पाकिस्तान के सामने शेर बन जाते हैं और चीन के सामने दब्बू

शिवानंद तिवारी, पटना से

चीन के साथ तनातनी के मामले में एक बात स्पष्ट तौर पर उभर कर सामने आई है. यह हमारे राष्ट्रीय चरित्र की मूलभूत कमजोरी को भी दर्शाता है. पाकिस्तान के मामले में हम शेर बन जाते हैं और चीन के सामने दब्बू! अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में किस देश की क्या हैसियत है यह जानने का एक सूत्र यह भी है की किस देश का प्रतिद्वंदी कौन देश है. हमने हमेशा पाकिस्तान को ही अपना प्रतिद्वंदी माना है. जबकि तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो भारत के मुकाबले पाकिस्तान कहीं ठहरता नहीं है. यह बात अलग है कि पाकिस्तान का निर्माण ही भारत के प्रति नफरत के भाव से हुआ है. इसलिए आए दिन पाकिस्तान का हमारे प्रति कुछ न कुछ गड़बड़ करने की मनसा में कोई अनहोनी पन नहीं है.

हमारा दूसरा पड़ोसी चीन है. अगर गौर करें तो पाएंगे कि चीन अपना प्रतिद्वंदी अमेरिका को मानता है. सिर्फ चीन नहीं नहीं, बल्कि अमेरिका भी चीन को अपना प्रतिद्वंदी मानता है. कहने की जरूरत नहीं है कि दुनिया में अमेरिका की हैसियत महाबली की बनी हुई है.
लेकिन हमने कभी चीन को अपना प्रतिद्वंदी नहीं माना. कम से कम सार्वजनिक रूप से तो चीन की आलोचना करने से हमेशा हम बचते आए हैं. जबकि हकीकत यह है कि 19 62 में चीन के साथ युद्ध में हम बुरी तरह पराजित हुए हैं. सिर्फ पराजित ही नहीं हुए हैं बल्कि हमारे जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी चीन के कब्जे में है. हमारी संसद का सर्व सम्मत संकल्प है कि हम अपनी एक-एक इंच जमीन चीन से मुक्त कराएंगे. लेकिन देश की नई पीढ़ी को इस संकल्प के विषय में जानकारी भी नहीं होगी. क्योंकि हमारे देश के नेता इस संकल्प का स्मरण कराने से हमेशा बचते रहे हैं! बल्कि आज की पीढ़ी के सामने तो चीन के राष्ट्रपति को हमारे प्रधानमंत्री जी का झूला झूलाने वाला दृश्य है. ऐसे में वह यह कल्पना भी कैसे कर सकता है कि हमारे बहुत बड़े भूभाग पर जिस देश ने कब्जा जमा रखा है उस देश के राष्ट्रपति को हमारा प्रधानमंत्री झूला झूला रहा है.

अभी जिस इलाक़े में चीन की सेना ने प्रवेश किया वह अक्साई चीन से ही जुड़ा हुआ इलाक़ा है. लोग बता रहे हैं कि हमारे गृहमंत्री जी कश्मीर को नाम लेवा स्वायत्तता देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के प्रस्ताव को पास कराने के बाद संसद में अपने भाषण में कहा था कि इसके बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन के इलाक़े को ख़ाली कराना हमारा लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि इसके लिए मैं जान देने से भी पीछे नहीं हटूंगा.

लोग बता रहे हैं कि चीन की मौजूदा कार्रवाइ के पीछे शायद उसी भाषण ने उकसावे का काम किया है. अक्साई चीन इलाक़ा 1962 के युद्ध के बाद से ही चीन के क़ब्ज़े में है. चीन का उस क्षेत्र में भारी निवेश है. जानकारी के अनुसार चीन लगभग चार-पाँच किलोमीटर हमारी सीमा के अंदर प्रवेश कर गया था. ख़बरों के अनुसार दोनों मुल्कों की सेनाएँ वापस हो रही हैं.चीन पीछे हट रहा है यह बात तो समझ में आ रही है. क्योंकि उसकी फ़ौज हमारी सीमा के अंदर थी जो अब पीछे हट रही है. लेकिन हमारी सेना के पीछे हटने का क्या मतलब है ! इस पूरे प्रकरण में देश अंधकार में है. अत: भारत सरकार का यह दायित्व है कि देश की जनता को सही स्थिति की जानकारी दे ताकि आशंका और संशय का वातावरण में समाप्त हो. शिवानन्दवेब

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