मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भारतीय मूल की स्वाति मोहन ने उतारा

स्वाति पहले बच्चों का डॉक्टर बनना चाहती थीं

नासा के मंगल ग्रह अंतरिक्ष यान को संचालित करने वाली टीम की अगुवाई भारतीय मूल की अमेरिकी इंजीनियर डॉ. स्वाति मोहन कर रही हैं।उन्होंने मिशन के ऊंचाई पर रोवर के कंट्रोल और  रोवर की लैंडिंग सिस्टम को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

भारतीय मूल की इंजीनियर डा स्वाति मोहन

मंगल ग्रह के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के प्रवेश करते ही एक धमाका हुआ लेकिन रोवर ने सात मिनट के धमाके से बचते हुए ऐतिहासिक लैंडिंग सफलतापूर्वक कर ली।मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान के सफलतापूर्वक लैंडिंग होते ही स्वाति ने खुशीपूर्वक कहा,  “टचडाउन कन्फर्म्ड! मंगल ग्रह की सतह पर रोवर सुरक्षित है, जो पिछले जीवन के संकेतों की तलाश शुरू करने के लिए तैयार है।” 

डॉ स्वाति जब एक साल की थीं तभी अमेरिका चली गई थीं। उनका बचपन उत्तरी वर्जीनिया-वाशिंगटन डीसी मेट्रो क्षेत्र में बीता है।

स्वाति पहले बच्चों का डॉक्टर बनना चाहती थीं लेकिन नौ साल की उम्र में ‘स्टार ट्रेक’ फिल्म देखने के बाद उन्होंने महसूस किया वे “ब्रह्मांड में नए और सुंदर स्थान ढूंढना चाहती हैं।”

इसके बाद उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।बाद में मैसेच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) से उन्होंने एयरोनॉटिक्स / एस्ट्रोनॉटिक्स में पीजी और पीएचडी पूरी की है।

अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह पर पहुंचने के लिये 30 जुलाई 2020 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेराल एयर फोर्स स्टेशन से एक टन वजनी परसीवरेंस अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित किया गया था। वह 47 करोड़ किलोमीटर की यात्रा सात महीने में पूरी करने के बाद 18फरवरी 2021को अपने निर्धारित समय और लक्ष्य पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया।

यह मंगल ग्रह यान 3 मीटर लंबा, 2.7  मीटर चौड़ा और 2.2  मीटर ऊंचा है। इसका कुल वजन 1025किलो है।

यह मंगल ग्रह के जेज़ेरो क्रेटर पर उतरा जो प्राचीन नदी के डेल्टा पर बना हुआ है। यह क्रेटर कोई चालीस किलोमीटर का है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 3.5 खरब साल पहले वहां से नदी बहती थी जो बाद में सूख गयी और वहां एक झील बन गयी। अनुमान है कि मंगल पर जीवन के अवशेष इस क्रेटर में मिल सकते हैं। 

करोड़ों साल पहले मंगल का वायुमंडल मोटा था। इस परियोजना की उप परियोजना अधिकारी केटी स्टैक मॉर्गन के अनुसार वैज्ञानिक वहां जैव हस्ताक्षर की खोज करेंगे।

इस मंगल ग्रह मिशन का मुख्य उद्देश्य मंगल पर प्राचीन जीवन के प्रमाणों की खोज और वहां से चट्टान और रेगोलीथ यानी टूटे हुए पत्थर और मिट्टी के नमूने इकट्ठा करके धरती पर वापस लाना।

इस लिंक पर भी जायें:

https://www.bbc.com/news/science-environment-53129281

इस मंगल ग्रह अंतरिक्ष यान के पेट में एक हेलिकॉप्टर भी है जिसका नाम है इंजेन्यूटी । जिसका दूसरी दुनिया में पहली बार परीक्षण किया जा रहा है।वह तीस मंगल दिवसों तक फ्लाइट टेस्ट करेगा। शुरू में वह वायु मंडल में बीस से तीस सेकंड तक उड़ेगा। मंगल का वायुमंडल अत्यंत पतला है।धीरे धीरे वह अपनी उड़ान की अवधि और दूरी बढ़ाता जायेगा।

अधिक जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें :

https://mars.nasa.gov/technology/helicopter/

मंगल ग्रह पर पहुँचा अंतरिक्ष यान अपने साथ धरती के दो करोड़ लोगों के नाम भी ले गया है जिसे वह वहीं छोड़ देगा। ताकि अगर वहां कोई एलियंस रहते हों तो उन्हें धरती के लोगों के बारे में जानकारी मिल सके। और अगर कुछ नहीं भी हो तो भविष्य में धरती से मंगल पर आने वाले लोगों को इसका प्रमाण मिल सके कि कभी वहां धरती से कुछ आया था।

पंकज प्रसून
पंकज प्रसून वरिष्ठ पत्रकार

पंकज प्रसून , वरिष्ठ पत्रकार

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