ऐसा क्या हुआ कि राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया?

यशोदा श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार

यशोदा श्रीवास्तव

लखनऊ. राजस्थान गहलोत सरकार में आखिर ऐसा क्या हुआ कि अभी कुछ रोज पहले राज्यसभा के चुनाव में पायलट समेत पूरी की पूरी कांग्रेस एक थी जिसका नतीजा था कि राज्यसभा की तय दोनों सीटें कांग्रेस जीतने में कामयाब हुई.इस चुनाव को लेकर भी तमाम कयास लगाए जा रहे थे.तो फिर कुछ ही दिन बाद ही ऐसा क्या हुआ कि राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया?

इस संबंध में पूर्व विधायक व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ईश्वर चंद शुक्ल कहते हैं कि इसमें कुछ भी नया नहीं है. बीजेपी ने तो ऐलानिया तौर पर कहा है कि वे आपदा को अवसर में बदलने में माहिर हैं. वे कोरोना से निपटने में तो रहे लेकिन कांग्रेस को निपटाने की पूरी ताकत झोंक रहे हैं. कोरोना काल में ही बीजेपी ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराकर सत्ता लूटी तो इसी वक्त वे राजस्थान में भी खेल शुरू कर दिए जहां उन्हें मुंहकी खानी पड़ी.

वे कहते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि मध्यप्रदेश के ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान के सचिन पायलट को क्या दिक्कत थी लेकिन इतना जरूर कहुंगा कि दोनों के पिताओं ने कांग्रेस को मजबूत बनाने में कितना मेहनत किया.कमसेकम दोनों को ही उस वृक्ष की टहनियों को नहीं काटना चाहिए जिसको उनके पिताओं ने पानी नहीं अपने खून पसीने से सिंचित किया हो.

राजस्थान मसले पर अपनी बात रखते हुए पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री व कांग्रेस नेता नर्वेदश्वर शुक्ल कहते हैं कि सिंधिया हों या सचिन यदि ये नाराज थे बावजूद इसके केंद्रीय नेतृत्व इनसे नहीं मिल रहा था तो इसके पीछे जरूर कोई कारण होगा.इसपर टीका टिप्पणी व्यर्थ है. हां यह जरूर कहना चाहूंगा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की इस सोच और सिंधिया, सचिन जैसों की नाराजगी को हवा देकर बीजेपी आपदा को अवसर में बदलने की अपनी सोच को चरितार्थ करने में कामयाब हुई.उन्होंने कहा कि हैरानी है कि हाल में जो लोग नाराज हुए,कांग्रेस ने उन्हें वह सब कुछ तब दिया जब राजनीति में उनके दूध के दांत नहीं टूटे थे.और सिर्फ इसलिए कि ये बड़े बाप के बेटे थे ही,निस्संदेह इनके पूर्वजों ने कांग्रेस के लिए बहुत कुछ किया भी था.लेकिन बदले में इन औलादों को कांग्रेस ने कम नहीं दिया.

मध्यप्रदेश हो या राजस्थान, दोनों ही मामलों में कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद पांडेय की टिप्पणी काबिलेगौर है. उन्होंने कहा पहले एमपी फिर राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अपदस्थ करने और करने की कोशिश के पीछे बीजेपी को तेजी से गिरतीअपनी  साख को लेकर बौखलाहट है. यह बताने की जरूरत नहीं की कोरोना को लेकर केंद्र सरकार के एक से एक फैसले जनता के हितों पर चोट पंहुचाने वाले रहे हैं. इसे लेकर बीजेपी परेशान है. अब अपनी साख का पाखंड करने के लिए वह कांग्रेस शासित प्रदेशों को निशाना बना रही है. षडयंत्र करके उसे अपदस्थ किया जा रहा है. इसके पीछे बीजेपी की मंशा यह साबित करने की है कि जनता में उसकी लोकप्रियता चरम पर है और इसका यह उदाहरण है कि कांग्रेस शासित सरकारों के विधायक तक भाजपा की सरकार बनाने पर अमादा हैं? लेकिन सच तो यह नहीं है. गैर बीजेपी सरकारों को लूटने की इतनी जल्दी है कि वह सरकार को होपलेस करने की नियत से मुख्यमंत्री के करीबियों के यहां ईडी,आईटी के छापे तक डलवा रही है.

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