बीज सत्याग्रह यात्रा : हाइब्रिड धान में बीमारियाँ, देसी धान रोग रहित

देसी बीजों को स्थानीय स्तर पर संग्रहित कर बीज बैंक बनाने का विचार

बीज सत्याग्रह के दौरान बस्ती ज़िले में देखा गया कि हरित क्रांति के प्रभाव के वशीभूत होकर भारतीय किसानों ने एकल (मोनोकल्चर) खेती को अपनाया और इसके दुष्परिणाम आज सब तरफ देखे जा रहे हैं। देसी धान के खेत रोग रहित हैं परन्तु हाइब्रिड धान वाले खेत में कंडुआ नामक बीमारी चारों तरफ फैली हुई है।एक रिपोर्ट।

बीज सत्याग्रह यात्रा के सातवें दिन बस्ती जिले के सीताराम पुर ग्राम पहुँची। सुबह 6 बजे खेतों के भ्रमण के दौरान देसी धान की कई प्रजातियों व हाइब्रिड धान की प्रजातियों के निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि देसी धान के खेत रोग रहित हैं परन्तु हाइब्रिड धान वाले खेत में कंडुआ नामक बीमारी चारों तरफ फैली हुई है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि यहाँ के कृषि वैज्ञानिक भी बताते हैं कि यह लाइलाज बीमारी है। रासायनिक कीटनाशकों का बेहताशा छिड़काव ही इसका इलाज है। जैविक खेती विशेषज्ञ दरबान सिंह नेगी ने इस तरह के की बीमारियों से बचने का उपाय देसी बीजों के द्वारा खेती है।

उन्होंने जैविक कीटनाशकों के निर्माण की कई विधियों को वहाँ के किसानों से साझा किया जो इस तरह के रोगों की रोकथाम के लिए कारगर हैं। विजयादशमी के दिन सीतारामपुर में हुई इस बैठक में गोरखपुर, देवरिया, अयोध्या व बस्ती के किसानों ने यात्रा का स्वागत किया।

किसानों से बातचीत करते हुए जैविक खेती विशेषज्ञ दरबान सिंह नेगी ने खेती में बहुराष्ट्रीय निगमों के मकड़जाल को विस्तार से किसानों से साझा किया। हरित क्रांति के प्रभाव के वशीभूत होकर भारतीय किसानों ने एकल (मोनोकल्चर) खेती को अपनाया और इसके परिणाम आज सब तरफ देखे जा रहे हैं।

भूमि की उर्वरा शक्ति लगातार कम होती जा रही है। हम जैव विविधता आधारित खेती को अपनाकर भूमि की उर्वरा शक्ति को और अपने स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते हैं। उन्होंने किसानों के खेती सम्बन्धी सवालों के जवाब देते हुए फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों की रोकथाम के लिए जैविक कीटनाशक, रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक उर्वरकों को बनाने के तरीकों भी बताया।

बीज सत्याग्रह यात्रा के उद्देश्यों को साझा करते हुए स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा कि जैव विविधता आधारित खेती बिना देसज बीजों के सम्भव नहीं है। इसके लिए देसी बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन की जरूरत है। जैव विविधता आधारित खेती एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें मानव के साथ ही साथ सभी प्राणियों और जल, जंगल, जमीन, हवा, पानी सभी को पोषण का समान अवसर मिलता है।

हमें यह बिलकुल नहीं भूलना चाहिए कि स्वराज का विचार व रास्ता सिर्फ मानव को ध्यान में रखकर नहीं अपनाया जा सकता है। स्वराज एक समग्र चेतना है जिसमें जड़ व चेतन दोनों ही शामिल हैं। स्वराज वह भावना है जिसमें स्वयं से पहले दूसरे के जीवन की बात हो। आज हम सभी के लिए यह संयोग ही है कि विजयादशमी के दिन यह विचार हम लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत कर रहे हैं।

नीरज उपाध्याय ने देसी बीजों को स्थानीय स्तर पर संग्रहित कर बीज बैंक बनाने का विचार रखा और कहा कि यह बैंक स्थानीय स्तर पर कार्य करे जिससे आसपास के किसान लाभान्वित हो सकें। किसानों ने आग्रह किया कि जैव विविधता आधारित खेती को ध्यान में रखकर एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाय।

बैठक में वशिष्ठ उपाध्याय, सत्यांक प्रकाश उपाध्याय, पवन उपाध्याय, संजय त्रिपाठी, गंगा शरण, रंगीलाल,अनुराग दुबे, प्रदीप उपाध्याय, लक्ष्मीकांत चौबे, उमाकांत चौबे, विजय उपाध्याय, रामफेर, गजाऊ, रामयज्ञ चौधरी, कीरत, धीरज, सरस्वती प्रसाद प्रसाद उपाध्याय समेत कई किसान सम्मिलित हुए।

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