मुंगेर फायरिंग के बाद सुर्खियों में नीतीश का ‘साया’

पटना: बिहार के चुनावी रण में सभी प्रमुख सियासी दल जमकर जोरआजमाइश में जुटे हुए हैं. ऐसे में भला सत्ताधारी जेडीयू क्यों पीछे रहे. पार्टी के अध्यक्ष नीतीश कुमार जमकर प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं. एक-एक दिन में वो तीन से पांच रैलियां कर रहे हैं.

जहां नीतीश कुमार मंच पर आकर विरोधियों को घेर रहे हैं तो उनकी पार्टी के रणनीतिकार पर्दे के पीछे से चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाने का काम कर रहे हैं. इस फेहरिस्त में आरसीपी सिंह यानी रामचंद्र प्रसाद सिंह का नाम बेहद अहम है. आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार के अच्छे दोस्त ही नहीं हैं बल्कि, उनके बड़े सियासी सलाहकारों में भी हैं. हालांकि, आरसीपी सिंह ज्यादा सुर्खियों में रहना पसंद नहीं करते हैं लेकिन बिहार में पहले चरण के चुनाव से ठीक पहले मुंगेर में हुई हिंसा के बाद अचानक उनका नाम चर्चा में आ गया.

मुंगेर की घटना के बाद इसलिए सुर्खियों में आया आरसीपी सिंह का नाम

दरअसल, मुंगेर में 26 अक्टूबर की रात दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस-पब्लिक के बीच झड़प और पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हो गए. उस समय जिले की एसपी लिपि सिंह थीं, जो कि आरसीपी सिंह की बेटी हैं. लिपि सिंह पर आरोप लगे कि उनके ही आदेश पर पुलिस ने फायरिंग की जिसमें एक शख्स की मौत हुई. इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए और लिपि सिंह पर कार्रवाई की मांग की गई. घटना के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर 29 अक्टूबर को एक बार फिर मुंगेर में जमकर हंगामा देखने को मिला. नाराज लोगों ने आगजनी और तोड़फोड़ की. बवाल बढ़ने पर चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए तुरंत ही एसपी लिपि सिंह और डीएम राजेश मीणा को हटा दिया और नए अधिकारियों की तैनाती की. जिसके बाद हालात सामान्य हुए.

राज्यसभा सांसद और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार

मुंगेर मामले में एसपी लिपि सिंह पर कार्रवाई में देरी के पीछे लोगों का आरोप यही था कि उनके पिता आरसीपी सिंह जेडीयू के बड़े नेता हैं. नीतीश कुमार का करीबी होने की वजह से लिपि सिंह पर कार्रवाई में देरी हुई. विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को लेकर जेडीयू पर निशाना साधा. यही नहीं बेगूसराय में आरसीपी सिंह के दौरे के समय उन्हें आक्रोशित लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था. इतने विरोध के बाद भी अभी तक जेडीयू या फिर बीजेपी की ओर से आरसीपी सिंह को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई. इसी से उनकी जेडीयू में मजबूत पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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