उत्तर प्रदेश में श्रम क़ानूनों में संशोधन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

लखनऊ 23 अगस्त 2020: उत्तर प्रदेश विधानसभा व विधान परिषद में बिना वोटिंग कराए हुए ही उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक 2020, उत्तर प्रदेश कारखाना अधिनियम संशोधन विधेयक 2020, उत्तर प्रदेश कतिपय श्रम विधियों में अस्थाई छूट संशोधन विधेयक 2020 और लोक संपत्ति व निजी संपत्ति विधेयक 2020 को पास कराए जाने के विरोध में आज वर्कर्स फ्रंट ने पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया. 

यह जानकारी देते हुए उन्होंने कहा  की योगी सरकार कारपोरेट की सरकार है. इस सरकार ने श्रम कानूनों में जो संशोधन किया है यह उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को अवरुद्ध करने का काम करेगा और प्रदेश में औद्योगिक अशांति को बढ़ावा देगा. उन्होंने कहा कि मजदूर संगठन ही नहीं देश के कुछ एक उद्योगपतियों तक ने सरकार को आगाह किया था कि श्रमिकों के हित में बने हुए कानूनों को खत्म करने से देश में औद्योगिक विकास में बाधा उत्पन्न होगी. दुनिया में जहाँ भी श्रम कानूनों को कमजोर किया गया है वहाँ बडे़ नुकसान उठाने पडे हैं.

उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के बाद दरअसल उत्तर प्रदेश में सेफ्टी वाल्व के बतौर काम कर रहे श्रम विभाग को जो न्यूनतम अधिकार हासिल थे वह भी समाप्त कर दिए गए हैं और मजदूरों के हितों पर बड़ा कुठाराघात किया गया है. योगी सरकार ने हाईकोर्ट में हारने के बाद इन विधेयकों को लाने का फैसला किया है. इसकी वैधानिकता की जांच कराई जाएगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो उन्हें हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी. 

उन्होंने सभी मजदूर संगठनों से अपील की कि वह एकजुट हों और आरएसएस और भाजपा की योगी सरकार की इस मजदूर विरोधी गतिविधियों के खिलाफ अपना प्रतिवाद दर्ज करायें .

वर्कर्स फ्रंट द्वारा आयोजित विरोध कार्यक्रमों का नेतृत्व सोनभद्र में कृपाशंकर पनिका, ठेका मजदूर यूनियन के मंत्री तेजधारी गुप्ता, तीरथ राज यादव, पूर्व सभासद नौशाद, पूर्व सभासद मारी, आगरा में इंजीनियर दुर्गा प्रसाद, लखनऊ में मोहम्मद कय्यूम, नेवाजी, बाराबंकी में यादवेंद्र प्रताप सिंह और मऊ में बुनकर वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष इकबाल अंसारी ने किया.

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