योगी ही भाजपा का चेहरा, मुख्य प्रतिद्वंद्वी अखिलेश यादव,

राम दत्त त्रिपाठी

योगी आदित्यनाथ ही भाजपा का चेहरा होंगे अगले उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 Uttar Pradesh ASSEMBLY ELECTION में और मुक़ाबले में समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी आला कमान में नम्बर दो अमित शाह Amit Shah ने अपने लखनऊ दौरे में योगी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की दो टूक यह बात कहकर सारी अटकलों पर विराम लगा दिया। अमित शाह ने कहा,” 2024 में मोदी (नरेंद्र मोदी) को प्रधानमंत्री बनाना है तो 2022 में एक बार फ‍िर योगी (योगी आदित्यनाथ) को मुख्यमंत्री बनाना होगा।”

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव अगले साल मार्च तक हो जाएँगे और अब बरसात बंद होते ही प्रचार तेज हो रहा है। अब यह लगभग साफ़ है कि एक ओर भाजपा से योगी और दूसरी ओर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव Samajvadi Party Akhilesh Yadav अगले विधान सभा चुनाव में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए दो सबसे प्रबल प्रतिद्वंद्वी होंगे। 

पिछले विधान सभा चुनाव के अमित शाह भारतीय जनता के अध्यक्ष थे और वहीं चुनाव प्रचार अभियान के सूत्रधार थे। राजनीतिक क्षेत्रों में इस तरह की अटकलें चल रही थीं कि कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री योगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में मतभेद हैं और यह भी कि अमित शाह से उनकी पट नहीं रही। यह भी कहा जा रहा था कि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य  योगी को पहले से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के ख़िलाफ़ हैं।

लेकिन समझा जाता है कि भाजपा नेतृत्व ने यह विधान सभा चुनाव सरकार की उपलब्धियों के बजाय हिंदुत्व की भावना पर ही लड़ने का तय किया है और उस स्थिति में योगी का कोई विकल्प नहीं है।इसलिए उत्तर प्रदेश में योगी ही भाजपा का चेहरा बनेंगे। किसी कारण से उत्तर प्रदेश में हार का मतलब होगा अगले लोक सभा चुनाव में भी पराजय निश्चित है।

इसलिए अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं को बहुत साफ़ कह दिया कि अगर नरेंद्र मोदी को आगे भी दिल्ली में सत्ता में बने रहना है तो यूपी में भी योगी को मुख्यमंत्री बनाना ही होगा। 

मतलब यह कि भले पार्टी कार्यकर्ताओं को यह शिकायत हो कि नौकरशाही हावी है और विधायकों, सांसदों 

या मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही, प्रशासन गड़बड़ है, किसान नाराज़ हैं, गन्ना किसान नाखुश हैं या  धान ख़रीद ठीक  से नहीं हो रही – अब आलाकमान के पास योगी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं है।

अमित शाह का भाषण 

अमित शाह ने लखनऊ के डिफेंस एक्सपो मैदान में शुक्रवार को  ने ‘मेरा परिवार-भाजपा परिवार’ नारे के साथ भाजपा के सदस्यता अभियान की शुरुआत की। अमित शाह ने अवध क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजक/प्रभारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, “भाजपा के लोग जब कमल का झंडा और नारा लेकर चल पड़ते हैं तो विपक्षी दलों के दिल दहल जाते हैं।”

शाह ने कार्यकर्ताओं से चुनाव में तीन सौ से अधिक सीटें जिताने का वचन लेते हुए कहा, ‘‘मोदी जी को एक और मौका दे दीजिए, योगी जी को एक बार फ़िर मुख्यमंत्री बना दीजिए, उप्र देश में नंबर एक हो जाएगा।’’

उन्होंने विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि 2014, 2017 और 2019 के चुनाव से पहले सदस्यता अभियान शुरू किया था और 2022 के चुनाव का श्रीगणेश आज के सदस्यता अभियान से कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गौरवमयी अतीत और भगवान राम एवं कृष्ण की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कैसी थी लेकिन 2017 के बाद भाजपा ने उप्र को पहचान दिलाने का कार्य किया और प्रदेश को बहुत आगे ले जाने का कार्य किया। भाजपा ने पहली बार सिद्ध किया कि सरकारें परिवार के लिए नहीं, सूबे के सबसे गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए होती हैं।



विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि फिर से चुनाव के नगाड़े बज गये हैं और जो घर बैठ गये थे वह नये कपड़े सिलाकर आ गये हैं कि हमारी सरकार बनने जा रही हैं। शाह ने कहा, ‘मैं अखिलेश से हिसाब मांगता हूं कि पांच साल में आप विदेश कितने दिन रहे, उप्र की जनता को इसका हिसाब दे दीजिए।’ उन्होंने तंज किया कि ‘इन लोगों ने शासन स्वयं के लिए, परिवार के लिए और ज्यादा से ज्यादा सोच बड़ी हो गई तो अपनी जाति के लिए किया, और किसी के लिए नहीं किया।’

शाह ने कहा कि ‘‘मोदी जी के नेतृत्व में योगी जी ने जो सरकार चलाई वह उत्तर प्रदेश के गरीब, महिलाओं, नौजवानों और बेरोजगारों के लिए चलाई।’’
शाह ने सपा और बसपा के साथ प्रियंका गांधी और उनके  परिवार पर भी हमला बोला।



अखिलेश की जवाबी तैयारी 

उधर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी ओमप्रकाश राजभर और जयंत चौधरी की पार्टियों से चुनावी गठबंधन करने के साथ ही बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ लेकर एक जिताऊ गठबंधन बना रहे हैं। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के विभिन्न जातीय समूहों के दर्जन भर नेताओं  को यात्राओं पर भेजकर निचले स्तर पर चुनाव मशीनरी मज़बूत करने का कम किया है। सपा दफ़्तर के बाहर लगे होर्डिंग, मैं आ रहा हूँ” को अखिलेश यादव के आत्म विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। 

मायावती और प्रियंका गांधी

बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने महामंत्री सतीश मिश्र को आगे करके फिर से सत्ता में आने के लिए ब्राह्मण समुदाय को रिझाने की कोशिश की है। लेकिन फ़ील्ड में उनकी सक्रियता नहीं दिख रही है। लालजी वर्मा और लाजी वर्मा समेत कई बड़े बसपा नेता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं।

सक्रियता और सरकार से मोर्चा लेने में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सबसे आगे हैं। चाहे सोनभद्र हो, प्रयागराज हो, सहारनपुर, लखनऊ अथवा लखीमपुर खीरी। प्रियंका गांधी ने महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए चालीस फ़ीसदी टिकट देने का दांव चल दिया है। 

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