अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान का मतलब क्या है?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिन्ना की एंट्री से किसको फायदा, किसे नुकसान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश के एक बयान ने गर्माहट फैला दी है. समाजवादी पार्टी के मुखिया ने जिन्ना का जिक्र क्या किया, बीजेपी समेत सभी विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ एकजुट हो गईं. सीएम योगी ने तो उनके इस बयान को तालिबानी मानसिकता वाला और शर्मनाक तक बता दिया. आइए, जानते हैं इस पर वरिष्ठ पत्रकारों का क्या कहना है?

सुषमाश्री

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिन्ना की एंट्री ने खलबली मचा दी है. जिन्ना को लेकर यूपी में अब बयानबाजी तेज हो गई है. कुछ समय पहले तक शांत दिख रहे उत्तर प्रदेश में अब विधानसभा चुनाव का रंग चढ़कर बोलने लगा है. सोमवार को मुरादाबाद पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की सोच ‘तालिबानी‘ और उनका यह बयान ‘शर्मनाक’ है.

सीएम योगी ने कहा कि मैंने अखिलेश का भाषण सुना. वे राष्ट्र को जोड़ने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की तुलना देश तोड़ने वाले जिन्ना से कर रहे थे. यह बेहद शर्मनाक है. अखिलेश यादव को देश से माफी मांगनी चाहिए.

अखिलेश के इस बयान को भारतीय जनता पार्टी ने आड़े हाथों लेते हुए उन्हें माफी मांगने के लिए कहा है. अपने उस बयान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जिन्ना को गांधी नेहरू पटेल जैसा आजादी का नायक बताया था. हालांकि, अखिलेश को करीब से जानने वालों का कहना है कि उनकी जुबान कभी फिसलती नहीं. उन्होंने जानबूझकर यह बयान दिया होगा. हालांकि यह समझने की कोशिश की जा रही है कि इसके पीछे उनकी मानसिकता क्या रही होगी.

अखिलेश का बयान ‘शर्मनाक’

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने कल जिन्ना और सरदार पटेल की तुलना की जो शर्मनाक है. ये तालिबानी मानसिकता है जो बांटने में विश्वास रखती है. सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोया था. उन्होंने कहा कि अखिलेश को अपने इस बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए. इसके बाद से ही यह विवाद खड़ा हो गया है.

दरअसल, अखिलेश यादव ने रविवार को हरदोई में सरदार पटेल की तुलना जिन्ना से कर दी थी. उन्होंने कहा था कि सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना एक ही संस्था में पढ़कर बैरिस्टर बनकर आए थे. एक ही जगह पढ़ाई-लिखाई की. वह बैरिस्टर बने और उन्होंने आजादी दिलाई.

सरदार पटेल का अपमान स्वीकार नहीं

मुरादाबाद में CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूरा देश सरदार पटेल को लौह पुरुष मानता है. ऐसे समय में अखिलेश की सोच फिर से सामने आई है. उन्होंने देश को तोड़ने वाले जिन्ना को देश को जोड़ने वाले सरदार पटेल के समकक्ष रख दिया है. ये सोच हमेशा तोड़ने में विश्वास रखती है. पहले इन्होंने समाज को जाति के नाम पर तोड़ने की साजिशें रचीं, मंसूबे पूरे नहीं हुए तो महापुरुषों पर लांछन लगाकर पूरे समाज को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है.

उन्हें (अखिलेश) तो पहले से ही समाज को बांटने से फुरसत नहीं थी. विभाजन की उनकी प्रवृत्ति अभी गई नहीं है. इन लोगों की मानसिकता ही समाज को तोड़ने की रही है. यह लोग शुरू से ही तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे हैं. सरदार पटेल का अपमान देश हरगिज स्वीकार नहीं करेगा और प्रदेश व देश की जनता अखिलेश को हरगिज स्वीकार नहीं करेगी.

अखिलेश की नासमझी है उनका यह बयान

उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहराई से समझने वाले बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी की नजर में यह बयान अखिलेश यादव की नासमझी है. वे वही गलती कर रहे हैं, जो आडवाणी ने पाकिस्तान में जिन्ना की मज़ार पर जाकर उन्हें सेकुलर बताकर की थी.

