नेहरू के बारे में सरदार पटेल की राय

1949 में नेहरू के 60वें जन्मदिन पर प्रकाशित अभिनंदन ग्रंथ के लिए सरदार पटेल के लिखे पत्र के कुछ अंश *जवाहर लाल और मैं आज़ादी की लड़ाई के सिपाही, कांग्रेस की कार्यकारी समिति एवं अन्य समितियों में सहयात्री और कांग्रेस तथा देश के मार्गदर्शक महात्मा गांधी के अनुयायी रहे हैं।

उस महान व्यक्तित्व के असमय जाने के बाद उनके मार्गदर्शन के बिना ही कांग्रेस पर और हम दोनों पर इस महादेश की विकराल समस्याओं से निपटने के प्रबंधन में भी हम सहयात्री और सहयोगी रहे हैं। जीवन के विविध क्षेत्रों में एक साथ आत्मीयता के साथ काम करते हुए स्वाभाविक रूप से हमारी अन्तरंगता,सहयोग और स्नेह उत्तरोत्तर बढ़ता ही रहा है।

बहुत से लोग शायद इसकी कल्पना भी नही कर सकते कि थोड़े समय भी साथ न होने पर और समस्याओं और कठिनाइयों पर विमर्श के लिए हम दोनों ही एक दूसरे की कितनी जरूरत महसूस करते हैं।

आज़ादी के फौरन बाद जब हमारे सामने समस्याओं का अंबार था,देश को चलाने और हमारे विश्वासों और मान्यताओं को अमली जामा पहनाने के लिए उनसे बेहतर कोई दूसरा व्यक्ति नही हो सकता था।वे हमारे प्रकाश स्तंभ हैं।

मुझसे अधिक कोई और नही जानता कि पिछले दो वर्षों में देश को हर मुसीबत से बाहर निकालने में उन्होंने कितना परिश्रम किया है।विपरीत और विकराल परिस्थितियों, देश के सबसे बड़े पद की गरिमा और जिम्मेदारियों ने उन्हें असमय बूढ़ा कर दिया है।

देश के बारे में उनके विचारों में कभी कभी इतनी गहराई होती है कि उसे नापना और समझना मुश्किल होता है लेकिन जिस तरह पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता और युवा आवेग के साथ वे अपने साथियों के साथ विचार विनिमय करते हैं वे जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमा को तोड़ते हुए सभी को अपने प्यार में बांध लेते हैं,यह उनकी बहुत बड़ी ताकत है।

प्रस्तुति: राकेश

support media swaraj

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

13 + five =

Related Articles

Back to top button