रबी फसलों के मूल्य में मात्र दो फ़ीसदी की वृद्धि से किसान नाराज़

भारत सरकार ने आज रबी फसलों के समर्थन मूल्य में लगभग दो फ़ीसदी की वृद्धि की है, जिस पर  किसान नेता राकेश टिकैत ने नाराज़गी जतायी है. सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 40 रुपये बढ़ाकर 2,015 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. जो इससे पहले 1,975 रुपये प्रति क्विंटल था. गेहूं की उत्पादन लागत 1,008 रुपये प्रति क्विंटल होने का अनुमान लगाया गया है. 

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने जौ पर 35 रुपये, चना पर 130 रुपये, मसूर पर 400 रुपये, सरसों पर 400 रुपये और कुसुम पर 114 रुपये एमएसपी बढ़ाने का फैसला लिया है. यानि अब जौ 1635 रुपये, चना 5230 रुपये, मसूर 5500 रुपये, सरसों 5050 रुपये और कुसुम्भ (सूरजमुखी) 5471 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा.

किसानों के साथ सबसे बड़ा मजाक

केंद्र सरकार के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है 

भारत सरकार द्वारा फसलों की खरीद हेतु सीजन 2022- 23 की खरीद हेतु जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है वह किसानों के साथ सबसे बड़ा मजाक है ।कृषि मूल्य आयोग द्वारा पिछले साल गेहूं की पैदावार की लागत बताई गई 1459 ₹ थी, इस साल  लागत घटाकर ₹1000 कर दी गई है इससे बड़ा मजाक कुछ हो नहीं सकता।

किसान नेता राकेश टिकैत
राकेश टिकैत

अगर महंगाई दर की बात करें तो इस वर्ष 6% महंगाई में वृद्धि हुई है। जिस तरह से पिछले वर्ष समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया था अगर उस फार्मूले को भी लागू किया जाए तो किसानों को ₹71 कम दिए गए हैं जो सरकार एमएसपी को बड़ा कदम बता रही है उसने किसानों की जेब को काटने का काम किया है, दूसरी कुछ फसलों में थोड़े बहुत वृद्धि की गई है लेकिन उन फसलों की खरीद न होने के कारण किसानों का माल बाजार में सस्ते मूल्य लूटा जाता है।

श्री टिकैत ने कहा है कि सरकार को किसानों को यह भी बताना चाहिए कि पंतनगर विश्वविद्यालय ,लुधियाना विश्वविद्यालय और जो दूसरे गेहूं उत्पादन करने वाले अनुसंधान केंद्र हैं उनकी क्या लागत आती है?

 श्री टिकैत के अनुसार किसानों के साथ सरकारों द्वारा हमेशा अन्याय किया जाता रहा है 1967 में 2.5 कुंतल गेहूं बेचकर एक तोला सोना बेच कर खरीद की जा सकती थी ,आज अगर किसान को एक तोले सोने की खरीद करनी हो तो 25 कुंतल गेहूं बेचने की आवश्यकता है.  इसी कारण आज देश का किसान ऊर्जावान ना होकर कर्ज़वान बन गया है ।

 सरकार  किसानों को ऊर्जावान बनाना है तो उन्हें उनकी फसलों की कीमत देनी ही होगी

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