सड़क पर भजन गाने को मजबूर करोड़पति कारोबारी

कच्चे माल की कीमतों में उछाल और महंगाई से नाराज हैं करोड़पति उद्योगपति

बढ़ती महंगाई और कच्चे माल की कीमतों में उछाल से देश के कारोबारियों में सरकार के प्रति रोष और नाराजगी साफ देखी जा सकती है। पिछले कई दिनों से लुधियाना की सड़कों पर करोड़पति उद्योगपतियों और कारोबारियों को भजन गाते हुए देखा गया। कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला…

मीडिया स्वराज डेस्क

स्टील के कच्चे माल की कीमतों में उछाल और चौतरफा महंगाई से नाराज कारोबारियों ने मंगलवार को यहां लुधियाना की सड़कों पर लगातार आठवें दिन भी अपना रोष धरना जारी रखा। गांधीवादी रास्ते पर चलते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ अलग अंदाज में नाराजगी जताते हुए आज मुंह पर पटि्टयां और मास्क बांधकर मौन व्रत रखा।

कारोबारियों ने बयान जारी कर अपना दर्द बयां करते हुए गुहार लगाई कि लगातार मन की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कम से कम एक बार हम कारोबारियों की पुकार भी सुन लें। साथ ही अपनी मुख्य मांग दोहराई कि अगर सरकार रेगुलेटरी कमेटी बना दे तो बेलगाम होती महंगाई पर अंकुश लगाया जा सकता है।

उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार खुद कारोबारियों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानती है, फिर उसे ही तोड़ने वाले काम क्यों कर रही है? हकीकत में चौतरफा महंगाई से इंडस्ट्री की रीढ़ टूट चुकी है। कारोबारियों ने सरकार को सचेत किया कि यदि इंडस्ट्री का अस्तित्व नहीं बचेगा तो उससे जुड़े करोड़ों वर्करों के सामने भी रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।

इसे भी पढ़ें:

पैतृक गाँव खेवली में “धूमिल” की 85वीं जयन्ती

कारोबारियों ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी से पैदा हुए आर्थिक संकट के दौरान भी इंडस्ट्री ने मैदान नहीं छोड़ा। इसके बावजूद कारोबारियों पर टैक्स का बोझ लाद दिया गया। जबकि होना यह चाहिए था कि इंडस्ट्री को राहत देने वाले कदम उठाते हुए केंद्र सरकार देश की अर्थव्यस्था को तेजी से मजबूत करने की कोशिश पहले करती।

फिलहाल कारोबारी राहत की आस छोड़कर सिर्फ यह चाहते हैं कि कच्चे माल की बेलगाम कीमतों में गिरावट आए। साथ ही रियायती दर पर बिजली, डीजल और जरूरी सुविधाएं दी जाएं। वरना मजबूरन कारोबारियों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

इसे भी पढ़ें:

कोरोना महामारी में आयुर्वेदिक संस्थानों और औषधियों का उपयोग ज़रूरी

Related Articles

Back to top button