महामारी काल में प्राण शक्ति को कैसे सम्हालें ?

Epi-10                  13 May 20

कोविड महामारी के कारण दुनिया पर प्राण संकट छाया हुआ है। आयुर्वेद में प्राण तत्व की चर्चा भी की गयी है,इसलिए आज महामारी काल में प्राण शक्ति को सम्हालने कर रखने पर परिचर्चा करते हुए आयुर्वेद विशेषयों ने बताया कि जीवन का सृजन ही प्राण शक्ति से शुरु होता है।यही शक्ति जीव के शरीर को आकार व स्वरूप देती है।जन्म के बाद अन्न-जल व वायु से प्राण पोषित होता है। शरीर में प्राण का स्थान सिर,फेंफड़ो,व हृदय में होता है ।जिनके रुग्ण होने से प्राण संकट उत्पन्न हो जाता है।नाक से लेकर फेंफड़ो को प्राणवह स्रोत कहा गया है। वर्तमान महामारी कोरोना काविड-19 प्राणवह स्रोत को संक्रमित करता है।इसलिए इस महामारी से प्राणसंकट उत्पन्न हो जाता है।प्राणवह स्रोत अर्थात श्वास मार्ग की सुरक्षा व मजबूती का उपाय आवश्यक है।इसके लिए योग, प्राणायाम तथा पोष्टिक,सुपाच्य भोज करना चाहिए।

इस विषय पर विशेषज्ञो नें आगे बताया कि श्वास तंत्र में वात-पित्त-कफ की विषता से संक्रमण की संभावना होती है,इसके लिए नाक में शुद्ध सरसो का तेल,औषधिय तैल जैसे अणु तेल,षडबिन्दु तेल का प्रयोग करना चाहिए।ठंडी वस्तु,व जल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

इस चर्चा में विशेषज्ञों ने बुन्देल खण्ड,पूर्वी उत्तर प्रदेश,बिहार व राजस्थान के कोविड संक्रमण की भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्ति किया ।

इस चर्चा में जोधपुर से भारतीय चिकित्सा परिषद् के पूर्व अध्यक्ष डॉ वेद प्रकाश त्यागी, दिव्य चिकित्सा केन्द्र पनगरा बाँदा से डॉ मदन गोपाल बाजपेयी, ईस्टर्न साइंटिस्ट शोधपत्रिका के सम्पादक डॉ आर.अचल के साथ अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी ने भाग लिया ।

 

रामदत्त त्रिपाठी

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक , सामाजिक कार्यकर्ता , विधिवेत्ता  और सूचना संचार के विशेषज्ञ हैं. 

Dr. Ved Prakash Tyagi

Former President-CCIM,Central Council of Indian Medicine, New Delhi a Statutory 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी

आयुष ग्राम चित्रकूट , बाँदा , पूर्व उपाध्यक्ष भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तर प्रदेश,

  डॉ.आर.अचल

   आयुर्वेद चिकित्सक

मुख्यसंपादक-ईस्टर्न साइन्टिस्ट जर्नल,क्षेत्रीय संपादक-साइंस इण्डिया मासिक(भोपाल),

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