औश्वीत्ज़ यातना शिविर की खौफनाक दास्तान

पोलैंड में औश्वीत्ज़ जर्मनों द्वारा बनाए यातना कैंपों में से सबसे बड़ा है।1939 में पोलैंड पर क़ब्ज़ा करने के बाद हिटलर ने औश्वीत्ज़ के पास यातना शिविर बनवाया।

आंद्रेज पेलेत्स्की सन् 1941में  औश्वीत्ज़ यातना शिविर में कैदी नंबर 4859 था। लेकिन 1990s के दशक में ज़ोफिया और आंद्रेज पेलेत्स्की को पता चला कि उनके पिता वास्तव में एक बहादुर हीरो थे।

अधिक जानकारी के लिये पढ़ें:

https://www.independent.co.uk/news/world/europe/nazis-auschwitz-volunteer-holocaust-witold-pilecki-a9302581.html

युद्ध बाद पोलैंड में जब वे दोनों किशोर थे तो उन्हें बताया गया था कि उनके पिता एक देशद्रोही और देश के दुश्मन थे। स्कूल के रेडियो पर वे अपने पिता पर सन् 1948 में चले मुकदमे और उन्हें दी गयी फांसी के बारे में सुनते आये थे।

जब कि सच तो यह था कि वे पोलैंड के प्रतिरोध लड़ाकू थे जो स्वेच्छा से औश्वीत्ज़ गये थे ताकि वहां प्रतिरोध शुरू किया जा सके।वे वहां से मित्र राष्ट्रों की सेना को गुप्त संदेश भेजते थे। उन्हीं के संदेशों के कारण औश्वीत्ज़ यातना शिविर में चल रहे खौफनाक खेल के बारे में संसार को जानकारी मिली।

औश्वीत्ज़ 75 वर्ष पहले मुक्त हुआ था।हाल में प्रकाशित पुस्तक The Volunteer: One Man, an Underground Army, and the Secret Mission to Destroy Auschwitz,” में पूर्व युद्ध संवाददाता जैक फेयरवेदर ने उस हीरो के बारे में रहस्योद्घाटन किया है।

सन् 1933 में जर्मनी की सत्ता पर जब एडोल्फ हिटलर काबिज हुआ तो उसने वहां एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की  जिसमें यहूदियों को इंसान से नीचे करार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया। 

यह भी पढ़ें:

https://www.google.co.in/amp/s/www.bhaskar.com/amp/news/INT-adolf-hitlers-torture-on-jewish-in-auschwitz-camp-polland-4886292-PHO.html

यहूदियों के प्रति हिटलर की इस नफरत का नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया, यानी समूचे यहूदियों को जड़ से खत्म करने की सोची-समझी और योजनाबद्ध कोशिश।

होलोकास्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे। इस दौरान कई यहूदी अपनी जान बचाकर देश छोड़कर भाग गए, तो कुछ यातना शिविरों में क्रूरता के चलते तिल-तिल मरे। इस दौरान औश्वीत्ज़ नाजी यंत्रणा कैंप यहूदियों का खात्मा करने की नाजियों की हत्यारी रणनीति का प्रतीक बन गया था।

पोलैंड में नाजी कैंप औश्वीत्ज़ को 70 साल पहले 27 जनवरी को आज़ाद कराया गया था। 

इतिहास के पन्नों में कई हादसे, कई त्रासदियाँ दर्ज हैं लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाज़ियों के अधीन जो कुछ हुआ वैसी त्रासदी इतिहास ने शायद पहले कभी नहीं देखी थी।

विस्तृत विवरण के लिये पढ़ें:

https://www.google.co.in/amp/s/www.bbc.com/hindi/multimedia/2010/01/100112_nazi_camps_va.amp

पोलैंड में बसा औश्वीत्ज़ जर्मनों द्वारा बनाए यातना कैंपों में से सबसे बड़ा नेटवर्क है।1939 में पोलैंड पर क़ब्ज़ा करने के बाद हिटलर ने 1940 में औश्वीत्ज़ के पास यातना शिविर बनवाया।

लोहे के जिस गेट से आप यातना शिविर के अंदर आते हैं उस पर लिखा है- आपका काम आपको आज़ादी दिलवाता है।लेकिन उस दौरान जो क़ैदी इस गेट के अंदर लाए गए उनमें से ज़्यादातर हमेशा-हमेशा के लिए ग़ुलाम हो गए।मौत ही उन्हें आज़ाद करवा पाई।

पंकज प्रसून
पंकज प्रसून वरिष्ठ पत्रकार

पंकज प्रसून वरिष्ठ पत्रकार

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