राम दत्त त्रिपाठी का मानना है कि अखिलेश यादव ने एक अनावश्यक विवाद मोल लिया है. भाजपा तो वैसे भी हिंदुत्व कार्ड खेल कर धार्मिक ध्रुवीकरण कर रही है और इस तरह की बात कहकर उन्होंने भाजपा को एक और मुद्दा थमा दिया है.

राम दत्त त्रिपाठी के मुताबिक अखिलेश यादव अगर यह सोच रहे हैं कि इससे मुस्लिमों को खुश कर देंगें, तो यह ग़लत है. उनका यह दांव उल्टा पड़ सकता है.

हिन्दुस्तान के मुसलमानों का हीरो जिन्ना नहीं

राम दत्त त्रिपाठी का कहना है, यह समझना भारी भूल होगी कि हिन्दुस्तान का मुसलमान जिन्ना को हीरो मानता है. जो जिन्ना को हीरो मानते थे जो उनके समर्थक थे, वे उनके साथ पाकिस्तान चले गए. हिन्दुस्तान में जो मुसलमान बचा है, वे गांधी, नेहरू, पटेल की वजह से रुके थे. जिन्ना को उनके समकक्ष रखना गॉंधी, नेहरू और पटेल का अपमान है. वे चाहते तो सीमांत गॉंधी, खान अब्दुल गफार का नाम ले सकते थे, मौलाना आजाद का नाम ले सकते थे.

एक गंभीर विषय पर भीड़ में इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए. यह मूल्यांकन करना इतिहासकारों का काम है.

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जिन्ना भी आजादी के आंदोलन में थे शामिल

वहीं, अखिलेश के इस बयान और योगी आदित्यनाथ के पटलवार पर साप्ताहिक अख़बार जदीद मरकज़ के संपादक हसीम सिद्दिकी कहते हैं​ कि अखिलेश जब यह बयान दे रहे थे, उस वक्त उनके दिमाग में क्या चल रहा था, यह कहना तो मुश्किल है पर इतना तो सही है कि जिन्ना भी देश की आजादी के आंदोलन में शामिल थे. बाद में वे कांग्रेस में आपसी झगड़े में नाराज होकर के लंदन चले गए थे. और लंदन से मुस्लिम लीग बनकर आए. वो अलग बात है. वरना शुरुआत में तो जिन्ना भी आजादी के आंदोलन में शामिल थे.

हसीम सिद्दिकी आगे कहते हैं​, एक फिल्म बनी थी गांधी. उसमें तो जब गांधी साउथ अफ्रीका से देश वापिस लौटते हैं, तो उन्हें बंदरगाह पर रिसीव करने वालों में जिन्ना और सरदार पटेल, सब इकट्ठे ही शामिल होते हैं. तो ये कोई ऐसी बात नहीं है.

जिन्ना के नाम पर वोट देने वाले पाकिस्तान में मिलेंगे

उन्होंने आगे कहा, रही बात जिन्ना के नाम पर वोट की तो अगर अखिलेश यह समझ रहे हों कि जिन्ना के नाम पर भारत के मुसलमान उन्हें वोट दे देंगे तो यह उनकी गलतफहमी है. जिन्ना के नाम पर वोट देने वाले पाकिस्तान में मिलेंगे. पाकिस्तान का चुनाव तो यह है नहीं, यह तो भारत का, खासकर यूपी का चुनाव है.

​सिद्दिकी आगे कहते हैं, रही बात योगी जी जो कह रहे हैं कि अखिलेश की मानसिकता तालिबानी है तो ये तो बड़ी अजीब बात हो जाएगी. तालिबानी मानसिकता तो जिन्ना की भी नहीं थी तो अखिलेश की कैसे हो जाएगी? तालिबान तो बिल्कुल अलग चीज है. तालिबानी मानसिकता तो विश्व हिंदू परिषद और हिंदू युवा वाहिनी के लोग चलते हैं. हिंदुओं के नाम पर जो तरह तरह की संस्थाएं बना रखी हैं लोगों ने, जो तंजीमें बना रखी हैं, ये लोग तालिबानी हैं, जो किसी को भी पकड़कर मारने लगते हैं, किसी का घर जला देते हैं, कहीं नारेबाजी करते हैं, यही तो मानसिकता तालिबानी है, जिहादी मानसिकता तालिबानी है. कुछ समय पहले तक तो लोग तालिबान को जानते तक नहीं थे.

