहला मुकदमा दर्ज हुआ उसमें हिन्दू रक्षकों को बचाकर केवल एक भूतपूर्व मुसलमान वसीम रिजवी को अभियुक्त बनाया गया था बाद के मुकदमे में आतंकी यति सहित पांच को अभियुक्त बनाया था।

लोगों को यह पता नहीं है कि इस काण्ड से पहले भी उत्तराखंड में एक कथित हिन्दू रक्षक स्वामी को हिन्दू हित अथवा हिन्दू तुष्टिकरण में भाजपा सरकार ने खुली छूट दी हुई थी। जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ लम्बे समय से घृणा अभियान चलाए हुए है, और जिसके खिलाफ एक रिपोर्ट भी दर्ज हुई है, लेकिन हिन्दू तुष्टिकरण में भाजपा सरकार ने उस पर कभी कार्यवाही नहीं की।

इस तरह देखा जाए कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार अन्य भाजपा राज्य सरकारों की तरह हिन्दू तुष्टिकरण का कार्य करके हिन्दू मतों का ध्रुवीकरण करती रही है। आज जब चुनाव के समय जनता को बताने और दिखाने के लिए कुछ नहीं है तो वह विरोधियों पर तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है।

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