जलपुरुष राजेंद्र सिंह की गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से वार्ता

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने इस झरने को Heritage Site घोषित करने के प्रयासों का समर्थन किया। यहाँ इस समय राज्य के पर्यावरण सचिव कुणाल IAS डॉ प्रदीप सरमोकादम सदस्य सचिव गोवा राज्य जैवविविधता मंडल गांव की पंचायत के सरपंच आदि लोग उपस्थित थे।

दिनांक 20 नवम्बर को विरासत स्वराज यात्रा तिर्वारु, में संतूर पारी ने इस यात्रा का संयोजन और स्वागत किया। यहां एक पुरातन 1945 में शुरू हुआ महाविद्यालय है। इस विद्यालय के सभी शिक्षकों और छात्रों ने यात्रा का स्वागत किया। यात्रा में आज आरबीआई के गवर्नर सचिव श्रीधरन ने राजेंद्र जी के भाषण को वहां की स्थानीय भाषा में बताया। इस यात्रा में सबसे पहले गुरु स्वामी ने नदियों की यात्रा के बारे में समझाया। इसके बाद विनोद वोधनकर ने कहा कि, जब हमारी नदियां बीमार है, तो फिर हम शिक्षकों और छात्रों की नदी को स्वस्थ करने में क्या भूमिका होनी चाहिए?

19,20 नवम्बर 2021 : विरासत स्वराज यात्रा 19 नवम्बर को गोवा में पोंबुर्फा नाम के छोटे से गांव में पहुँची। यहाँ जैवविविधतता प्रबंधन समिति के सदस्य, गांव के लोग और ज्ञान प्रसारक मंडल के MSc Environmental Science, के विद्यार्थियों के साथ चर्चा करते हुए जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि, भारत में पहले जैवविविधता का बहुत सम्मान था, लेकिन अब इसमें हमारी आधुनिक विकास और शिक्षा ने बिगाड़ कर दिया है। हमें जैवविधिता को संरक्षित करने का प्रयास करना होगा। यहाँ एक बहुत अद्भुत औषधि गुणों से परिपूर्ण झरना है, जहाँ एक तरफ ठंडा पानी और दूसरी तरफ गरम पानी आता है। यहाँ के स्थानीय लोगों ने बताया कि, हमारे आंखों की बीमारी इसके पानी से एक-दो बार साफ करने से ही ठीक हो जाती है। इसलिए यहाँ के समाज, छात्रों ने मिलकर बहुत अच्छे ढंग से संजोकर रखा है।

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने इस झरने को Heritage Site घोषित करने के प्रयासों का समर्थन किया। यहाँ इस समय राज्य के पर्यावरण सचिव कुणाल IAS डॉ प्रदीप सरमोकादम सदस्य सचिव गोवा राज्य जैवविविधता मंडळ गांव की पंचायत के सरपंच आदि लोग उपस्थित थे।

गोवा के मुख्यमंत्री, पर्यावरण मंत्री और सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक हुई। इस बैठक को संबोधित करते हुए जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने अपने राजस्थान के अनुभवों का रखे।

इसके उपरांत शाम को गोवा के मुख्यमंत्री, पर्यावरण मंत्री और सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक हुई। इस बैठक को संबोधित करते हुए जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने अपने राजस्थान के अनुभवों का रखे। इसके उपरांत राजेन्द्र सिंह ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से कहा कि, आपके राज्य में पानी की बहुत बर्बादी होती है। इसलिए आपको पानी के अनुशासित उपयोग करने हेतु राज्य में जल साक्षरता यात्रा और जल उपयोग दक्षता को बढ़ाने का काम शुरू करना चाहिए।

आगे कहा कि, इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि, राजेन्द्र भाई ने जो कहा है, उन सभी बातों को करने का प्रयास करेंगे। इसके उपरांत गोवा से यात्रा रात बजे 1 बजे तमिलनाडु त्रिची पहुँचीं।

