जुमे की नमाज पढ़ने के लिए खुले हैं गुरुग्राम के इस गुरुद्वारे के द्वार…

हर धर्म को एक ही मानने वाले गुरु नानक को मानने वाले सिख भाइयों ने मुस्लिम भाइयों के जुमे की नमाज और इबादत के लिए गुरुद्वारे के द्वार खुले हैं, कहकर उनका स्वागत किया है.

गुरुद्वारे का द्वार हर धर्म को मानने वालों के इबादत के लिए खुला है… कहना है शेरसिंह सिद्धू का, जो गुरुग्राम में इन दिनों खुले में नमाज को लेकर बिगड़ते माहौल से दुखी होकर मुस्लिम भाइयों को अपने गुरुद्वारे में आकर शुक्रवार की नमाज अता करने का निमंत्रण दे रहे हैं. इस पहल को एनडीटीवी के रिपोर्टर सौरभ शुक्ला ने अपने खबरों में जगह दी. आइए, पढ़ते हैं, इस रिपोर्ट में क्या क्या खास था…

मीडिया स्वराज डेस्क

हम इस वक्त गुड़गांव के सदर बाजार गुरुद्वारे में खड़े हैं और आप सोच रहे होंगे कि हम गुरुद्वारे में क्यों खड़े हैं और वो भी गुड़गांव में. आपने देखा होगा कि पिछले कुछ हफ्तों से जुमे की नमाज, जो जमात में यानि साथ में पढ़ी जाती है, खुले में होती है, उसको लेकर के विवाद चल रहा है. जहां नमाज पढ़ी जा रही थी कई सालों से, वहां गोबर के उपले रख दिये गये. विश्व हिंदू परिषद के लोग और दूसरे हिंदू परिषदों के लोग वहां पर आकर के पूजा अर्चना करने लग गये, कई जगह आकर के धार्मिक नारे लगाये गये और मुसलमानों को नमाज नहीं पढ़ने दी गई जबकि प्रशासन ने उसकी इजाजत दी हुई थी. प्रशासन की इजाजत के बाद वहां नमाज पढ़ी जा रही थी. प्रशासन फेल हो गया. चुपचाप शांति से पुलिसवाले खड़े होकर देखते रह गये और कुछ हिंदू संगठन माहौल खराब करते रहे. लेकिन जब ये सबकुछ देखा तो कुछ लोगों से रहा नहीं गया. ऐसे ही कुछ लोग गुड़गांव में आगे आये हैं और वे मुसलमान भाईयों को कह रहे हैं कि आप जुमे की नमाज हमारे यहां आकर के पढ़िये. कुछ हिंदुओं ने अपने घर खोल दिये हैं तो शेरदिल सिद्धू जैसे लोग हैं जो मुसलमान भाईयों से कह रहे हैं कि आप गुरुद्वारे में आकर के नमाज पढ़िये. गुरुद्वारे खुले हुये हैं. हम बात करते हैं शेरदिल सिद्धू साहब से और हमारे साथ यहां के मुफ्ती साहब भी हैं, उनसे भी बात करेंगे.

शेरसिंह सिद्धू गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा सब्जी मंडी, गुरुग्राम

सिद्धू साहब, आपको क्यों लगा अंदर से कि जब ये नमाज पढ़ने नहीं दी जा रही तो गुरुद्वारा खोल दिया जाय? क्या भावनायें हैं आपकी?

इसमें भावनाओं की कोई बात नहीं है. हमें तो देश का माहौल बचाकर रखना है, भाईचारा बचाकर रखना है. एक समुदाय को, जैसे ये मुस्लिम भाई हैं, अगर आप इन्हें कहीं भी जगह नहीं देंगे नमाज पढ़ने की तो किसी न किसी को तो आगे आना होगा, अगर देश को बचाना है तो. और इसमें कोई हर्ज भी नहीं है. गुरु घर, जितने भी हैं, चाहे वे मंदिर हों, मस्जिद हों या फिर गुरुद्वारा हों, हर एक धर्म जाति के लिए होते हैं. गुरु घर में कोई मुसलमान भाई नमाज पढ़ने के लिए आता है तो उनका स्वागत है. हम मना तो नहीं करेंगे. हिंदू भाई भी आते हैं. पाठ पूजा के लिए आते हैं. इबादत के लिए आते हैं. कोई भी आता है, उन सभी का स्वागत है. ये जगह बनी ही इबादत के लिए है.

