मिर्च का अचार जैसे सुर्ख लाल ओढ़नी में मेनकाएं

ड़ा मुदिता तिवारी

ड़ा मुदिता तिवारी, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, प्रयागराज 

तेज़ी से बेस्वाद होती जा रही
इस साइबर-मशीनी दुनिया में
आख़िर में
आड़े वक़्त की तरह
काम आएगा
कोई अचार
प्रयागराज अभी इतना मशीनी नहीं हुआ इसलिए घर – घर में मिल जाएगा आपको कई – कई किस्म का अचार ।
जैसे पान के पत्तों को नज़ाकत से फेरा जाता है ऐसे ही नज़ाकत से फेरे जाते हैं ये लाल दिलकश मिर्च । कई दिनों धूप में हिफाज़त से उल्टे पुल्टे जाते हैं । भास्कर के चुम्बनों के ताप और फागुन की बौराई हवा के आलिंगन की झडियों  से जब सख्त लाल मिर्च नर्म पड़ जाते हैं तब ‘स्त्रीलिंग’ हो जाते हैं और खोल देते हैं खुद को आपका देय स्वीकार करने को । जैसे पान में महंगा किमाम घुलता है वैसे ही सुर्ख लाल कलेवर में जज़्ब होता है  दिलकश सौंफ , सोंधी खुशबू का धनिया , लज्जतदार भुना जीरा ,घर को गमकाने वाला हींग , पाचक मेथी ,नायिका के तिल सा कातिल मंगरैल ,चटखारे देने वाला अमचुर । और हां ,समंदर से नहा कर निकले नमक से ही तो यह नमकीन होता है ।
 घंटों सींक से गुदवा कर जब यह महिलाओं के कंधों और कमर की ऊर्जा और हाथों का रस खींच लेती है तब अंगड़ाई लेकर ऐंठी इस लाल मिर्ची का  पीली सरसों के तेल से स्नान कराया जाता है । इस स्नान के बाद यह धूप में कई दिन शयन करने विराजती है।
 सन बाथ से जैसे – जैसे देह गहराने लगेगी  रसास्वादन के लिए भी लोग लालायित होने लगेंगे ।उधर यह  रसिकों की आंखों और जीभ की तड़प को अनदेखा किए लेटी ही रहेगी । आखिरकार वह दिन आएगा जब सख्त कायदे-कानून के साथ वह भंडारगृह में प्रवेश करेगी । भगवान को छूने जितने कानून अगर किसी और के लिए इस दुनिया में बने हैं तो वो इसी के लिए । गंदे-संदे, जूठे हाथों और उन पांच दिनों में बरनी न छूने देने के सख्त प्रावधानों की लक्ष्मण रेखा को खींचकर औरतें निश्चिंत होती हैं । पति के दिल का दरवाज़ा उनके पेट से खुलता है ।इसीलिए इन्द्र की तरह औरतें भी तैयार करती है सुर्ख लाल ओढ़नी में मेनकाएं ।
लड़कियों के लिए वह लाल ओढ़नी वाली पक्की सहेलियां बन जाती है।अमीर बच्चों के लिए बन जाती हैं वो सब्ज़ी निगलवाने का सम्मोहन तो गरीब के टिफिन का  एकमात्र ज़ायका । मेहमाननवाजी इनके बिना अधूरी है ।सौ बात की एक बात कहूं तो ये एक सुशील वधू की तरह सबकी ज़रूरत बन जाती हैं । करेले जैसा नकचढ़ा भी इनका सम्पर्क पाकर नर्म हो जाता है और कलौंजी बन जाता है ।

लेखिका डॉ मुदिता तिवारी , आर्य कन्या डिग्री कॉलेज ,  प्रयागराज, सम्बद्ध इलाहाबाद विश्व विद्यालय के  हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। 

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