वे कहते हैं, और यह कहना भी गलत है कि जिन्ना भारत की आजादी में शामिल नहीं थे. वो तो थे, थोड़े समय के लिए ही थे, फिर चले गए थे लंदन. लंदन में अंग्रेजों ने उन्हें अपने जाल में फंसाया, उन्हें मुस्लिम लीग का नेता बनाया, उन्हें मुसलमान लीडर बनाया, और उसके बाद वहां से लौटकर आए तो उन्होंने यहां मुस्लिम पॉलिटिक्स शुरू की.

जिन्ना का नाम लेना शर्मनाक कैसे हो सकता है?

साप्ताहिक अख़बार जदीद मरकज़ के संपादक हसीम सिद्दिकी आगे कहते हैं, अखिलेश ने अगर गांधी, नेहरू और पटेल के साथ जिन्ना की बात भी अपने बयान में कर दी तो इसके लिए उनके बयान को शर्मनाक बताने की जरूरत सीएम योगी को नहीं थी. कुछ भी क्यों न हो, लेकिन जिन्ना एक देश का संस्थापक था, फिर उसका नाम लेना शर्मनाक कैसे हो सकता है?

अभी तक तो उस देश से हमारे ताल्लुकात अच्छे थे. मोदी जी के आने के बाद ताल्लुकात खराब हुए हैं. उससे पहले तो ताल्लुकात खराब थे नहीं, बाजपेयी जी तो बस में बैठकर गए थे उस देश को, जो जिन्ना का बनाया हुआ देश था. तो हर चीज को शर्मनाक कह देना, यह तो बड़ी अजीब बात है. शर्मनाक तो यह है, जो बयानबाजी ये लोग करते हैं. बाकी आप किसी देश के संस्थापक का नाम क्यों नहीं ले सकते हो? देखिए, मैं फिर से यही कह रहा हूं कि जिन्ना देश की आजादी की लड़ाई में शामिल थे.

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जिन्ना और सावरकर दोनों एक जैसे हो गए

उन्होंने कहा कि बाद में जिन्ना और सावरकर दोनों एक जैसे हो गए. दोनों ने फिर अलग अलग देश की थ्योरी को आगे बढ़ाया. तो इसमें केवल जिन्ना क्या करे, सावरकर भी इसके लिए उतने ही जिम्मेदार थे. और बहुत जज्बाती थे. आप जानते हैं कि जज्बाती बातों पर जनता भी बहुत जल्दी साथ लग जाती है. जैसे आज बहुत सारे लोग विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के साथ लग जाते हैं तो वे क्या दिल से बुरे थोड़े हैं, जो उनके साथ लग जाते हैं. वे तो जज्बात में भटक जाते हैं. इसलिए होता है. तो जिन्ना ने भी जज्बात का फायदा उठाया. असल में दिक्कत यह है कि लोग पढते नहीं हैं. लोग न पढ़ते हैं न जानकारी रखते हैं. ये तो सिर्फ नाम से चिढ़ते हैं. और शर्मनाक करने वालों के लिए तो अगर अखिलेश यादव मौलाना अब्दुल कलाम आजाद का नाम लें तब भी शायद वे शर्मनाक कहने लगेंगे, कह देंगे कि मुसलमान का नाम क्यों ले रहा है? ये लोग तो उस तरह के हैं.

सिद्दिकी ने आगे कहा, अभी आपने देखा नहीं कि शनिवार को अमित शाह ने यूपी जाकर किस तरह की बात की. उनका काफिला आ रहा था और रास्ते में नमाज पढ़ रहे थे कुछ लोग. हाइवे पर आज तक नमाज पढ़ते देखा है किसी ने. तो ये तो झूठों की बारात है. ये सब झूठ बोलने वाले लोग हैं. कुछ भी कह सकते हैं. कुछ भी कर सकते हैं.

