साहब! हमने इतना पैसा एकसाथ कभी नहीं देखा

साहब
अरविन्द चतुर्वेदी 
पुलिस अधीक्षक , बाराबंकी

दिनांक 20 जुलाई 2020 समय 11:30 बजे, जनसुनवाई में हताश माँ सीता कश्यप (50 वर्ष), बेटी मधु (20 वर्ष) ने 03 दिन से खाना नहीं खाया।

अपमान और तिरस्कार का दंश झेल रहीं हैं- सब कुछ होने पर भी कुछ नहीं है।
सीता कश्यप ने बताया कि वह पति और बेटी के साथ कई वर्षों से दिल्ली में जे.जे. कॉलोनी, इन्द्रपुरी में रहकर घरों में चौका-बर्तन करती थी और पति सब्जी बेचते थे।
बेटी मधु एक स्पोर्ट्स कम्पनी में काम करती थी।
2019 के अन्त में कुछ ऐसी परिवारिक परिस्थितियाँ बनी कि तीनों को वापस बाराबंकी आना पड़ा।
यहां कालिकाजी पुरम् माल गोदाम रोड पर उनका छोटा सा मकान है, जिसमें उसके दो विवाहित लड़के सपरिवार और एक अविवाहित लड़का रहते हैं, जो ठेलों पर सब्जी बेचने का काम करते हैं।
सीता कश्यप ने बताया कि उसने बड़ी मुश्किल से अपनी बेटी का रिश्ता तय किया था।
लेकिन अचानक उसके पति मनीराम कश्यप को एक ऐसा फितूर सवार हुआ कि जिससे उसका घर टूटने के कगार पर आ खड़ा है ।
उसने बताया कि 20 वर्षीय बेटी को उसका पिता पराया और अवैध बता रहा है।
इस कारण बाप बेटों ने मिलकर हम दोनों को घर से निकाल दिया है ।
उसने बताया कि 20 दिनों से घर के बाहर पॉलीथीन टांग कर माँ बेटी रह रहे हैं।
और पास के आलू गोदाम/कोल्ड स्टोरेज में आलू बीनने का काम कर किसी तरह पेट भर रहे हैं ।
हद तो तब हो गई जब उसने बताया कि चार दिनों से कोल्ड स्टोरेज में काम खत्म हो गया है और वह लोग बेघर होने के साथ-साथ तीन दिन से भूखे भी हैं ।
विडम्बना यह भी थी कि उसके पास दिल्ली का बना राशन कार्ड था, जिस पर बाराबंकी का कोटेदार राशन देने को तैयार नहीं था।
सीता कश्यप के प्रार्थना पत्र पर क्या लिखूं

एक क्षण के लिए पीड़ा से मन उद्वेलित हो गया और मैं स्वयं सोचने लगा कि सीता कश्यप के प्रार्थना पत्र पर क्या लिखूं ।

मेरे लिखने पर स्थानीय पुलिस उसके पति और लड़कों को डाँट फटकार कर उसे घर में घुसा तो सकती है, लेकिन दिलों के बीच आई दरार को पाट नहीं सकती ।

इसके लिए विशेष कर, उसके पति की काउन्सिलिंग की आवश्यकता महसूस हुई ।

उसकी समस्याओं को देखकर मुझे तीन सरकारी विभाग याद आये ।

मैंने जिला प्रोबेशन अधिकारी श्री अनिल मौर्य (8299205872) से सम्पर्क कर केस बताते हुए काउन्सिलिंग और मध्यस्थता करने का आग्रह किया, जो उन्होंने तत्परता से स्वीकार कर लिया।

फिर मैंने जिला समाज कल्याण अधिकारी श्री एस0पी0 सिंह (8874252740) से सीता की बेटी मधु के आगामी दिनों में होने वाले विवाह में सरकारी योजना के तहत पंजीकरण का अनुरोध किया।

उन्होंने बताया कि पंजीकरण के समय शादी का कार्ड होना आवश्यक है, इसलिए आप उन्हें मेरे पास भेज दें ।