कई जगहों पर, जैसे मंदिरों में लोग कह देते हैं कि यहां गैर हिंदुओं का आना मना है, पानी तक पीने से मना कर देते हैं. आपने देखा कि गाजियाबाद में कई जगह ऐसा किया गया, इस पर कोई मुकदमे दर्ज नहीं हुये और इस बाबत तो बोर्ड भी लगे हुये हैं वहां बाकायदा. तो आपको वो सब दिक्कत नहीं है?

हम तो गुरु नानक देव जी के दिखाये रास्ते पर चलते हैं. उनका कहना है…

अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे,
एक नूर ते सब जग उपजाया कौन भले को मंदे,

अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे…

हमारे बाबा नानक जी के साथ एक मुसलमान भाई 45 सालों तक साथ रहे थे. मर्दाना जी नाम था उनका. हमें तो अपने गुरुओं के रास्ते पर ही चलना है. हममें से कोई भी क्यों न हो, किसी भी धर्म के मानने वाले क्यों न हों, हम सभी के खून का रंग तो लाल ही है न! वो कैसे बदल सकते हैं? आज सब इन्हें इतनी नफरत भरी निगाह से देख रहे हैं कि ये नमाज भी नहीं पढ़ सकते. क्या इन लोगों ने कुर्बानियां नहीं दीं, देश की आजादी के वास्ते? इनके पूर्वजों ने अपने सिर कटवाये, सब कुछ करवाया, जान तक दे दी. उसके बाद भी ये गद्दार हैं, ये नमाज नहीं पढ़ सकते. देखिये, हमें तो देश बचाना है. कब तक एक समुदाय को दबाकर रखेंगे? इनका भी तो ईमान है, इन्हें भी तो नमाज पढ़नी है.

तो आपके जितने भी गुरुद्वारे हैं, आप सभी खोल देंगे इनके नमाज के लिए?

नहीं नहीं, गुरुद्वारे तो कभी बंद ही नहीं हुये. यह एक प्रोपेगेंडा चल रहा है कि सारे गुरुद्वारे खोल देंगे. गुरु घर के दरवाजे तो कभी बंद ही नहीं होते. हर धर्म, जाति और समुदाय का यहां हमेशा स्वागत है. यहां समय समय पर लंगर भी लगाये जाते हैं. इन लंगरों में मुसलमान भाई भी आते हैं, हिंदू भाई भी आते हैं. हम उनका आधार कार्ड नहीं देखते कि अपना परिचय दो तब हम लंगर देंगे. यह गुरु का दरबार है, कोई भी भक्त आकर यहां अपनी बंदगी कर सकता है.

तो ये हैं शेरसिंह सिद्धू साहब जैसे लोग हैं, जिनका कहना है कि हम सब एक ही नूर से उपजे हैं, जैसा कि गुरु नानक साहब ने फरमाया है.

मुफ्ती मोहम्मद सलीम काजमी, अध्यक्ष, जमीयत उलेमा, गुरुग्राम

आप सब देख रहे हैं कि कई जगह पर नमाज नहीं पढने के लिए दी जा रही है और प्रशासन भी शांत हो जाता है. कई लोग आगे बढ़कर भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं. क्या कहना है इस पर…

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कहीं आपका माइण्ड हैक तो नहीं हो गया

गुड़गांव के अंदर तो भाईचार शुरू से रहा है. अभी चंद सालों से चंद लोग हैं, जो इस तरह का विवाद करते हैं और माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं. चाहे वो सेक्टर 44 हो, 43 हो, 47 का जुमा हो, कहीं भी लोग पहुंचे हैं तो अक्सर लोगों ने साथ दिया है और ये कहा है कि ये लोग पुराने समय से यहां नमाज पढ़ते आ रहे हैं. आज से 20 साल पहले जो खुले में नमाज होती थी, वो दो चार जगह पर ही होती थी. मुसलमान बढ़ता गया बल्कि मैं ये कहुंगा कि शहर के अंदर इंसान बढ़ता गया, इस शहर की तरक्की के लिए, जिसमें मुसलमान भी हैं, सिख भी हैं, हिंदू भी हैं. बाहर से आये, आकर के यहां फैक्ट्रियां लगाईं, कंपनियां लगाईं, मकान खरीदे. इस शहर की तरक्की का यही राज है कि हर जगह के लोग यहां मौजूद हैं, तो उसी में मुसलमान भी हैं और मुसलमान की एक जो जरूरत है, वो ये है कि हफ्ते की एक नमाज, जिसे जुमे की नमाज भी कहते हैं, वो एक साथ ही पढ़ी जाती है, बाकी पांच वक्त की नमाज, जो रोजाना पढते हैं, वो घरों में, आफिसों में, दुकान में पढ़ लेते हैं. तो वो हमारी मजबूरी है, हमारा कोई शौक नहीं है. तो इसलिए खुले में नमाज आसानी से हो रही थी. लेकिन कुछ लोगों ने सियासत खेलने के लिए इस तरह से किया, मैं वही देखता हूं, लेकिन हमने भी माहौल को बचाने के लिए ताकि माहौल खराब न हो, सारे इमामों से ये कह रखा था कि कहीं भी कोई भी विवाद करने के लिए आयें या माहौल खराब करने के लिए आयें तो आपको पीछे हट जाना है. सेक्टर 47 में भी हमने वही किया.

