सबसे अनुभवी पायलट के हाथों सीडीएस के विमान दुर्घटना की जांच

तीनों सेनाओं की संयुक्त समिति को वायुसेना के सबसे अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट की अध्यक्षता में इस दुर्घटना के तमाम पहलुओं पर गहन अध्ययन करने का काम सौंपा गया है.

अनुपम तिवारी

लखनऊ: तीनों सेनाओं के मुखिया जनरल बिपिन रावत सहित तमाम सैनिकों की असामयिक मृत्यु से पूरा देश स्तब्ध है. वीवीआईपी ड्यूटी में लगे एक अति सुरक्षित हेलीकॉप्टर का इस तरह एक सामान्य उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाना कतई सामान्य नहीं है. इसी वजह से दुर्घटना की जांच को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जा रही. तीनों सेनाओं की संयुक्त समिति को वायुसेना के सबसे अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट की अध्यक्षता में इस दुर्घटना के तमाम पहलुओं पर गहन अध्ययन करने का काम सौंपा गया है.

हेलीकॉप्टर दुर्घटना पर उठे हैं कई सवाल

इस दुर्घटना को लेकर तमाम तरह के प्रश्न स्वाभाविक रूप से खड़े हो रहे हैं. यह प्रश्न काफी उम्रदराज हो चुके वायु सेना के हेलीकॉप्टर बेड़े पर भी हैं, वायुसेना की कार्यकुशलता पर भी हैं तो वहीं कुछ चर्चाएं स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय साजिशों की तरफ भी इशारा करती हैं. साथ ही अत्यंत ढके छुपे शब्दों में देश के वीवीआईपी कल्चर को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिसके अनुसार तमाम नेता, उच्चाधिकारी अपनी विशेष स्थिति का प्रभाव अपने पायलटों पर दबाव डालने में भी करते हैं. यह दबाव प्रायः मौसम, तकनीकी पहलुओं को नजरंदाज करते हुए उनको गंतव्य तक जल्दी पहुंचाने का होता है. हालांकि इस तरह की चर्चाएं तब भी उठी थीं जब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी, पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया और पूर्व लोक सभा अध्यक्ष बालयोगी इत्यादि विगत वर्षों में ऐसे ही हादसों का शिकार हुए थे.

विमान दुर्घटना एक गंभीर विषय है

तमाम न्यूज चैनलों पर जनरल रावत की दुर्घटना संबंधी खबरों को देखने और उनमें से कुछ का खुद भी हिस्सा बनने के बाद मुझे यह तो समझ आ गया कि ज्यादातर जगह इस हादसे को लेकर गंभीरता कम है. टीआरपी की होड़ में दर्शकों तक सनसनीखेज और सबसे तेज समाचार देने की कवायद इस बेहद संजीदा विषय को सतही बना देती है. विमान दुर्घटना एक ऐसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण विषय है जिससे कोई भी सेना अछूती नहीं रह पाती. इसी वजह से ऐसी परिस्थितियों में सेना अपने ही ढंग से जांच करती है और उन तमाम पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण करती हैं जिनसे भविष्य में ऐसे हादसे पुनः न होने पाएं.

सबसे अनुभवी पायलट को हादसे की जांच की कमान

भारतीय वायु सेना इस विमान हादसे की वजह से बेहद चिंतित है. सैन्य कमांडर जनरल रावत के साथ ही वायु सेना ने अपने ग्रुप कैप्टन रैंक के एक उत्कृष्ट पायलट के साथ ही 4 अन्य वायु योद्धा हमेशा के लिए खो दिए हैं. एक बेहतरीन अधिकारी जिंदगी की जंग आज भी लड़ रहा है. इसी वजह से जांच कमेटी की अध्यक्षता एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह को सौंपी गई है जो वर्तमान में देश में हेलीकॉप्टर उड़ान में सबसे दक्ष माने जाते हैं. जिन्हे हेलीकॉप्टर और विशेष रूप से एमआई 17 को उड़ाने का बेहद लंबा अनुभव है. इसके तमाम तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं से वह अच्छी तरह वाकिफ हैं. एयर मार्शल सिंह फिलहाल वायुसेना की ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख हैं.

क्या होता है ब्लैक बॉक्स?

