आयुष मंत्रालय की नई पहल, हर घर में हो किचन गार्डन, जिसमें रहें पांच औषधीय पौधे

आयुष मंत्रालय की पहल, हर घर में हों पांच औषधीय पौधे

पुरातन काल से ही हमारे देश में छोटी से लेकर भयंकर बीमारियों तक का इलाज देशी अंदाज में वैद्यों द्वारा जड़ी बूटियों के जरिये किया जाता रहा है. हालांकि यह परंपरा अंग्रेजी शासन काल के बाद से बदलने लग गई. खासकर तब जब हम खुद अंग्रेजियत के गुलाम बन गए और अपनी खूबियों को भुलाकर अंग्रेजों के नक्शेकदम पर चलने लगे. अब जबकि पूरी दुनिया बिना कोई साइड इफेक्ट वाले हमारे योग और जड़ी बूटियों वाली दवाओं को मानने लगी है, तब एक बार फिर हमें अपने ऋषि मुनियों की खासियत का एहसास होने लगा है. खुद भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी इस क्रम में लोगों को जागरुक करने के प्रयास कर रहा है. आजादी की 75वीं वर्षगांठ के दौरान आयुष मंत्रालय ने एक पहल के रूप में हर घर में कम से कम पांच औषधीय पौधे लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए आज एक कार्यक्रम का आयोजन भी किया. जानिए, इस कार्यक्रम में क्या क्या हुआ.

वैद्य सुशील कुमार दुबे

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव में वर्षभर अनेक गतिविधियां संचालित करने की योजना बनाई गई है. इसी के तहत “आयुष आपके द्वार” कार्यक्रम से घरों में औषधीय पौधों के रोपण के लिए औषधीय पौधों का नि:शुल्क वितरण किया जा रहा है.

जन-भागीदारी की भावना से आयोजित किए जा रहे इस महोत्सव को 75 हफ्तों तक जन-उत्सव के रूप में मनाया जाएगा. इसी कड़ी में आयुर्वेद संकाय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल, वाराणसी द्वारा गिलोय मिशन के अंतर्गत औषधीय पादप परिचय एवं पादप वितरण कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली पब्लिक स्कूल, वाराणसी में किया गया. भगवान धन्वंतरि की स्तुति एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. डीपीएस के छात्रों द्वारा आयुर्वेद परिचय गीत प्रस्तुत किया गया.

आयुष मंत्रालय की पहल : दिल्ली पब्लिक स्कूल वाराणसी के निदेशक सिद्धार्थ राजगढ़िया ने कहा कि आयुर्वेद हजारों वर्षों से मनुष्य के स्वास्थ्य का माध्यम रहा है. उन्होंने आयुर्वेद संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम की सराहना करते हुए ये आश्वस्त किया कि इंटर के छात्रों में आयुर्वेद के प्रति आस्था एवं विश्वास जगाने में विद्यालय अग्रणी भूमिका निभाएगा.

मुख्य अतिथि मिशन परियोजना अधिकारी प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने अमृत समान गुणकारी गिलोय के औषधीय गुणों पर विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि आयुष प्रणालियों की राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर पहुंच और स्वीकार्यता, गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधों पर आधारित कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता पर निर्भर है, जिससे औषधीय पौधों का व्यापार निरन्तर बढ़ रहा है.

आयुर्वेद के प्रथम उद्देश्य “स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा” हेतु प्रत्येक घर मे पांच औषधि बल एवं वजन बढ़ाने के लिए अश्वगंधा, सांस और खांसी के लिए तुलसी, बुखार के लिए ज्वारंकुश (लेमनग्रास), सभी रोग में लाभकारी गिलोय एवं मानसिक रोग से बचने के लिए वचा को अपने किचन गार्डन में अवश्य लगाना चाहिए, जिससे व्यक्ति को स्वस्थ रखने के साथ साथ चिकित्सालयों की भीड़ को कम किया जा सकता है.

हिमाचल समृद्ध जैविक विविधता से सम्पन्न प्रदेश है. औषधीय पौधों एवं संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए औषधीय पादप बोर्ड आयुष विभाग के साथ कार्य कर रहा है. इसके अंतर्गत आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लिए आर्थिक आवश्यकताओं और औषधीय पौधों की सुगम उपलब्धता पर बल दिया जा रहा है.