खुले में नमाज पढ़ने को लेकर सिखों ने गुरुद्वारे और हिंदुओं ने खोले अपने घरों के दरवाजे

सिद्धू साहब और अक्षय राव जी जैसे लोगों के लिए क्या कहेंगे?

इनके लिये तो बस अल्फाज नहीं है, इन्होंने जो बड़प्पन दिखाया है, दिल बड़ा किया है, मैं कहता हूं कि ऐसा ही होना चाहिए. सेक्टर 12 में जब अक्षय राव जी से हमारी बात हुई तो उन्होंने यही कहा कि आप हमारे घर में नमाज पढ़ो. क्या दिक्कत है आपको अगर चौक में नमाज पढ़ने से मना कर रहे हैं. मैं ने कहा कि नहीं, घर में दिक्कत होगी. तो कहने लगे कि हॉस्पिटल मेरा है, उसकी छत पर पढ़ लीजिये. मैं ने कहा कि उसमें भी थोड़ा सा डिस्टर्ब हो सकते हैं लोग. उन्होंने पर्सनली अपनी एक दुकान की चाबी दे दी और कहा कि ये आपके नमाज के लिये है. इसके बराबर में सर्विस स्टेशन है, उसमें भी आप नमाज पढ़ सकते हैं, वो भी मेरा है. तो ये एक बड़प्पन है, जैसा कि हमारे शेरदिल सिद्धू साहब ने एक इतना बड़ा जुमला जो इस्तेमाल किया कि गुरुद्वारे का जो द्वार है, वो सबके लिये खुला है. और कोई भी आकर के, अगर उसे इबादत करने में दिक्कत है तो यहां पर आकर के इबादत कर सकते हैं. ऐसा ही होना चाहिए. जब इंसान के अखलाक और उसकी सोच ऐसी होगी तो कोई मसला नहीं होगा.

तो अब आप देखेंगे कि इस शुक्रवार से इस गुरुद्वारे में, जहां पर गुरबाणी होती है, लंगर चखा जाता है, वहां पर जुमे की नमाज होगी. अक्षय और सिद्धू जैसे तमाम लोग अपनी जमीन, अपनी दुकान, खेत दे रहे हैं कि अगर बाहर प्रशासन या कुछ हिंदू संगठन के लोग आपको नमाज नहीं पढ़ने दे रहे हैं तो आप हमारे घर आइए, हमारी दुकानों पर आइए, हमारे खेत में नमाज पढ़िये, गुरुद्वारे में नमाज पढ़िये. तो ये कहीं न कहीं एक जबरदस्त संकेत, जबरदस्त सीख है, प्रशासन और शासन के लिए, सरकार के लिए कि जब सरकार लोगों को, जो लोग माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं, उन पर काबू करने में नाकाम रहती है तो शेरदिल सिद्धू और अक्षय जैस लोग सामने आते हैं, हिंदू मुस्लिम सिख सामने आते हैं और कहते हैं कि देखिये, ये चंद लोग हैं, जो माहौल खराब करना चाहते हैं, हिंदू मुसलमान के बीच दूरियां बढ़ाना चाहते हैं, हम आपके साथ हैं. आप हमारी दुकान पर आइए, हमारे घर आइए, हमारे गुरुद्वारे आइए और जमात में जुमे की नमाज पढ़िये और अमन की दुआ मांगिये.

(सहयोगी सतीश कुमार राम के साथ गुडगांव में सौरभ शुक्ला, एनडीटीवी इंडिया के लिए.)

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