ड्राइवर बना मज़दूरों का मसीहा !

 

ट्रक ड्राइवर महेंद्र कुमार

महेंद्र लगभग 10 साल से ट्रक चला रहे हैं | उन्होंने बताया कि  पहली बार उन्होंने ऐसा नजारा देखा है, उन्होंने बहुत सारे लोगो की मदद की, अपने ट्रक में बिठाया, बाटी खिलाया और लखनऊ तक छोड़ने का वादा किया | उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया | महेंद्र यह कार्य लगभग एक  महीने से कर रहे हैं, वो अपनी ट्रक में जितने लोगो को बिठा सकते हैं, वो बिठाते हैं और उनकी मदद करते हैं !

 

उन्होंने बताया की एक्सप्रेसवे पर लोगो के पास खाने को नहीं है, पैदल ही मीलों  का सफर तय करने को मज़बूर हैं, जिनमे बच्चे भी हैं, औरतें,  किसी की  गोद में है नौ महीने का बच्चा तो कोई 8 महीने पेट से है , कोई महीने के उन पाँच दिनों से जूझ रहा है, भूखे ,प्यासे, बेघर और बदहाल, तो कोई पैरों के छालों को नजर अंदाज़ कर बस चला जा रहा है |

ये ज़िन्दगी है, वो बड़े बड़े शहर जो इन मजदूरों ने बनाया वो शहर इनको अब रोटी नहीं दे सकता, यह व्याकुल है अपने वतन, अपने गॉव जाने के लिए |

लखनऊ आगरा  एक्सप्रेसवे जो की 350 किलोमीटर लम्बा है, यहाँ से बड़ी तादाद  में ट्रक आते हुए दिखे ! हर ट्रक में मजदूर थे जो अपने घर जाने को निकले हैं | मजदूरों ने लगभग 2 महीने इंतजार किया कि  लॉकडाउन खुल जाएगा लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ , तो इनके पास दिल्ली में रहने की कोई वजह नहीं मिली |

मजदूरों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन जब कोई  जवाब नहीं मिला तो इनलोगो ने पैदल ही चलना स्वीकार किया | किशन जो एक मजदूर हैं वो हरयाणा में काम करते थे .| लॉकडाउन होने के बाद इनके पास जो पैसे थे अब वो भी ख़त्म हो गए हैं,  इनके मालिक ने इनको पैसा देना बंद कर दिया , न खाने को था और ना किराया देने का पैसा.  किशन ने बताया की 7 तारीख़  को उन्होंने हरयाणा सरकारी मोबाइल ऐप  पर राशन के लिए अप्लाई किया, पर आज 11 तारीख़ हो गया,अभी तक कोई जवाब नहीं आया है | किशन ने घर से पैसा मांगकर साइकिल खरीदा और अब उसी साइकिल से यह बिहार जा रहे हैं !जब यह रास्ते में थक गए तो इन्होने ट्रक का सहारा लिया | इन्होने अभी तक 250 किलोमीटर साइकिल चलाया |

हमने दूसरी एक छोटी सी ट्रक में 21 लोग भरे हुए देखे, ट्रक के साइड में साइकिल टांगी हुई है, भेड़ बकरियां भरी हुई हों ,ऐसा प्रतीत होता है, पर जज़्बा है घर जाने का !

  रपट और चित्र : लखनऊ सेअमन

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