कृषि कानून फिर आ सकते हैं – कृषि मंत्री तोमर का संकेत

महाराष्ट्र: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने महाराष्ट्र के एक कार्यक्रम में तीनों कृषि कानून पर बड़ी बात कह दी। कृषि मंत्री तोमर ने कृषि कानून पर बयान देते हुए कहा कि तीन कृषि कानून के खिलाफ किसानों द्वारा चलाए गए विरोध प्रदर्शन को देखते हए भले ही इसे वापस ले लिया गया है, लेकिन बाद में फिर से पेश किए जा सकते हैं।

तोमर ने आगे कहा कि यह नया कृषि कानून कुछ लोगों की वजह से खत्म किया गया है। संसद में इसपर चर्चा और बहस की कमी के कारण इसे निरस्त कर दिया गया है। सभी ने इसे काले कानून का नाम दिया। लेकिन बाद में इसे फिर से पेश किए जा सकते हैं।

तोमर ने यह भी कहा कि जब हम कृषि संशोधन कानून लाए तो कुछ लोगों को यह कानून पसंद नहीं आया। इस कानून में आजादी के 70 साल बाद पीएम मोदी की अगुवाई में एक बहुत बड़ा सुधार किया गया था। लेकिन इस कानून को वापस लेने से सरकार निराश नहीं है। भले ही हम एक कदम पीछे चले गए हों, लेकिन हम फिर आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमारे देश की रीढ़ किसान है। जब कृषि कानून वापस लेना था, उसके दो दिन पहले ही सरकार ने एक नोट जारी किया, जिसमें कारणों को बताया गया था।

इस नोट में तोमर द्वारा हस्ताक्षरित और संसद सदस्यों को जारी नोट में किसानों के एक समूह को किसानों की स्थिति में सुधार के प्रयास के रास्ते में खड़े हुए लोगों को दोषी बताया गया। और इसके साथ ही मोदी सरकार ने कहा कि किसानों को संवेदनशील बनाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की जरूरत है। साथ ही कृषि कानूनों का एक अलग महत्व है।

पीएम मोदी ने पिछले महीने यूपी और पंजाब की स्थिति को देखते हुए चुनाव के तीन महीने पहले ही कृषि कानून वापस लेकर आश्चर्यजनक फैसला लिया। सरकार के इस फैसले पर विरोधी पार्टियों ने सवाल उठाए, जिसमें कहा गया है कि चुनावों के देखते हुए मोदी ने यह फैसला लिया है।

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आज गुरु पर्व की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा कर दी. एक ओर जहां पीएम मोदी के देर ही सही पर इस दुरुस्त आये फैसले का स्वागत हो रहा है तो वहीं यूपी चुनावों के ठीक पहले किये गये इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं.

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