जिन्ना को लेकर अखिलेश ने क्या कहा था

बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के एक बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है. उन्होंने रविवार को एक जनसभा में मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की थी. अखिलेश ने गांधी, पटेल और नेहरू के साथ जिन्ना का नाम भी जोड़ दिया था. भारतरत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार पटेल, जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना, एक ही संस्था से पढ़कर निकले, ​बैरिस्टर बने और उन्होंने आजादी दिलाई. यह भी कहा कि आजादी के लिए हर तरह का संघर्ष किया. भाजपा के लोग वाकई पटेल जी को मानते हैं तो तीनों कृषि कानून रद्द करें.

यूपी सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने कहा

यूपी सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने अखिलेश यादव के इस बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को जिन्ना के रिश्तेदारों से वोट की आस है. विभाजनकारी जिन्ना की विचारधारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार पटेल, जवाहर लाल नेहरू की विचारधारा है. ऐसा कह कर अखिलेश यादव ने देश के महापुरुषों का अपमान किया है. समय रहते देश को यह समझ लेना चाहिए कि ‘जिन्ना वाली आजादी’ की मांग करने वाले कौन-कौन लोग जिन्नावादी हैं, जिन्हें जिन्ना के रिश्तेदारों से वोटों की आस है.

उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता बताया है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए. मोहसिन रजा ने कहा, जिन्ना पर देश का बंटवारा करने का दारोमदार है. उसका महिमामंडन कैसे कर सकते हैं? देश का बंटवारा करने वालों को ऐसे बताना देश का अपमान है. ओवैसी हों या अखिलेश, दोनों ही मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं.

बीजेपी के सांसद राकेश सिन्हा की प्रतिक्रिया

बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने भी अखिलेश के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ऐसा लगता है जैसे कि अखिलेश यादव यूपी चुनाव के बाद पाकिस्तान में शरण लेने वाले हैं. अखिलेश यादव इतिहास के अपराधी के तौर पर बात कर रहे हैं. उन्होंने भारत के इतिहास की पुस्तक पढ़ी है या फिर पाकिस्तान के इतिहास की पढ़कर इस तरीके का बयान दे रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश इस तरह का बयान देकर यूपी के मुसलमानों को आकर्षित करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमानों का जिन्ना से कोई संबंध नहीं है और इस तरह का बयान भारत के मुसलमानों का अपमान है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव इस सीमा तक जाकर मोहम्मद अली जिन्ना का महिमामंडन कर रहे हैं. वो ये मानकर चल रहे हं कि उत्तर प्रदेश और भारत के मुसलमान प्रसन्न होंगे, पर ऐसा होने वाला नहीं है.

मायावती बोलीं- दोनों पार्टियों की अंदरुनी मिलीभगत

बसपा प्रमुख मायावती ने अखिलेश के इस बयान को सपा और भाजपा की मिलीभगत बताया है. उन्होंने कहा, सपा मुखिया द्वारा जिन्ना को लेकर कल हरदोई में दिया गया बयान व उसे लपककर भाजपा की प्रतिक्रिया, यह दोनों पार्टियों की अंदरुनी मिलीभगत व इनकी सोची समझी रणनीति ​का हिस्सा है ताकि यहां यूपी विधानसभा आमचुनाव में माहौल को किसी भी प्रकार से हिंदू मुस्लिम करके खराब किया जाए.

मायावती ने आगे कहा कि सपा और भाजपा की राजनीति एक दूसरे के पोषक व पूरक रही है. इन दोनों पार्टियों की सोच जातिवादी व सांप्रदायिक होने के कारण इनका अस्तित्व एक दूसरे पर आधारित रहता है. इसी कारण सपा जब सत्ता में होती है तो भाजपा मजबूत होती है जबकि बीएसपी जब सत्ता में रहती है तो भाजपा कमजोर.

मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने क्या कहा

मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव के मुंगेरी लाल के सपने खत्म होते जा रहे हैं, इसलिए वे तुष्टीकरण के लिए जिन्ना को सरदार वल्लभभाई पटेल से जोड़ते हैं. ये सरदार पटेल का अपमान है.

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