आरक्षण के मामले में बीजेपी की क्या है रणनीति, पोल खोल रहे हैं राजभर

जब गरीब सवर्ण को आरक्षण देना हुआ तो भारतीय जनता पार्टी ने 72 घंटे में उन्हें 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया। इसके लिये न कोई पत्राचार हुआ और न ही कोई कमीशन बैठाया गया, लेकिन जब बात पिछड़े समाज के निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, पाल, कश्यप, प्रजापति, चौहान, कुम्हार, नाई, मांझी, मंझवार... इनको आरक्षण देने के लिये, जो बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में व्यवस्था दिया है कि विधानसभा से प्रस्ताव पास हो, फिर विधान परिषद में, फिर लोकसभा में, फिर राज्यसभा में, तब आरजीआई के पास जाये।

यूपी में 17 पिछड़ी जातियों को आरक्षण का मामला

अभी विगत 17 दिसंबर को निषाद पार्टी की तरफ से आंदोलन आरक्षण को लेकर के, गृहमंत्री अमित शाह को, रमाबाई अंबेडकर मैदान में बुलाया गया और पूरे प्रदेश के आरक्षण चाहने वाले पिछड़े समुदाय के लोग वहां पहुंचे, लेकिन अमित शाह ने वहां आरक्षण पर चर्चा ही नहीं की, जिससे लोग नाराज हो गये और नारेबाजी करने लगे कि आरक्षण नहीं, तो वोट नहीं।

यूपी की राजनीति में जाति समीकरण को हमेशा से ही खास माना जाता रहा है। ऐसे में ​बीते दिनों अमित शाह की एक रैली में जब लोग आरक्षण पाने की उम्मीद में पहुंचे, तो उन्होंने खुद को ठगा सा महसूस किया। इस दौरान काफी हंगामा भी हुआ। विपक्ष ने भी इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लिया और उसकी जमकर किरकिरी की।

इस मामले पर सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने इसे केवल बीजेपी की वोट पाने की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी अगर वाकई आरक्षण देना चाहती तो 72 घंटे के अंदर दे सकती थी, लेकिन यहां वह आरक्षण के नाम पर केवल लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, और कुछ भी नहीं। इस मामले में राजभर ने और भी बहुत कुछ विस्तार से बताया, आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा…

जब गरीब सवर्ण को आरक्षण देना हुआ तो भारतीय जनता पार्टी ने 72 घंटे में उन्हें 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया। इसके लिये न कोई पत्राचार हुआ और न ही कोई कमीशन बैठाया गया, लेकिन जब बात पिछड़े समाज के निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, पाल, कश्यप, प्रजापति, चौहान, कुम्हार, नाई, मांझी, मंझवार… इनको आरक्षण देने के लिये, जो बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में व्यवस्था दिया है कि विधानसभा से प्रस्ताव पास हो, फिर विधान परिषद में, फिर लोकसभा में, फिर राज्यसभा में, तब आरजीआई के पास जाये।

अभी विगत 17 दिसंबर को निषाद पार्टी की तरफ से आंदोलन आरक्षण को लेकर के, गृहमंत्री अमित शाह को, रमाबाई अंबेडकर मैदान में बुलाया गया और पूरे प्रदेश के आरक्षण चाहने वाले पिछड़े समुदाय के लोग वहां पहुंचे, लेकिन अमित शाह ने वहां आरक्षण पर चर्चा ही नहीं की, जिससे लोग नाराज हो गये और नारेबाजी करने लगे कि आरक्षण नहीं, तो वोट नहीं। वहां हजारों कुर्सियां तोड़ी गयीं। विरोध पूरे प्रदेश में चरम पर हो गया। उसी को देखते हुये भारतीय जनता पार्टी ने एक ड्रामा शुरू किया है।

इन्होंने संजय निषाद से मुख्यमंत्री के नाम एक चिट्ठी लिखवाई कि आप आरजीआई को इस बाबत पत्र लिखें। अब सीएम आरजीआई को आरक्षण को लेकर खत लिख रहे हैं जबकि आरजीआई ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही यह हलफनामा दे रखा है कि जब तक विधान परिषद, विधान सभा, लोकसभा और राज्य सभा से पास होकर कोई भी विधेयक हमारे पास नहीं आयेगा, तब तक हम किसी भी जाति को किसी विशेष श्रेणी में क्रमबद्ध नहीं कर सकते। लेकिन यह भारतीय जनता पार्टी आरक्षण के नाम पर गुमराह करके सिर्फ वोट लेने की कवायद कर रही है।

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पूर्वांचल के करीब 25 से 27 सीटों पर प्रभाव रखने वाले राजभर ने यह कहा है कि उत्तर प्रदेश की सारी सड़कें लखनऊ में मिलती हैं, ऐसे में भले अभी रथ अलग-अलग होंगे, लेकिन सभी के रथ लखनऊ में आकर मिल जाएंगे.

ये पत्राचार सिर्फ इस नाते कर रहे हैं कि आचारसंहिता लग जायेगी, तब फिर ये झूठ बोलना शुरू करेंगे कि भाई अब आचारसंहिता लग गई है तो अब आप हमें वोट दीजिये तो आगे हम आपको आरक्षण देंगे। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक डबल इंजन की सरकार इनकी है, लेकिन आगे इनका सिर्फ लोगों को गुमराह कर करके वोट देने की कोशिश है।

आरक्षण के लिये कुल 17 जाति के लोग जो आंदोलित हैं, उनसे मैं कहूंगा कि बीजेपी के पत्राचार खेल से गुमराह नहीं होइयेगा। अगर बीजेपी वाकई आपको भी आरक्षण देना चाहती है तो ठीक उसी तरह से 72 घंटे के अंदर दे, जैसे कि पिछड़े सवर्णों को दिया है, तब तो हम मानेंगे कि हां, वाकई में उन्होंने हमें आरक्षण दिया वरना हम समझ सकते हैं कि पत्राचार के माध्यम से यह आचारसंहिता तक मामले को केवल धकेलने की कोशिश हो रही है, और कुछ भी नहीं।

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