गांधीवादी संगठन समूह की मांग: पारादीप से जिंदल परियोजना को वापस जाए

गांधीवादी संगठन समूह की मांगः राज्य सरकार को केवल लाभ और व्यवसाय के लिए ओडिशा की खदानों और पर्यावरण को देशी और विदेशी कंपनियों के हाथों में नहीं छोड़ना चाहिए.

गांधीवादी संगठन समूह की मांग: पारादीप के पास ढिंकिया, नुआगांव और गडकुजंग पंचायतों में जिंदल परियोजना का गांधीवादी संगठनों ने कड़ा विरोध किया है. वैश्विक पर्यावरण संकट के मद्देनजर जिंदल कंपनी के प्रदूषणकारी तापज विद्युत केंद्र, सीमेंट कारखाना और इस्पात उद्योग वापस लेने को लेकर उत्कल गांधी स्मारक निधि, गांधी शांति प्रतिष्ठान, राष्ट्रीय युवा संगठन और सर्व सेवा संघ ने संयुक्त बयान जारी किया है.

गांधीवादी नेत्री कृष्णा मोहंती के नेतृत्व में पोस्को विरोधी आंदोलन के नेता डॉ. विश्वजीत, राष्ट्रीय युवा संगठन के राज्य संजोजक सूर्य नारायण नाथ, आद्यश्लोक मिश्र, मानस पटनायक, सागर दास प्रमुख स्थानीय क्षेत्र मे दौरा करते हुए कहा भारत में इस्पात, बिजली और सीमेंट उद्योग सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा स्थापित किया गए हैं.

राज्य सरकार को केवल लाभ और व्यवसाय के लिए ओडिशा की खदानों, पानी और पर्यावरण को देशी और विदेशी कंपनियों के हाथों में नहीं छोड़ना चाहिए. परियोजना में प्रभावित होने बाली माहाल, ढिंकिआ, गोबिंदपुर आदि गाँव का दौरा करके प्रतिनिधि मंडल ने कहा, स्थानीय खेत्र में कंपानी के लिये जमीन अधिग्रहण करने के लिये पुलिस प्रशासन की साधारण जनता के खिलाफ अत्याचार  की कड़ी निंदा की.

धान, पान, मछली, काजू और अन्य कृषि उत्पादों में समृद्ध यह क्षेत्र, जब 2005 में  राज्य और केंद्र दोनों सरकारों ने देश के आर्थिक हितों के लिए आंखें मूंद लीं और जनविरोधी पोस्को परियोजना की अनुमति दी जो 12 शाल की बड़े संघर्ष के बाद वापस लिया गया था. जबकि सस्ती दर में यहां का मछली, पान तथा काजू आदि कृषि उत्पाद  दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा  है, सरकार ने स्थानीय क्षेत्र में कोआपरेटिव रास्ते विभिन्न कृषि आधारित उद्योग स्थापित करें ताकि स्थानीय लोग विस्थापित न हों और राज्य में लाखों लोगों को रोजगार मिले. इस प्रेस विज्ञप्ति में  राज्य और केंद्र दोनों सरकारों ने लोगों का भलाई न सोचते हुए जिंदल जैसी निजी कंपनियों के लिये काम करने की कड़ी निंदा की है और आने वाले दिनों में गांधीवादी संगठन सम्मुह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपना आंदोलन तेज करेंगे.

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