शिक्षक भर्ती घोटाले की जॉंच एसटीएफ़ को

अनुपम तिवारी, लखनऊ
अनुपम तिवारी, लखनऊ

अनुपम तिवारी, लखनऊ

69 हज़ार सहायक शिक्षकों की भर्ती में तमाम गड़बड़ियां पता चलने के बाद, मामले की जांच अब एसटीएफ को सौंप दी गयी है.

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने इस बाबत मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस घोटाले की तफ्तीश करते हुए अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने कथित रूप से परीक्षार्थियों से सहायक शिक्षक परीक्षा पास करवाने की एवज में लाखों रुपयों की रिश्वत ली थी.
 
मामले में मुख्य अभियुक्त के रूप में प्रयागराज जिले के एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य के एल पटेल का नाम सामने आया है जो कई शैक्षणिक संस्थान चलाता है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने तमाम अभियुक्तों से अब तक 22 लाख रुपये और दो लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की है.
 
इसी संदर्भ में पुलिस ने प्रयागराज जिले के सोरांव से उक्त परीक्षा के टॉपर को भी गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस को अब भी 50 से ज्यादा संदिग्धों की तलाश है. जिले के दर्जन भर से ज्यादा परीक्षा केंद्र जांच के दायरे में आ गए हैं जिनमे गड़बड़ियों की आशंका है.
 
 ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश सहायक शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. पुलिस की जाँच में सामने आया है कि  प्रयागराज में उक्त परीक्षा पास कराने की एवज में प्रति अभ्यर्थी 8 से 10 लाख रुपये तक वसूले गए थे. अंदेशा यह भी लगाया जा रहा है कि जिले में व्यापक स्तर पर हुई गड़बड़ी को देखते हुए इस परीक्षा को रद्द भी किया जा सकता है।
 
 घोटाला कैसे सामने आया
 
मामले के तार उस समय खुलने शुरू हुए जब कुछ समाचार पत्रों में यह खबर छपी कि धर्मेंद्र कुमार पटेल जिन्होंने इस परीक्षा में 150 में से 142 अंक प्राप्त किये थे, वह पूछने पर, भारत के राष्ट्रपति तक का नाम नहीं बता पाए.
 
परंतु घोटाला तबसामने आया, जब प्रतापगढ़ निवासी राहुल सिंह ने इस परीक्षा में हुई व्यापक गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए के एल पटेल समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ सोरांव थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने प्रति छात्र साढ़े सात लाख रुपये लिए थे. राहुल ने स्वयं भी यह कीमत दी थी, फिर भी उन्होंने अपना नाम घोषित परिणाम की लिस्ट में न पा कर खुद को ठगा हुआ पाया और पुलिस से मदद की गुहार लगायी.
 
प्रयागराज एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने मीडिया को जानकारी दी कि पुलिस तुरंत हरकत में आयी है और घोटाले से जुड़े अभियुक्तों की धरपकड़ शुरू कर दी है. एएसपी अशोक वेंकटेश ने बताया कि टॉपर समेत, वरीयता सूची में शामिल 3 परीक्षार्थियों  को गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही पुलिस को एक अभियुक्त की डायरी से 20 लोगों की सूची का भी पता चला है जो इस घोटाले में लिप्त थे.
 
 विपक्ष सरकार पर हमलावर हुआ
 
इस कथित घोटाले ने विपक्ष के हाथ में सरकार  को घेरने का एक हथियार दे दिया है, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने एक वीडिओ जारी कर के इस घोटाले की तुलना मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले से की है. अपने संदेश में प्रियंका कहती हैं कि “इस मामले में गड़बड़ी के तथ्य सामान्य नहीं हैं. डायरियों में स्टूडेंट्स के नाम और पैसे का लेनदेन जाहिर करता है कि घोटाला बहुत व्यापक स्तर  पर हुआ है”. उनके अनुसार, परीक्षा केंद्रों में बड़ी हेरफेर और गड़बड़ियों में रैकेट का शामिल होना दर्शाता है कि इसके तार काफी जगहों पर जुड़े हैं. वहीं बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी सीबीआई जाँच की मांग की है.
 
 69 हजार शिक्षकों की भर्ती वाली यह परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही है. एक सप्ताह पहले ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने परीक्षा परिणाम के खिलाफ दायर की गई कई याचिकाओं को स्वीकृत करते हुए घोषित परिणामों को फिलहाल रोकने का आदेश दिया है. याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि इस परीक्षा से संबंधित जारी की गई उत्तर कुंजी में कई त्रुटियां है. उत्तर प्रदेश सरकार हाई कोर्ट के इस निर्णय को चुनौती देते हुए, उच्चतम न्यायालय का रुख कर चुकी है.

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