कार्यक्रम के सह-परियोजना अन्वेषक एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के क्रिया शरीर विभाग के वैद्य सुशील दुबे ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा के तौर पर सबसे पहले व्यक्ति को रसोई की जड़ी बूटियों के विषय में जानकारी होनी चाहिए. उसके पश्चात आयुर्वेद के प्रथम उद्देश्य “स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा” हेतु प्रत्येक घर मे पांच औषधि बल एवं वजन बढ़ाने के लिए अश्वगंधा, सांस और खांसी के लिए तुलसी, बुखार के लिए ज्वारंकुश (लेमनग्रास), सभी रोग में लाभकारी गिलोय एवं मानसिक रोग से बचने के लिए वचा को अपने किचन गार्डन में अवश्य लगाना चाहिए, जिससे व्यक्ति को स्वस्थ रखने के साथ साथ चिकित्सालयों की भीड़ को कम किया जा सकता है.

उन्होंने आयुर्वेदिक औषधियों के भ्रामक प्रचार, जैसे ये दवाएं देर से असर करती हैं, महंगी होती हैं एवं शरीर पर इसका दुष्प्रभाव होता है, इन सभी का खंडन करते हुए बताया कि मरीज जितनी जल्दी आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेगा, उतनी ही जल्दी इस बीमारी का इलाज होगा.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय द्वारा आयुष आपके द्वार कार्यक्रम के तहत आजादी के अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया था. इसी दौरान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सीएस पाण्डेय ने छात्रों को आहार-निद्रा-ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए स्वस्थ रहने की सलाह दी. साथ ही, आयुष प्रणाली के माध्यम से स्वस्थ जीवन-शैली पर विचार रखने के लिए भी कहा.

डॉ. अवनीश पाण्डेय, प्रभारी चिकित्साधिकारी, प्रतापगढ़ ने गिलोय, हल्दी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, कालमेघ जैसे उपयोगी औषधियों की जानकारी देते हुए छात्रों को तनाव से दूर रहने के लिए नियमित योग-प्राणायाम की सलाह दी. उन्होंने अनुरोध किया कि ग्रहों की शांति के लिए महंगे रत्नों का उपयोग करने के स्थान पर नवग्रह शांति के लिए अपने गार्डन में नवग्रह वाटिका लगाएं. उन्होंने बच्चों को ऑडियो विसुअल द्वारा औषधीय पौधों के महत्व की जानकारी दी.

डॉ. अवनीश पाण्डेय, प्रभारी चिकित्साधिकारी, प्रतापगढ़ ने गिलोय, हल्दी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, कालमेघ जैसे उपयोगी औषधियों की जानकारी देते हुए छात्रों को तनाव से दूर रहने के लिए नियमित योग-प्राणायाम की सलाह दी. उन्होंने अनुरोध किया कि ग्रहों की शांति के लिए महंगे रत्नों का उपयोग करने के स्थान पर नवग्रह शांति के लिए अपने गार्डन में नवग्रह वाटिका लगाएं. उन्होंने बच्चों को ऑडियो विसुअल द्वारा औषधीय पौधों के महत्व की जानकारी दी.

पर्यावरण प्रदूषण , औषधीय वनस्पतियॉं और बीमारियाँ

डॉ. आरएस सिंह ने औषधीय पौधों की खेती के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि जड़ी बूटियों की खेती से किसानों को 10 गुना अधिक लाभ होता है. उन्होंने किसान कंपनी बनाये जाने का तरीका भी बताया. इस अवसर पर हरीतकी पौधे का रोपण करते हुए कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मुक्ति पाण्डेय ने कहा कि हरड़ मनुष्य के लिए माँ के समान हितकारी है, ऐसा आयुर्वेद में कहा गया है इसलिए प्रत्येक विद्यालय में इस पौधे को लगाने की आवश्यकता है.
इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को गिलोय, वचा, लेमनग्रास का वितरण भी किया गया. प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न जड़ीबूटियों के विषय मे प्रश्न भी किये गए, जिनका उत्तर विशेषज्ञों द्वारा दिया गया.

धन्यवाद ज्ञापन देते हुए प्रधानाचार्य मुकेश सेलेट ने वाराणसी जिले के विद्यालयों में आयुर्वेद के द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने हेतु छात्रों के अभिभावकों से अनुरोध किया.

घर में आयुर्वेदिक औषधीय पौधे लगाकर इलाज का खर्च बचायें

कार्यक्रम में प्रोफेसर सीएस पाण्डेय, डॉ. अवनीश पाण्डेय, मुनमुन सेन, रत्ना वर्मा, दीप्ती, प्रस्तुति, आन्या, अवधेश दुबे, तुलस्यान, मोहित अग्रवाल, मानवी सराफ एवं गणमान्य लोग भी मौजूद थे.


(लेखक व वैद्य सुशील कुमार दुबे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के क्रिया शरीर विभाग के गिलोय मिशन के सह परियोजना अन्वेषक हैं.)

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