चितकबरी कोयल को ट्रैक करेंगे पर्यावरणविद, जलवायु परिवर्तन की रिसर्च को मिलेगी नई दिशा

नई दिल्ली. देश के बहुप्रतिष्ठित संस्थान वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग ने मिलकर एक नई रिसर्च शुरू की है। उन्होंने मानसून में अफ्रीका से उड़कर भारत आने वाली चितकबरी कोयल को ट्रैक करने की कवायद शुरू की है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस प्रयास से जलवायु परिवर्तन की रिसर्च को एक नई दिशा मिलेगी। इसके लिए कोयल के भीतर एक सैटेलाइट ट्रांसमीटर भी लगाया गया है। यह ट्रांसमीटर अमेरिका की एक कंपनी माइक्रोवेव टेलीमेट्री द्वारा विशेष रूप से वाइल्डलाइफ ट्रैकिंग के लिए बनाया जाता है।

जानकारी के मुताबिक यह देश में अपनी तरह की पहली और अनोखी रिसर्च है, जिसे जलवायु परिवर्तन के गूढ़ रहस्यों को जानने के लिए शुरू किया गया है।

वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक सुरेश कुमार का मानना है कि ये चिड़िया प्रतिवर्ष बार-बार एक ही लोकेशन पर वापस आती हैं। यह अफ्रीका से उड़कर हिमालय की तलहटी में आती हैं, लेकिन अभी तक यह नहीं पता लग सका है कि यह वास्तव में अफ्रीका के किस क्षेत्र में पाई जाती हैं। यह रिसर्च इनकी लोकेशन को निश्चित करेगी। उन्होंने बताया कि चितकबरी कोयल गर्मियों में भारत आने वाले चंद प्रवासी पक्षियों में से एक है। बाकी पक्षी ठंड में मंगोलिया, साइबेरिया और चीन के उत्तर पूर्व से उड़कर भारत आते हैं।

उनका मानना है कि इस रिसर्च से जो तथ्य प्राप्त होंगए उससे जलवायु परिवर्तन को बेहतर ढंग से जानने में मदद मिलेगी।

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