दिनांक 20 नवम्बर को विरासत स्वराज यात्रा तिर्वारु, में संतूर पारी ने इस यात्रा का संयोजन और स्वागत किया। यहां एक पुरातन 1945 में शुरू हुआ महाविद्यालय है। इस विद्यालय के सभी शिक्षकों और छात्रों ने यात्रा का स्वागत किया। यात्रा में आज आरबीआई के गवर्नर सचिव श्रीधरन ने राजेंद्र जी के भाषण को वहां की स्थानीय भाषा में बताया। इस यात्रा में सबसे पहले गुरु स्वामी ने नदियों की यात्रा के बारे में समझाया। इसके बाद विनोद वोधनकर ने कहा कि, जब हमारी नदियां बीमार है, तो फिर हम शिक्षकों और छात्रों की नदी को स्वस्थ करने में क्या भूमिका होनी चाहिए? हमे इस भूमिका को तलाशना होगा। यदि नदियां स्वस्थ होंगी, तो हम स्वस्थ होंगे। आगे पेंसुलर रिवर काउंसिल के वारे में बताया।

इसके बाद नरेंद्र चुग ने अपनी अग्रणी नदी को पुनर्जीवित करने का अपना अनुभव रखते हुए कहा कि, यदि विद्यार्थी को अधिक दिन जीवित रहना है, तो अपनी नदियों को ठीक करना ही होगा। नदी और मानवीय स्वस्थ का गहरा संबंध है।

इसके बाद नरेंद्र चुग ने अपनी अग्रणी नदी को पुनर्जीवित करने का अपना अनुभव रखते हुए कहा कि, यदि विद्यार्थी को अधिक दिन जीवित रहना है, तो अपनी नदियों को ठीक करना ही होगा। नदी और मानवीय स्वस्थ का गहरा संबंध है।

इस बातचीत के बाद स्नेहल दोंडे ने छात्रों से कहा कि, हम सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की भूमिका हैं कि, हम अपने राज्य और देश की नदियों को स्वच्छ रखने का काम करें।

अंत में जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि, हम भारत के लोग जल को निर्माता मानते है, हम जल में अपना जीवन देखते है और गरिमामय जीवन तलाशते है। इस पद्धति से जीवन जीने वाले लोग भारत के अलावा और कहीं नही है। इसलिए हमारे शास्त्रों में जल को ब्रह्मा कहा गया है। इसका अर्थ है! जल कहता है कि, मैं ही ब्रह्मा हूँ और ब्रह्मांड का निर्माता हूं।

13.7 अरब साल पहले ब्रह्मांड आग का गोला था, लम्बे समय बाद, वस्तुमान और अंतरिक्ष का पता चला था। 4.3 लाख साल पहले हाईड्रोजन और ऑक्सीजन नामक दो अणु आपस में मिल गए, जिससे जल, धरती, नदी बनी व इस जल से जीवन बना। अतः ब्रह्मांड जलमय होने लगा। तब भारतीयों ने जल को ही ब्रह्मा मान लिया था।

13.7 अरब साल पहले ब्रह्मांड आग का गोला था, लम्बे समय बाद, वस्तुमान और अंतरिक्ष का पता चला था। 4.3 लाख साल पहले हाईड्रोजन और ऑक्सीजन नामक दो अणु आपस में मिल गए, जिससे जल, धरती, नदी बनी व इस जल से जीवन बना। अतः ब्रह्मांड जलमय होने लगा। तब भारतीयों ने जल को ही ब्रह्मा मान लिया था। सौर-मंडल, ब्रह्मांड, अंतरिक्ष में भी गंगा बहती है, ऐसी मान्यता उभरने लगी थी। अंत में भारतीयों के समग्र दर्शन की मान्यता ने ही ‘वसुदेव-कुटुम्बकम्’ का भाव बना दिया था। जल एक है, तो ब्रह्मा भी एक ही होगा, इस सिद्धांत के चलते हम जलमेव ब्रह्मांड कहने वाले बन गए। यह सत्य है!

*व्यक्ति, पंचमहाभूत से निर्मित शरीर में, आत्मचिंतन के प्रकाश से अपना मन, मस्तिष्क और बौद्धिक अभ्यास से जो विचारता है, वही करता हूँ। वही मेरी दुनियां और ब्रह्मांड? मुझे मालूम नही सत्य क्या हैं?

मुझे मालूम नही, फिर भी मैं अपनी दुनिया बनाने वाले स्वप्न देखता हूँ। जीवन में सत्य को भगवान मानकर जीवन, जीविका और जमीर के लिए कर्मकांड करता हुँ। वही मेरी दुनियां है? जल ने ही दुनियां को एक बनाया है। मेरी दुनियाँ पूरा ब्रह्मांड मेरा हैं। यहां मेरा जीवन, जीविका और जमीर ही मेरी विरासत हैं।

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