शोर-शराबे के बावजूद अडाणी ग्रुप को मिला गंगा एक्सप्रेस-वे बनाने का बड़ा ठेका

पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश के सबसे तेज़ रफ्तार से तरक्की करने वाले उद्योग समूह अडाणी ग्रुप को यूपी के गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का बहुत बड़ा ठेका मिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के 80 फीसदी हिस्से को बनाने का ठेका गुजरात ही नहीं, अब देश के प्रमुख उद्योगपति बन चुके गौतम अडाणी के समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिया गया है. कंपनी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) से इस परियोजना के तीन बड़े हिस्से को विकसित करने का ठेका मिला है.

परियोजना का 80 फीसदी हिस्सा बनाएगी अडाणी ग्रुप की कंपनी

विपक्षी दलों के काफी शोर शराबे के बावजूद आखिरकार बीते महीने के आखिरी दिन यानि 30 नवंबर 2021 को ही उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का काम अडाणी ग्रुप को सौंप दिया गया था. इस प्रोजेक्ट पर 17 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह किसी प्राइवेट कंपनी को पीपीपी मॉडल के तहत दिया जाने वाला देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है.

पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश के सबसे तेज़ रफ्तार से तरक्की करने वाले उद्योग समूह अडाणी ग्रुप को यूपी के गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का बहुत बड़ा ठेका मिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के 80 फीसदी हिस्से को बनाने का ठेका गुजरात ही नहीं, अब देश के प्रमुख उद्योगपति बन चुके गौतम अडाणी के समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिया गया है. कंपनी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) से इस परियोजना के तीन बड़े हिस्से को विकसित करने का ठेका मिला है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के 80 फीसदी हिस्से को बनाने का ठेका गुजरात ही नहीं, अब देश के प्रमुख उद्योगपति बन चुके गौतम अडाणी के समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिया गया है. कंपनी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) से इस परियोजना के तीन बड़े हिस्से को विकसित करने का ठेका मिला है.

बता दें कि इसी साल फोर्ब्स पत्रिका द्वारा जारी लिस्ट में भारत के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडाणी से जब एक बार एबीपी न्यूज के कार्यक्रम में पूछा गया कि जो भी लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हैं तो वो आपका नाम लेते हैं. लोगों का कहना है कि आपके ‘विकास’ के पीछे नरेंद्र मोदी का हाथ है? जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ये सब बातें राजनीतिक फायदे के लिए उठाए जाते हैं.

गौतम अडाणी से एंकर ने कहा कि राहुल गांधी ने गुजरात में कहा कि अगर आपको आगे बढ़ना है तो आपका सरनेम अडाणी होना चाहिए। गौतम अडाणी ने कहा कि राजनीतिक बयानों पर अगर में कुछ नहीं ही कहूं तो अच्छा है।

गौतम अडाणी से एंकर ने कहा कि राहुल गांधी ने गुजरात में कहा कि अगर आपको आगे बढ़ना है तो आपका सरनेम अडाणी होना चाहिए। गौतम अडाणी ने कहा कि राजनीतिक बयानों पर अगर में कुछ नहीं ही कहूं तो अच्छा है।

नरेंद्र मोदी द्वारा अडाणी का हवाई जहाज उपयोग करने को लेकर उन्होंने कहा कि हमारा गुजरात बेस्ड कंपनी है। ऐसे में उन्हें इसका उपयोग करना आसान रहता है। जो भी उपयोग किया जाता है, उसका जो भी बिल होता है वो चुकाया जाता है।

मालूम हो कि प्रयागराज से मेरठ तक प्रस्तावित 594 किमी लंबे छह लेन गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा अडानी समूह व आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को इसी साल 30 नवंबर को ही दे दिया गया था. उसी दौरान यह तय कर लिया गया था कि देश के इस सबसे लंबे एक्सप्रेसवे का शिलान्यास दिसंबर के अंत तक पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं.

प्रयागराज से मेरठ तक प्रस्तावित 594 किमी लंबे छह लेन गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा अडानी समूह व आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को इसी साल 30 नवंबर को ही दे दिया गया था. उसी दौरान यह तय कर लिया गया था कि देश के इस सबसे लंबे एक्सप्रेसवे का शिलान्यास दिसंबर के अंत तक पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं.

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) संजीव मित्तल की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने 30 नवंबर की देर शाम फाइनेंशियल बिड खोली गई थी. करीब 36 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए कुल तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी. कंपनियों के चयन की औपचारिक घोषणा बाद में की गई. पहले चरण में मेरठ से अमरोहा तक का काम आईआरबी को मिला. उसके बाद अमरोहा से प्रयागराज तक तीन चरणों का काम अडानी समूह को दिया गया.

इस एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम करीब-करीब तभी पूरा हो चुका था. उसी दौरान यह योजना भी तैयार हो चुकी थी कि इसके दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे. उन्हीं दिनों उप्र एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पूरे प्रोजेक्ट को 12 पैकेज और चार ग्रुप में बांट दिया था.