जांच कमेटी कई स्तर पर इस दुर्घटना के पहलुओं की जांच करेगी. हेलीकॉप्टर के मलबे से ब्लैक बॉक्स मिल चुका है जिसका गहन अध्ययन किया जाएगा. किसी भी वायुयान में फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वाइस रिकॉर्डर (एफडीआर और सीवीआर) दो ऐसे यंत्र लगे होते हैं जो उड़ान के दौरान उसके तमाम तकनीकी पक्षों और क्रू के बीच के संवाद को जस का तस रिकॉर्ड कर लेते हैं. इन्ही दोनो को संयुक्त रूप से ब्लैक बॉक्स कहा जाता है.

एफडीआर जहां उड़ान के वक्त जहाज के तकनीकी पक्ष की यथास्थिति, जैसे वह किस ऊंचाई पर, कितनी गति में उड़ रहा था, उसके किस भाग में किस समय कौन सी समस्या आई, की सटीक जानकारी मुहैया कराता है तो वहीं सीवीआर कॉकपिट के अंदर पायलटों की आपस में और जमीन पर स्थित क्रू के साथ के वार्तालाप को ज्यों का त्यों रिकॉर्ड कर लेता है. इससे पता चल जाता है कि दुर्घटना के समय पायलट ने किस तरफ इशारा किया और उसको किस सिस्टम के फेल होने की जानकारी कब मिली आदि आदि. मतलब इनका अध्ययन ही जांच की दिशा तय करता है कि दुर्घटना की स्थिति में गड़बड़ी कहां से उत्पन्न हुई और पायलट ने सुरक्षा की दृष्टि से कौन से कदम उठाए. साथ ही मौसम का इस हादसे में क्या रोल रहा.

कैसे पता चलेगा कि बाहर से हमला तो नही हुआ?

दुर्घटना की स्थिति में एक अन्य पहलू होता है जिस पर चर्चा हो, या ना हो, वायुसेना पूरा ध्यान रखती है. वह यह कि क्या बाहरी तत्वों से जहाज को नुकसान हुआ? अब सीडीएस के विमान की दुर्घटना में जिस तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं, उससे यह विषय अति महत्वपूर्ण हो जाता है. क्या इस विमान को किसी बाहरी हमले, जैसे मिसाइल, बॉम्ब आदि के द्वारा कराया गया अथवा क्या पहले से ही इसमें कोई टाइमबॉम्ब, या अन्य प्रकार का उपकरण फिट किया गया था जो एक विशेष समय के बाद विस्फोट कर गया? इस पहलू को केमिकल जांच के अंतर्गत किया जाता है.

दुर्घटना की स्थिति में वायुसेना किसी भी पहलू को नजरंदाज नहीं करती. वह दुर्घटनाग्रस्त विमान के हर टूटे फूटे हिस्से को इकट्ठा करती है और यदि जरूरत पड़ी तो वह इस मलबे से वापस नया ढांचा तैयार कर देती है. रसायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि विमान में दुर्घटना के समय किस तरह के तत्त्व मौजूद थे. यह प्रक्रिया स्थापित कर देती है कि विमान को बाहर या अंदर से किसी विस्फोट का शिकार होना पड़ा है अथवा नहीं.

हवाई दुर्घटनाएं बहुत कुछ सिखाती हैं

ईश्वर ने मानव को उड़ने के लिए नहीं बनाया होगा, अन्यथा उसे पक्षियों की तरह कुछ शक्तियां जरूर देता. किंतु ईश्वर की सबसे पसंदीदा कृति मानव ने अपनी तकनीकी कुशलता के दम पर उड़ने के साधन बना ही लिए. इन्ही साधनों को वायुयान नाम दिया गया. जब यह साधन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं तो इंसान स्वयं से यह प्रश्न पूछता है कि उसकी कोशिशों में कमी कहां रह गई. और कमियों को देख कर वह निराश नहीं होता, उनको दूर कर के वह फिर नई उड़ान में जुट जाता है. यही मानव स्वभाव है और यह बदलने वाला नहीं है.

जनरल रावत का जाना एक अपूर्णीय क्षति है. ऐसी क्षति दोबारा न हो, इसके पुख्ता इंतजाम करने होंगे. भारत की उड़ाने सफल हों, सजग हों, इसके लिए तैयार होना होगा. वक्त पर भरोसा रखें, वह परीक्षा लेता है किंतु हताश नहीं करता.

(वायु सेना से अवकाश प्राप्त अधिकारी, अनुपम तिवारी रक्षा और सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं. मीडिया स्वराज के साथ ही तमाम समाचार चैनलों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं)

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