मैं उनको ऑनलाइन आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया बता दूंगा और अपना व्यक्तिगत मोबाइल नम्बर देकर उन्हें यथोचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त भी कर दूंगा ।

इसके बाद मैं सीता के खाद्यान समस्या दूर करने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) श्री संतोष विक्रम शाही (9454669377) से सीता को तत्काल सरकारी राशन उपलब्ध कराने के लिए कहा ।

कोविड-19 के दौरान पात्र व्यक्तियों को 30 किग्रा0 राशन देने की योजना चल रही थी।

DSO साहब ने उसे तत्काल राशन उपलब्ध कराने और आगे से दिल्ली में बने राशन कार्ड पर भी राशन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया ।

खाद्यान्न की गंभीर समस्या 

कोविड-19 के मार्च 2020 में प्रभावी होने के बाद सैकड़ों/हजारों की संख्या में प्रवासी कामगार वापस आने लगे थे और बहुत से स्थानीय दैनिक मजदूरों के सामने भी खाद्यान की गम्भीर समस्या पैदा हो गई थी।

मेरे आग्रह पर बहुत से उदारमना मित्रों/सहयोगियों ने मुझे सैकड़ों की संख्या में राशन बैग (5 किग्रा0 आंटा, 3 किग्रा0 चावल, 2 किग्रा0 दाल, 1 किग्रा0 चीनी, 1 किग्रा0 नमक, 1 किग्रा0 तेल, 200 ग्राम चाय की पत्ती, मसाले, बिस्किट के दस डब्बे आदि) उपलब्ध कराये थे।

जिनको PRV-112, स्थानीय पुलिस एवं कार्यालय में आने वाले जरूरतमंदों को सम्मान पूर्वक दिया जा रहा था ।

इसी प्रकार अपने सुहृद श्री मण्डन मिश्र (8238505343) के ITC कम्पनी द्वारा दो बार में लगभग 18 टन आशीर्वाद आटे के 5 किग्रा0 व 10 किग्रा0 का पैक, 75 हजार बिस्किट के पैकेट, 50 हजार सैवलॉन साबुन, 75 हजार चिप्स के पैकेट आदि उपलब्ध कराये गये थे,जिसे जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया गया ।

मैंने अपने स्कोर्ट के ड्राइवर को बुलाया । सीता की समस्या संक्षेप में बताई ।

उसके सामने ही सीता को सम्मानपूर्वक उक्त राशन का एक, पैक 10 किग्रा आटा और कुछ नकद धनराशि भेंट की और स्कोर्ट के ड्राइवर को उन्हें जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी के पास ले जाकर व्यक्तिगत मुलाकात कराने के निर्देश दिए ।

तीनों ही अधिकारियों ने मुझे कॉल बैक करके उनके काम में हुई प्रगति से अवगत भी कराया ।

मैं तीनों ही अधिकारियों की तत्परता और कार्यशैली से प्रभावित हुआ ।

स्कोर्ट ड्राइवर ने लौट कर बताया कि DSO साहब ने महिला को तुरन्त 30 किग्रा0 अनाज दिया और अगले दिन राशन कार्ड लेकर आने की बात कही ।

ड्राइवर ने मुझसे कहा कि साहब हम लोग आपके स्कोर्ट में 12 घण्टे की ड्यूटी कर समय काटते हैं, लेकिन आज पहली बार मुझे भी यह एहसास हुआ कि मैने कोई सार्थक और पुण्य का काम किया है ।

स्वावलंबन का सवाल

शाम को घर लौटा तो मेरे मन में आया कि सीता कश्यप और उसकी बेटी को उपलब्ध कराई गई सहायता से उनका कुछ दिनों का संकट तो दूर हो जायेगा, लेकिन उन्हें जीवन के इस मोड़ पर स्वावलम्बी बनने की आवश्यकता है, जिससे उन्हें अपने घर में सम्मान के साथ उचित स्थान मिल सके ।