चार चरण…

ग्रुप 1 – मेरठ से अमरोहा, 129 किमी (आईआरबी)
बोली – 1782 करोड़ रुपये

ग्रुप 2 – बदायूं से हरदोई, 151 किमी (अडानी इंटरप्राइजेज)
बोली – 1950 करोड़ रुपये

ग्रुप 3 – हरदोई से उन्नाव, 155 किमी (अडानी इंटरप्राइजेज)
बोली – 2197 करोड़ रुपये

ग्रुप 4 – उन्नाव से प्रयागराज, 156 किमी (अडानी इंटरप्राइजेज)
बोली – 2099 करोड़ रुपये 

इस एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम करीब-करीब तभी पूरा हो चुका था. उसी दौरान यह योजना भी तैयार हो चुकी थी कि इसके दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे. उन्हीं दिनों उप्र एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पूरे प्रोजेक्ट को 12 पैकेज और चार ग्रुप में बांट दिया था.

एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 17 हजार करोड़ रुपये

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर 17 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके साथ ही यह किसी प्राइवेट कंपनी को पीपीपी मॉडल के तहत दी जाने वाली देश की सबसे बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना है. AEL राज्य में एक्सेस कंट्रोल्ड सिक्स लेन एक्सप्रेसवे के तीन हिस्से बनाएगी. बाद में इसका विस्तार करके इसे आठ लेन का किया जाएगा. इसमें 30 साल का कंसेशन पीरियड (Concession Period) शामिल है.

80 फीसदी हिस्सा डेवलप करेगी अडाणी की कंपनी

गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट मेरठ से प्रयागराज तक लंबा है. यह देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा. यह परियोजना डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर मॉडल यानी DBFOT मॉडल पर होगा. कंपनी की तरफ से जारी बयान के मुताबिक कुल 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का बदायूं से प्रयागराज तक का 464 किलोमीटर हिस्सा बनाने का ठेका उसे मिला है. यानी पूरे प्रोजेक्ट का 80 फीसदी हिस्सा अडाणी ग्रुप की कंपनी बनाएगी. पिछले कुछ साल के दौरान AEL ने देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपने बिजनेस का काफी विस्तार किया है.

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अडाणी समूह को जानें

अडाणी समूह कोयला व्यापार, कोयला खनन तथा बिजली निर्माता कम्पनी है, जिसका मुख्यालय मुम्बई में है. अडाणी ग्रुप को स्थापित करने वाले गौतम अडाणी हैं. फोर्ब्स मैग्जीन के मुताबिक, अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी 10 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं और अहमदाबाद के अरबपतियों में शुमार हैं. अडाणी ग्रुप देश की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक है.

गौतम अडाणी का जन्म अहमदाबाद के निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था और वे कुल सात भाई-बहन थे. पढ़ाई लिखाई करने से पहले रोजी-रोटी का सवाल आ गया. नतीजा यह हुआ कि कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी में बीकॉम में एडमिशन तो ले लिया, लेकिन पढ़ाई आगे बढ़ नहीं पाई. 18 वर्ष की उम्र में पैसे कमाने के लिए मुंबई भाग आए और एक डायमंड कंपनी में तीन-चार सौ रुपये की नौकरी पर लग गए.

दो साल वहां काम करने के बाद गौतम अडाणी ने झावेरी बाजार में खुद का डायमंड ब्रोकरेज आउटफिट खोला. यहीं से उनकी जिंदगी पलटनी शुरू हो गई. वर्ष 1981 में अडाणी के बड़े भाई मनसुखभाई ने प्लास्टिक की एक यूनिट अहमदाबाद में लगाई और उन्होंने गौतम को कंपनी चलाने के लिए कहा.

दो साल वहां काम करने के बाद गौतम अडाणी ने झावेरी बाजार में खुद का डायमंड ब्रोकरेज आउटफिट खोला. यहीं से उनकी जिंदगी पलटनी शुरू हो गई. वर्ष 1981 में अडाणी के बड़े भाई मनसुखभाई ने प्लास्टिक की एक यूनिट अहमदाबाद में लगाई और उन्होंने गौतम को कंपनी चलाने के लिए कहा. इसके बाद उन्होंने बड़े भाई की पीवीसी यूनिट संभाली और धीरे-धीरे कारोबार आगे बढ़ाया.

1988 में उन्होंने एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनी अडाणी इंटरप्राइजेज की स्थापना की. आज अडाणी ग्रुप का कारोबाद दुनिया भर में फैला हुआ है. अडाणी की पत्नी का नाम प्रीति है, जो कि पेशे से डेंटिस्ट हैं और अडाणी फाउंडेशन की हेड हैं. अडाणी के दो पुत्र हैं- करण और जीत. अडाणी के पास दो प्राइवेट जेट हैं, जिसमें उन्होंने बीचक्रॉफ्ट जेट 2005 में और हॉकर 2008 में खरीदी.

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