प. बंगाल में प्रवासी मजदूरों की प्रभारी डिप्टी मजिस्ट्रेट की कोरोना से मौत

मीडिया स्वराज डेस्क

कोविड 19 महामारी ने प. बंगाल की एक युवा अधिकारी को अपना शिकार बना लिया है। 38 वर्षीया देबदत्ता रॉय जो कि चंदननगर की डिप्टी मजिस्ट्रेट और बंगाल लौटे प्रवासी मजदूरों के मामलों की प्रभारी थीं, कोरोना पॉजिटिव पाई गईं और बीते सोमवार को वह जिंदगी की जंग हार गईं। उनके परिवार में पति के अलावा एक 4 साल का बेटा भी है। पति भी कोरोना पॉजिटिव हैं और फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

देबदत्ता रॉय की, 4 दिन पहले ही कोरोना रिपोर्ट आई थी। जिसके पॉजिटिव निकलने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होने पड़ा, किंतु भर्ती होने के अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गयी।

5 मई को 1186 प्रवासी बंगाली मजदूरों को लेकर पहली श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन राजस्थान के अजमेर से हुगली के डंकुनी जंक्शन पहुची थी। प्रवासियों की देखरेख, उनको क्वारेंटीन करने आदि की जिम्मेदारी देबदत्ता रॉय को दी गयी थी। उस दिन से लेकर 1 जुलाई तक लगातार श्रीमती रॉय अपने काम को बड़ी मुस्तैदी से निभाती रहीं। 1 जुलाई को खुद में कोविड जैसे लक्षण देख कर उन्होंने छुट्टी ले ली थी।

गत गुरुवार को बैरकपुर के बीएन बोस हॉस्पिटल से उनके कोविड पॉजिटिव होने की सूचना मिली जहां उनका कोविड टेस्ट हुआ था। इसके बाद रॉय ने खुद को घर मे ही होम क्वारेंटीन कर लिया था। रविवार को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत के बाद उन्हें सेरामपुर, हुगली के श्रमजीबी हस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ऑक्सिजन सपोर्ट में रखे जाने के बाद भी सोमवार तड़के उनकी मृत्यु हो गयी।

सहकर्मियों के बीच रॉय की छवि एक ऐसे अफसर की रही है, जिनके भीतर नेतृत्व करने की जन्मजात प्रतिभा थी। उनके कार्यालय के कर्मचारी बताते हैं कि वह अपने काम के प्रति इतनी समर्पित थीं कि क्वारेंटीन केंद्र की छोटी से छोटी समस्या को खुद देखती थीं। वह सुनिश्चित करती थीं कि मजदूरों को भोजन, आवास इत्यादि की कोई दिक्कत न रहे। इसके लिए वह दिन में कई कई बार केंद्र का दौरा भी करती थीं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कर्तव्यनिष्ठ अफसर के असमय चले जाने पर दुख जताते हुए उनके पति को एक चिट्ठी लिख कर अपनी संवेदना प्रस्तुत की। उन्होंने दिवंगत देबदत्ता रॉय को ‘असाधारण कोरोना योद्धा’ कह कर संबोधित किया।

चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने लिखा है, ‘कोविड 19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में देबदत्ता रॉय एक असाधारण योद्धा थीं। उन्होंने इस महामारी से लड़ने में जिस साहस और दृढ़ता का परिचय दिया है उसकी कोई दूसरी मिसाल नही है। मैं प्रदेश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली इस महान आत्मा को सैल्यूट करती हूँ’।

चंदननगर में डिप्टी मजिस्ट्रेट का दायित्व सम्हालने से पहले रॉय पुरुलिया जिले में खंड विकास अधिकारी (BDO) के पद पर थीं। वह प्रादेशिक सेवा में 2011 बैच की अधिकारी थीं।

रॉय मूलरूप से उत्तरी 24 परगना जिले के दमदम इलाके के मोतीझील की निवासी थीं, जिनका परिवार उन्ही के साथ हुगली के सरकारी आवास में रहता था। उनके पति, पबित्र रॉय, एक कंसल्टेंसी एजेंसी के साथ जुड़े हुए हैं।

बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह घोषणा की है कि महामारी की रोकथाम में जुटे कोरोना योद्धा, जैसे डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी, पुलिस बल, सरकारी कर्मचारी आदि की अगर कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु हो जाती है, तो सरकार उनके परिवार को 10 लाख रुपये की वित्तीय मदद के अलावा परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी देगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में पुलिस बल के 268 सदस्यों समेत 30 डॉक्टर, 43 नर्स, और 62 सरकारी कर्मचारी अब तक कोविड की चपेट में आ चुके हैं।

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