रात को मेरे पास मधु का एक व्हाट्सएप मैसेज आया।

मैं उसका मजमून इसलिए साझा नहीं कर रहा कि वह आत्म प्रशंसा की श्रेणी में चला जायेगा, लेकिन सारांश के रूप में यह जरूर कहना चाहता हूँ कि सरकारी व्यवस्था की निस्पृह और समर्पण की भावना से किए गए कामों से पीड़ित के हृदय में जो संतोष और कृतज्ञता के भाव आते हैं, उससे अधिक संतुष्टि सरकारी प्रशंसा पत्र या किसी पुरस्कार से नहीं मिल सकती है ।

अगले दिन मेरे पास जिला प्रोबेशन अधिकारी का कॉल आया और उन्होंने बताया कि सीता और उसके पति एवं लड़कों को बुलाकर विधिवत काउन्सिलिंग की गई है, जिससे अब वह अपनी बेटी के साथ घर में रह सकेगी ।

सीता का घर पुलिस लाइन्स से मुश्किल से 500-700 मीटर दूरी पर है।

मैंने अपने अति उत्साही, विचारवान और सहृदय प्रतिसार निरीक्षक श्री राजकुमार मिश्र (9454402340) को बुलाकर सीता व मधु की स्थिति बताते हुए विमर्श किया कि क्या हम लोग सीता और मधु को पुलिस लाइन्स मेस में दैनिक मजदूरी पर रख सकते हैं ।

आरआई ने बताया कि हाल ही में RTC (रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर) आरम्भ होने वाली है, जिसमें अधिक संख्या में दैनिक मजदूरी पर मानव शक्ति की आवश्यकता होगी ।

मैंने आरआई से मधु से इस सम्बन्ध में बात करने को कहा, लेकिन इस शर्त के साथ कि हम युवा मधु को अकेले मेस में कार्य हेतु नहीं रखेंगे। माँ और बेटी दोनों काम पर आयेंगी ।

अगले दिन आरआई ने माँ-बेटी को पुलिस लाइन्स बुलाकर उनके सामने मेरा प्रस्ताव रखा तो बकौल आरआई उनकी आँखों से खुशी और कृतज्ञता के आंसू बह निकले।

अगले दिन माँ-बेटी ने पुलिस लाइन्स मेस में सबेरे और शाम निर्धारित समय से काम शुरू कर दिया ।

आरआई ने मेस में ही उनके दोनों समय के भोजन की व्यवस्था कर दी, बल्कि बचा हुआ भोजन उन्हें अपने परिवार के लिए ले जाने की अनुमति भी दे दी ।

भारत सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी दर की व्यवस्था लागू हो जाने के बाद अर्द्ध कुशल कर्मी को 9800 रूपये पारिश्रमिक, 2600 रूपये EPF व 600 रूपये पारिवारिक बीमा का मिलता है।

साथ ही वह अपने परिवार के किसी भी सदस्य का सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज करा सकती है।

गत सप्ताह सीता को पहली तन्ख्वाह मिली तो उसके उदगार थे *“साहब हमने इतना पैसा कभी एक साथ देखा ही नहीं था”*।

पहली तन्ख्वाह देने के अवसर पर उसे मिठाई, मधु को सूट का कपड़ा, 10kg आटा देकर सम्मानित भी किया।

अब वे मेस के काम को भलीभांति समझ गई हैं, इसलिए इस माह से दोनों को अलग-अलग मस्टर रोल पर रखा गया है, जिससे अगले महीने उनकी आमदनी दोगुनी हो जायेगी।

एक जरूरतमंद को सम्मान और हौसला देकर स्वावलम्बी बनाने में जिन-जिन महानुभावों का योगदान रहा है, उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूँ और भविष्य में भी इसी चेतना, ऊर्जा और समर्पण से काम करते रहने की कामना करता हूँ।

यदि हमारे सुहृद पाठक इन अधिकारियों के उत्साहवर्धन के लिए उन्हें एक कॉल कर सकें तो आभारी होऊँगा ।