अग्निवीर योजना पर युवाओं में क्यों है शंका और असंतोष ?

    डॉ. अमिताभ शुक्ल 

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा युवाओं को भारतीय सेना में चार वर्ष के लिए प्रस्तावित रोजगार की योजना को लेकर चर्चा गर्म है.
इसके साथ ही देश भर में बड़े स्तर पर युवाओं द्वारा इसका विरोध भी किया जा रहा है.

योजना की प्रमुख विशेषताएं :

घोषणा से प्राप्त विवरण के अनुसार साढ़े सत्रह वर्ष से इक्कीस वर्ष के युवाओं को चार वर्ष की अवधि हेतु सेना में नियुक्ति दी जाएगी .इस अवधि में उन्हें तीस हजार से चालीस हजार रुपए प्रति माह वेतन प्राप्त होगा . चार वर्ष बाद भर्ती किए गए युवाओं की कुल संख्या में से पच्चीस प्रतिशत युवाओं को सेना में स्थाई रूप से सम्मिलित किया जाएगा .

प्रति माह के वेतन से एक अंश की कटौती करते हुए चार वर्ष की अवधि पश्चात उन्हें इस कटौती की कुल राशि प्राप्त होगी .

इस योजना से युवा क्यों आंदोलित हैं ?

 देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में युवा आक्रोशित हो कर इस योजना की खिलाफत करने लगे हैं. उनके असंतोष का मुख्य मुद्दा इस भर्ती का अस्थाई होना है. उनका तर्क है कि , चार वर्ष पस्चात उनका भविष्य क्या होगा ? जब वह पुनः बेरोजगार हो जायेंगे .

युवाओं द्वारा अक्समात एवम् अचानक इतनी बड़ी संख्या में इस योजना का विरोध किया जाना आश्चर्यजनक है. लेकिन , इस असंतोष के कारणों को समझना आवश्यक है.देश में विकट बेरोजगारी की स्थिति , शासकीय और निजी क्षेत्र में रोजगार के न्यून अवसरों के साथ बड़ी संख्या में युवाओं का वर्तमान और भविष्य अंधकारमय है. और पढ़ाई पर परिश्रम , व्यय के बाद उनकी बेहतर भविष्य की आकांछाएं होना स्वाभाविक है. यह योजना उन्हें स्थाई रोजगार के साथ स्थाई निश्चित भविष्य की गारंटी नहीं देती .इसलिए वह आक्रोशित हैं.

सामाजिक सुरक्षा का अभाव :

भारत में किसी भी प्रकार की ” सामाजिक सुरक्षा ” का अभाव है. अन्य शब्दों में मुफ्त गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा , स्वास्थ सुविधाओ की अनुपलब्धता के साथ बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान न होना ( जिन राज्यों में इस किस्म के कुछ प्रावधान हुए भी हैं वह अपर्याप्त हैं) , बीमारी की स्थिति में बीमा अथवा दुर्घटना बीमा के शासकीय प्रावधान केवल संगठित क्षेत्र में रोजगार प्राप्त लोगो को उपलब्ध हैं ,बेरोजगार वर्ग इनसे वंचित है.
अर्थात लोगों का जीवन ,आर्थिक स्तर , आवास , बेहतर भविष्य की योजनाएं सब केवल स्थाई रोजगार पर निर्भर करती हैं.
निम्न पदों हेतु बड़ी संख्या में उच्च उपाधि धारकों द्वारा आवेदन और भर्ती में गड़बड़ियों से आक्रोश की स्थितियां :

        शिक्षित बेरोजगारी की भीषण स्थिति को हाल ही के  उन कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है जिनमें किसी शासकीय विभाग अथवा उच्च न्यायालय में चपरासी की भर्ती के विज्ञापनों में लाखों की संख्या में उच्च  शिक्षित युवाओं के आवेदन आए और इनमे पी एच डी  और इंजियनिरिंग उपाधि धारकों ने भी आवेदन किए .

कुछ माह पूर्व रेलवे में भर्ती में गड़बड़ियों को लेकर भी युवाओं द्वारा उत्तरप्रदेश एवम् बिहार में युवाओं द्वारा आक्रोशित हो कर उग्र आंदोलन किए गए थे .यह स्थितियां यह स्पष्ट करती हैं कि ,रोजगार के अभाव में और नौकरी की चाह में देश भर में करोड़ों की संख्या में बेरोजगार युवक हैं और अपने भविष्य को लेकर परेशान और पीड़ित हैं. टकटकी लगा कर रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और रोजगार की स्थितियां उत्पन्न होने पर भी उनमें विसंगतियों और गड़बड़ियों से आक्रोशित हो उठते हैं .

नियमित रूप से रोजगार अवसरों का अभाव :

       दुर्भाग्य से देश में रोजगार के नए अवसर बहुत सीमित हो जाने से राज्यों में  अथवा केंद्र के स्तर पर नियमित रूप से रोजगार के अवसर अनुपलब्ध हैं जबकि ,प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में रोजगार के लिए इच्छुकों की संख्या बढ़ती जाती है. उद्योगों में अथवा शासकीय विभागों में रोजगार अत्यल्प हैं.रोजगार हेतु ठोस और गंभीर योजनाओं की आवश्यकता : 

वर्तमान हालातों में अनिवार्य है कि ,केंद्र और राज्य सरकारें नीतियों में परिवर्तन कर अर्थात निजी क्षेत्र को अवांछित बड़ावा देने की नीति में परिवर्तन कर और सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण की नीति पर रोक लगाएं .रोजगार के नए अवसरों की खोज हेतु विशेषज्ञों की राय लें , शीघ्र कृषि , लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना द्वारा उत्पादन , रोजगार और आय में वृद्धि के उपक्रम प्रारंभ करें .

यह उपाय आवश्यक हैं , उत्पन असंतोष और भविष्य में असंतोष की आशंकाओं पर नियंत्रण हेतु ताकि , युवाओं , उनकी शिक्षा और उनकी आकांक्षाओं का देश हित में समुचित उपयोग करते हुए विकास में उन्हें भी शामिल करना संभव हो सके .

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