PM की सुरक्षा में चूक : SC की उच्चस्तरीय टीम करेगी जांच

SC ने दिया जांच रोकने का आदेश

नई दिल्ली: पंजाब में हुई PM की सुरक्षा में चूक का मामला पिछले कई दिनों से केंद्र और पंजाब सरकार के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। सोशल मीडिया, मीडिया और राजनीतिक पार्टियों के आरोप प्रत्यारोप के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिये एक उच्च स्तरीय टीम बनाई है। वहीं, इस बीच फोन करके पीएम की सुरक्षा में सेंध लगाने की जिम्मेदारी सिख फॉर जस्टिस (SFJ) संगठन ने ली है।

पंजाब में PM की सुरक्षा में चूक और खामियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जायेगी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जल्द ही आदेश जारी कर दिये जायेंगे। बता दें कि इस बीच PM की सुरक्षा में चूक मामले में नया मोड़ सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की जांच के लिए समिति गठित किए जाने के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के 50 से ज्यादा वकीलों को अंतरराष्ट्रीय नंबर से फोन किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह फोन कॉल PM की सुरक्षा में चूक और सेंध मामले से संबंधित थे। फोन करके पीएम की सुरक्षा में सेंध लगाने की जिम्मेदारी सिख फॉर जस्टिस (SFJ) संगठन ने ली है। 

लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट में भी SFJ का था हाथ 

पिछले दिनों लुधियाना कोर्ट में हुए ब्लास्ट में भी सिख फॉर जस्टिस संगठन का हाथ था। हमले के आरोपी जसविंदर सिंह मुल्तानी को जर्मनी से गिरफ्तार किया गया था। जसविंदर सिंह मुल्तानी ‘सिख फॉर जस्टिस’ SFJ से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि सिख फॉर जस्टिस एक खालिस्तानी संगठन है। इस संगठन को भारत सरकार प्रतिबंधित कर चुकी है। संगठन का हेडक्वार्टर अमेरिका में है। इस संगठन के कई सदस्य एनआईए के रडार पर हैं। 

फोन करके पीएम की सुरक्षा में सेंध लगाने की जिम्मेदारी सिख फॉर जस्टिस(SFJ) संगठन ने ली है। 

इसके अलावा उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और पंजाब, दोनों को अपने-अपने पैनलों द्वारा मामले की जांच पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाये हैं।

कोर्ट में आने का क्या मतलब है?

CJI एम वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा कि अगर केंद्र पहले से कारण नोटिस में सब कुछ मान रहे हैं तो कोर्ट में आने का क्या मतलब है? आपका कारण बताओ नोटिस पूरी तरह से विरोधाभासी है। समिति गठित करके आप पूछताछ करना चाहते हैं कि क्या SPG अधिनियम का उल्लंघन हुआ है? फिर आप राज्य के मुख्य सचिव और डीजी को दोषी मानते हैं। किसने उन्हें दोषी ठहराया? उन्हें किसने सुना?

कोर्ट ने कहा, जब आपने नोटिस जारी किया तो यह हमारे आदेश से पहले था। उसके बाद हमने अपना आदेश पारित किया। आप उनसे 24 घंटे में जवाब देने के लिए कह रहे हैं, यह आपसे अपेक्षित नहीं है। आप तो पूरा मन बना कर आए हैं। आपकी दलीलें बताती हैं कि आप सब कुछ पहले ही तय कर चुके हैं। तो फिर यहां इस कोर्ट में क्यों आए हैं? आपका नोटिस अपने आप में विरोधाभासी है क्योंकि किसी भी तरह का एक्शन लेने से हमने सबको मना किया था। आप एक ओर SSP को नोटिस भेज रहे हैं और यहां उनको दोषी भी बता रहे हैं। ये क्या है? जांच के बाद हो सकता है कि आपकी बातें सच हों, लेकिन अभी आप यह सब कैसे कह सकते हैं? जब आप अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की शुरुआत कर चुके हैं तो अब केंद्र सरकार हमसे कैसा आदेश चाहती है?

उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला

वहीं, पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला है। साथ ही कहा कि अगर अफसर दोषी निकलते हैं तो उन्हें टांग दिया जाए। पंजाब सरकार के वकील डीएस पटवालिया ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट चाहता है तो इस मामले में अलग से जांच कमेटी का गठन कर दे। हम उस कमेटी में सहयोग करेंगे लेकिन हमारी सरकार और हमारे अधिकारियों पर अभी आरोप ना लगाया जाएं।

पंजाब सरकार ने कहा कि राज्य के अधिकारियों को 7 कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए!

याचिकाकर्ता ने हमारी समिति पर सवाल उठाए थे लेकिन क्या हमें केंद्रीय एजेंसी के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई भी नहीं मिलेगी? SSP को 7 कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। हमें सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया। क्या हमें केंद्र सरकार की समिति से न्याय नहीं मिलेगा? हमें संदेह है कि केंद्र सरकार द्वारा निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। कृपया एक स्वतंत्र समिति नियुक्त करें, और हमें निष्पक्ष सुनवाई का मौका दें।

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राज्य सरकार के मन में भ्रांतियां

इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह नोटिस कोर्ट के आदेश से पहले जारी किए गए थे। राज्य सरकार के मन में भ्रांतियां हैं। इसमें कोई शक नहीं कि इस पूरे प्रोसेस के पालन में गड़बड़ी हुई है और इस पर कोई विवाद नहीं हो सकता। यह तथ्य अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि सुरक्षा में चूक और लापरवाही हुई। ब्लूबुक में साफ है कि सुरक्षा का इंतजाम राज्य पुलिस महानिदेशक की देखरेख में स्थानीय पुलिस करती है। इसमें इंटेलिजेंस डायरेक्टर और CID समेत कई विभागों के इनपुट का योगदान होता है।

साथ ही कहा कि यह पूरी तरह से खुफिया विफलता थी। पंजाब पुलिस के DG को पीएम के काफिले को स्पष्ट सूचना देनी थी। SPG एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। पुलिस अधिकारी जिम्मेदार हैं। यह बहुत गंभीर है कि राज्य उनका बचाव कर रहा है। इसी के चलते केंद्रीय कमेटी बनानी पड़ी। पंजाब के जिम्मेदार अधिकारियों पर एक्शन लेने में कोई हर्ज नहीं। VVIP की सुरक्षा में थोड़ी सी भी चूक गंभीर हो सकती है। राज्य सरकार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रही है, वो अधिकारी कोर्ट के सामने अभी नहीं है। राज्य सरकार उनकी लापरवाही पर पर्दा डाल रही है।

चूक के लिए कौन जिम्मेदार

जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र सरकार से पूछा कि DG और मुख्य सचिव हमारे सामने पार्टी हैं। हम पता लगाएंगे कि चूक के लिए कौन जिम्मेदार है। राज्य और याचिकाकर्ता निष्पक्ष सुनवाई चाहते हैं और आप निष्पक्ष सुनवाई के खिलाफ नहीं हो सकते। तो यह प्रशासनिक और फैक्ट फाइंडिंग जांच आपके द्वारा ही क्यों?

इस पर तुषार मेहता ने कहा, कारण बताओ नोटिस की नींव ब्लू बुक है। जो कहती है कि जिम्मेदारी पुलिस अधिकारियों की थी, नाकाबंदी के बारे में कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई। डीजी को नियमों का पालन करना चाहिए था। नियमों को लेकर कोई विवाद नहीं है।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक कहीं कवरेज की भूख मिटाने का प्रयोजन तो नहीं है, आधिकारिक बयान कहां हैं?

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