पंजाब में रेल सेवा पूरी तरह बंद, पांच थर्मल पावर प्‍लांट ठप

पंजाब किसान और राज्‍य सरकार के बीच वार्ता विफल होने के बाद शुक्रवार काे भी किसान कई जगहों पर निजी थर्मल पावर प्‍लांट की ओर जाने वाले रेल ट्रैक पर जमे हुए हैं. इससे राज्‍य में मालगाडि़यों का परिचालन बंद है और रेल सेवा पूरी तरह ठप है. ऐसे में पावर प्‍लांटों को कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है और उनमें बिजली उत्‍पादन बंद हो गया है. इस कारण पंजाब में पूरी तरह‍ पावर ब्‍लैक आउट होने का खतरा पैदा हो गया है.

राज्य के पांचों थर्मल पावर प्लांटों बंद, गहराएगा बिजली संकट

राज्य में किसान आंदोलन के कारण मालगाडिय़ां न चलने से राज्य के पांचों थर्मल पावर बंद हो गए हैं. सरकारी और पब्लिक सेक्टर के पांचों थर्मल प्लांट कोयले की कमी के कारण प्लांटों में बिजली उत्पादन नहीं हो रहा है.

राज्य में बिजली की डिमांड को पूरा करने के लिए पावरकाम नेशनल ग्रिड से रोजाना 60 करोड़ रुपये की बिजली खरीद रहा है. पावरकाम को रोजाना करीब एक हजार मेगावाट बिजली की खरीद करनी पड़ रही है.

पावरकाम रोजाना नेशनल ग्रिड से खरीद रहा 60 करोड़ की बिजली

कोयले का स्टाक नहीं होने से राज्य के सरकारी रोपड़ व लहरा मोहब्बत थर्मल प्रोजेक्ट के अलावा प्राइवेट सेक्टर के राजपुरा, तलवंडी साबो और गोइंदवाल साहिब के थर्मल पावर प्लांटों की सभी यूनिटों में बिजली उत्पादन बंद है. वीरवार को राज्य में बिजली की मांग करीब 5670 मेगावाट रही. थर्मल पावर प्लांट बंद रहने के कारण बिजली सप्लाई की निर्भरता हाइडल पावर प्रोजेक्टों और नेशनल ग्रिड पर बढ़ गई है.

प्राइवेट सेक्टर के राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्रोजेक्टों में तो कोयला स्टाक पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, जबकि गोइंदवाल साहिब प्लांट में फिलहाल ढाई दिन, रोपड़ प्लांट में करीब छह, लहरा मोहब्बत पावर प्लांट में चार दिन के कोयले का स्टाक है. पावरकाम के मुताबिक पावर सप्लाई की डिमांड नेशनल ग्रिड से बिजली खरीद कर की जा रही है.

मंत्रियों और किसानों के बीच हुई वार्ता विफल

बता दें कि वीरवार को भारतीय किसान यूनियन उगराहां और पंजाब के मंत्रियों के बीच रेलवे ट्रैक खाली करने को लेकर हुई बैठक विफल रही. भाकियू उगराहां ने निजी थर्मल प्लांटों को जाने वाले रेलवे ट्रैक से धरने हटाने के लिए मंत्रियों की अपील को ठुकराते हुए कहा कि उनका संगठन भाजपा नेताओं व कारपोरेट घरानों के संस्थानों का घेराव जारी रखेगा.

निजी थर्मल प्लांट जाने वाले रेल ट्रैक रहेंगे जाम

कैबिनेट मंत्रियों तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, सुखविंदर सिंह सरकारिया, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कैप्टन संदीप संधू व विधायक कुलजीत सिंह नागरा ने भाकियू उगराहां के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. उन्होंने रेलवे ट्रैक खाली करने की अपील करते हुए कहा कि थर्मल प्लांटों में कोयला न जाने के कारण पंजाब को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है.

30 किसान संगठनों में शामिल

यूनियन प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां और महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा कि सभी रेलवे ट्रैक खाली हैं, केवल निजी थर्मल प्लांटों को जाने वाले ट्रैक पर धरना लगा हुआ है. अगर सरकार चाहती है कि राजपुरा व मानसा के निजी थर्मल प्लांट चालू हों तो सरकार इनका संचालन खुद करे. अन्यथा वह ट्रैक खाली नहीं करेंगे. उन्होंने यह मांग भी की कि किसान आंदोलन के दौरान जिन किसानों की मौत हुई है उनके परिवारों को सरकारी नौकरी व दस लाख रुपये मुआवजा देने के अलावा उनका सारा कर्ज माफ किया जाए. उन्होंने कहा कि संघर्ष अब चरम पर पहुंच गया है और केंद्र सरकार संघर्ष को नाकाम करना चाहती है.

रेलवे ने कहा, अगले आदेश तक पंजाब में नहीं चलेंगी मालगाडिय़ां

बैठक के बाद सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि किसान नेताओं ने आज यूनियन की बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा करने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल दो थर्मल प्लांटों के रेलवे ट्रैक पर ही धरने लगे हैैं और मालगाडिय़ां न चलाकर केंद्र सरकार पक्षपात पूर्ण रवैया अपना रही है.

23 जगह प्लेटफार्मों पर डटे हैैं किसान

भाकियू उगराहां पंजाब के 30 किसान संगठनों के संघर्ष में शामिल है लेकिन अलग मोर्चा खोलकर राजपुरा व मानसा में रेलवे ट्रैक पर धरना लगाया हुआ है. अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी दिन के समय जंडियाला गुरु में रेलवे ट्रैक पर धरना दे रही है. जबकि प्रदेश के 23 विभिन्न रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर भी किसान कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे हैैं.

कृषि बिलों को लेकर कैप्टन चार को राष्ट्रपति से मिलेंगे  

पंजाब विधानसभा द्वारा पास किए गए कृषि बिलों को मंजूरी देने की मांग को लेकर विधायकों का शिष्टमंडल चार नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेगा. इस शिष्टमंडल का नेतृत्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमङ्क्षरदर ङ्क्षसह करेंगे. मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से मिलने जाने के लिए सभी पार्टियों के विधायकों से अपील की है. कैप्टन ने सभी विधायकों को राज्य के हितों की रक्षा के लिए खड़े होने और पार्टी हित से ऊपर उठने की भी अपील की है.

राष्ट्रपति से मिलने की घोषणा मुख्यमंत्री ने 20 अक्टूबर को राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को विधानसभा में पास हुए बिलों की कापी सौंपने के दौरान ही कर दी थी. इस दौरान उनके साथ विपक्षी पार्टियों के विधायक भी थे. हालांकि राज्यपाल से मिलने के बाद विपक्षी दलों खासकर शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी के तेवर अब बदल गए हैं. वे सभी कैप्टन सरकार के इस बिल को जनता के साथ धोखा बता रहे हैं. ऐसे में विपक्ष का मुख्यमंत्री के साथ जाने पर संदेह पैदा हो गया है.

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