पार्लियामेंट सत्र नहीं चलाना चाहते मोदी

हिसाम सिद्दीक़ी

मनमोहन सिंह की यूपीए हुकूमत के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने टूजी स्पेक्ट्रम और कोयला खदानों के एलाटमेंट में घपलों का झूटा इल्जाम लगाकर ने तकरीबन दो साल तक पार्लियामेंट सत्र नहीं चलने दिया था। उस वक्त बीजेपी बार-बार यह कह रही थी कि पार्लियामेंट चलाने की जिम्मेदारी सरकार पर है। अब बीजेपी सत्ता में है तो कह रही है कि अपोजीशन पार्लियामेंट चलने नही दे रहा है अब बीजेपी क्यों नहीं मानती कि सत्र चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है।

पार्लियामेंट का मानसून सत्र 19 जुलाई से शुरू हुआ था, खबर लिखे जाने तक बीस दिन गुजर चुके थे लेकिन एक दिन भी पार्लियामेंट सत्र ठीक से नहीं चल सकी, उसके दोनों सदनों यानी राज्य सभा और लोक सभा की कार्रवाई हंगामों की नज्र हो चुकी थी। इस दरम्यान मौके का फायदा उठा कर मोदी हुकूमत ने बारह बिल भी पास करा लिए। इन बिलों पर कोई चर्चा नहीं हुई, न ही यह बिल सेलेक्ट कमेटी या पार्लियामेंट की दूसरी कमेटियों को भेजे गए। महज सात-सात मिनटों में यह बिल पास कराए गए। कहा यह गया कि आवाज के वोट के जरिए पास किए गए हैं। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने तीन अगस्त को बीजेपी पार्लियामेंट्री पार्टी को खिताब करते हुए कहा कि अपोजीशन ने पार्लियामेंट सत्र में जो कुछ किया है उससे पार्लियामेंट, देश और जम्हूरियत की तौहीन हुई है। जो इंतेहाई काबिले मजम्मत है।
पार्लियामेंट के दोनों एवानों में हंगामे की वजह पेगासस के जरिए जासूसी, किसान आंदोलन और नए किसानी बिल रहे। अपोजीशन मेम्बरान खुसूसन राहुल गांधी का यह कहना रहा कि सरकार पेगासस जासूसी मामले की जांच कराए और किसानों के मतालबे के मुताबिक किसानी कानून वापस ले। लोक सभा और राज्य सभा में राहुल गांधी समेत कई मेम्बरान ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या सरकार ने इस्राईल की कम्पनी एनएसओ से पेगासस स्पाई वेयर खरीदा है और उसका इस्तेमाल किन-किन लोगों की जासूसी में किया गया। सरकार इसका कोई जवाब देने के बजाए एक ही रट लगाए है कि पार्लियामेंट सत्र शुरू होने से पहले पेगासस के बहाने हंगामा शुरू किया गया, जिसका वाहिद (एकमात्र) मकसद पार्लियामेंट सत्र में रूकावट डालना था और इसके जरिए सरकार व देश को बदनाम करना है।
पेगासस का मामला दुनिया के तकरीबन डेढ दर्जन मुल्कों में चल रहा है फ्रांस, मोरक्को, मैक्सिको, अलजीरिया और यह स्पाई वेयर बनाने वाले इस्राईल तक में इसकी जांच कराई जा रही है। इस्राईल सरकार ने तो यह स्पाईवेयर बनाने वाली कम्पनी एनएसओ पर छापा भी मरवाया है। वहां जांच इस बात की चल रही है कि एनएसओ कम्पनी ने किन-किन सरकारों को पेगासस स्पाईवेयर बेचा है और क्या कम्पनी ने किसी मुल्क के किसी गैर सरकारी इदारे को भी यह स्पाईवेयर बेच दिया। इस्राईल में इस मामले पर ज्यादा हंगामा तब मचा जब यह खुलासा हुआ कि फ्रांस के सदर एमैनुअल मैक्रो के टेलीफोन में भी यह स्पाईवेयर डाला गया। इस्राईल के डिफेंस मिनिस्टर खुद ही फ्रांसीसी सदर को सफाई देने फ्रांस पहुंचे वह हवाई अड्डे पर ही थे तभी इस्राईली सरकार ने एनएसओ पर छापा पड़वाया ताकि डिफेंस मिनिस्टर मैक्रांं को यह बता सकें कि उनकी सरकार इस मामले में कितनी संजीदा है।
दुनिया के डेढ दर्जन से ज्यादा मुल्कों के मीडिया संस्थानों और सहाफियों, सियासी लीडरान समेत तकरीबन एक हजार छः सौ (1600) लोगों की जासूसी पेगासस के जरिए की गयी। हर मुल्क में हंगामा है, जांच है, लेकिन भारत अकेला ऐसा मुल्क है जहां की मोदी सरकार इस मसले पर न तो जांच कराने को तैयार है न ही कोई संजीदा बयान देने के लिए। बार-बार यही कहा जा रहा है कि यह मुद्दा पार्लियामेंट सत्र में रूकावट डालने, देश और सरकार को बदनाम करने के लिए उठाया गया है। जब यही घिसा-पिटा बयान आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने राज्य सभा में दिया तो टीएमसी के शांतनु सेन ने उनके हाथ से कागज छीन कर फाड़ दिया। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक शांतनु सेन की यह कार्रवाई पार्लियामेंट की तौहीन है। इस कार्रवाई के लिए शांतनु सेन को इजलास से मोअत्तल भी कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार अगर पार्लियामेंट चलाना चाहे तो उसे पेगासस जासूसी मामले पर पार्लियामेंट में बहस भी करानी चाहिए और इस पूरे मामले की जांच भी करानी चाहिए। इन्हीं दो फैसलों से इजलास आसानी से चल सकता था लेकिन सत्र का न चलना ही सरकार को बेहतर लगता है क्योकि न सत्र चलेगा, न सरकार को अपनी नाकामियों पर जवाब देना पडे़गा।

मौके का फायदा उठाकर सरकार बगैर बहस के अपनी मर्जी के बिल भी पास करा लेगी। मसलन चार अगस्त को सुबह ग्यारह बजे पार्लियामेंट के दोनों सदनों में हंगामा हो गया। दोनों की कार्रवाई अगले दिन के लिए मुल्तवी हो गयी इसके बावजूद सरकार ने ‘लिमिटेड लिबर्टी पार्टनरशिप 2021, डिपाजिट इंशोरेंस और क्रेडिट गारंटी बिल 2021, एयरपोर्ट इकनामिक रेगुलेटरी अथारिटी बिल 2021 और नारियल डेवलपमेंट बोर्ड बिल बगैर किसी बहस के पास करा लिए।
पार्लियामेंट का इजलास न चल पाने की वजह से अवाम की गाढी कमाई का तकरीबन डेढ सौ करोड़ रूपया पानी में चला गया। खबर लिखे जाने तक दोनों एवानां में कम से कम एक सौ सात (107) घंटे काम होना चाहिए था लेकिन काम हुआ सिर्फ अट्ठारह घंटे उसमें भी हंगामा और शोर गुल होता रहा।

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